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सड़क पर मिले VVPAT के पर्चे, मौके पर पहुँचीं CPI(M) की उम्मीदवार गार्गी, चुनाव आयोग को लिखा पत्र

श्रेया जायसवाल03 मई 20262 मिनट पठन32 बार पढ़ा गया
सड़क पर मिले VVPAT के पर्चे। मोहम्मद सलीम ने 'X' (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “बज्र आठुनी - फस्का गेरो! (कड़ी सुरक्षा के बावजूद बड़ी लापरवाही)। नोआपाड़ा केंद्र की VVPAT पर्चियाँ मतगणना से पहले ही सड़क पर लुढ़क रही हैं। और हाँ, इनमें से ज़्यादातर गार्गी के 'हँसिया-हथौड़ा' के वोट हैं।”
सड़क पर मिले VVPAT के पर्चे, मौके पर पहुँचीं CPI(M) की उम्मीदवार गार्गी, चुनाव आयोग को लिखा पत्र

सड़क पर मिले VVPAT के पर्चे,

 मौके पर पहुँचीं CPI(M) की उम्मीदवार गार्गी, 

चुनाव आयोग को लिखा पत्र

मतगणना से एक दिन पहले सड़क पर VVPAT के पर्चे बिखरे हुए मिले। ये पर्चे मध्यमग्राम विधानसभा क्षेत्र के नीलगंज सुभाषनगर इलाके में एक पेट्रोल पंप के पास पड़े थे। गौरतलब है कि ये पर्चे नोआपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के हैं।

मध्यमग्राम थाने के अंतर्गत बारासात 1 नंबर ब्लॉक के नीलगंज इलाके में ये VVPAT पर्चे पड़े हुए देखे गए। घटना की सूचना मिलते ही नोआपाड़ा केंद्र से CPI(M) की उम्मीदवार गार्गी चटर्जी मौके पर पहुँचीं। उन्होंने आरोप लगाया, "चुनाव आयोग ने जानबूझकर इस घटना को अंजाम दिया है। मैंने रिटर्निंग ऑफिसर को फोन किया था, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। ज़रूरत पड़ी तो हम वोट गणना रुकवा देंगे।"

गार्गी ने आगे यह भी दावा किया कि ज़्यादातर पर्चों पर CPI(M) को दिए गए वोट दिखाई दे रहे हैं।

मोहम्मद सलीम ने 'X' (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “बज्र आठुनी - फस्का गेरो! (कड़ी सुरक्षा के बावजूद बड़ी लापरवाही)। नोआपाड़ा केंद्र की VVPAT पर्चियाँ मतगणना से पहले ही सड़क पर लुढ़क रही हैं। और हाँ, इनमें से ज़्यादातर गार्गी के 'हँसिया-हथौड़ा' के वोट हैं।”

सड़क पर VVPAT पर्चियाँ मिलने की इस घटना को लेकर CPI(M) ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि नोआपाड़ा विधानसभा क्षेत्र में हुई यह घटना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में एक गंभीर अनियमितता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि EVM के साथ अवैध रूप से छेड़छाड़ की गई थी। यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि यह पूरा मामला सुनियोजित है।

CPI(M) ने माँग की है कि चुनाव आयोग स्पष्ट करे कि यह घटना कैसे हुई और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान की जाए।

अपलोडर: श्रेया जायसवाल

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'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़13 अप्रैल 2026