श्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है।

एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है।

लेकिन लेफ्टफ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का।  यह उससे कहीं ज्यादा हैं।

लेफ्टफ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”

बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत इस पथ की प्रेरणा देती है।  

रवींद्रनाथ ठाकुर ने कहा था —  

“जहाँ विश्व मानव का एक आंगन में मिलन हो, वहाँ बंगाल का स्थान हो।”

उनकी गीतांजलि, रवींद्रसंगीत और मानवतावादी दृष्टिकोण सिखाते हैं कि संस्कृति कोई संकीर्ण सीमा नहीं, बल्कि सार्वभौमिक एकता और सद्भाव का माध्यम है।  

काजी नजरुल इस्लाम — विद्रोही कवि — ने हिंदू-मुस्लिम एकता, मजदूर-किसान के अधिकार और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष को अपनी रचनाओं में अमर बना दिया। उनकी कविता “बिद्रोही” आज भी हमें याद दिलाती है कि असली बंगाली अस्मिता संकीर्णता या धर्मांधता में नहीं, बल्कि समानता, स्वतंत्रता और न्याय के संघर्ष में निहित है।

 “लेफ्ट फॉर फ्यूचर” इसी विरासत को आगे बढ़ाता है।  

यह मॉडल बंगाल की मिट्टी से उपजा है — किसानों को भूमि का अधिकार, मेहनतकशों को उचित मूल्य और श्रम को उचित सम्मान और भागीदारी, हर बच्चे को कॉलेज तक सहज गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हर नागरिक को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं। यह सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से समृद्ध बंगाल का सपना है, जहाँ रवींद्र-नजरुल की परंपरा जीवित रहे और संस्कृति कभी राजनीतिक हथियार न बने।

कार्य करते हुए भूलें हो सकती हैं, लेकिन उसी कार्य से सीख मिलती है, सुधार होता है और निरंतर प्रगति संभव होती है। लेफ्टफ्रंट इसी सिद्धांत को अपनाते हुए अनुभवों से सीख ले कर बंगाल के उज्ज्वल भविष्य के लिए आधुनिक, बेहतर, अधिक समावेशी और प्रभावी नीतियां तैयार करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

टीएमसी के 15 वर्षों के शासन में भ्रष्टाचार, कटमनी और तुष्टिकरण ने बंगाल को कमजोर कर दिया है। वहीं भाजपा के आने पर सांप्रदायिक तनाव और दिल्ली-केंद्रित नीतियां, एकपक्षीय प्रवृति बंगाल की सांस्कृतिक अस्मिता को खतरे में डाल सकती हैं। दोनों ही सीमित और पुराने जमाने के मॉडल हैं।

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' एक नया, आधुनिक, व्यावहारिक और समावेशी मॉडल है, जिसमें शामिल हैं:

• भूमि सुधार का अगला चरण — किसानों को आधुनिक तकनीक और बाजार में न्यायपूर्ण हक  

• युवाओं के लिए रोजगार-केंद्रित औद्योगिक विकास, जहाँ लोकतंत्र कारखानों तक पहुंचे  

• शिक्षा और स्वास्थ्य में पर्याप्त सार्वजनिक निवेश, ताकि हर बंगाली का भविष्य सुरक्षित हो  

• सांस्कृतिक स्वतंत्रता, जिसमें रवींद्र-नजरुल की भावना से प्रेरित कला, साहित्य और संगीत फल-फूल सकें  

“लेफ्ट फॉर फ्यूचर” के प्रमुख संकल्प (लेफ्टफ्रंट के घोषणा-पत्र के अनुसार):

01. प्रत्येक परिवार में कम से कम एक स्थायी रोजगार और हर पंजीकृत बेरोजगार युवा को कम से कम दो नौकरी के अवसर।  

02. शहरों में 120 दिन और गांवों में 200 दिन का रोजगार गारंटी — दैनिक मजदूरी ₹600।  

03. पांच वर्षों में सभी सरकारी रिक्त पद भरना और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया।  

04. भारी-मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन, नए सॉफ्टवेयर-हार्डवेयर पार्क और हर जिले में औद्योगिक क्षेत्र।  

05. श्रमिकों के लिए बढ़ी हुई न्यूनतम मजदूरी, समान काम के लिए समान वेतन और कामकाजी महिलाओं के लिए क्रेच।  

06. 16 फसलों पर लागत का डेढ़ गुना MSP।  

07. शिक्षा पर 20% और स्वास्थ्य पर 10% बजट — स्नातक तक फीस माफी और हर जिले में आधुनिक अस्पताल व मेडिकल कॉलेज।  

08. 100 यूनिट बिजली मुफ्त, 200 यूनिट तक आधी दर।  

09. अवैध माइक्रो-फाइनेंस पर सख्त कार्रवाई और पर्यावरण संरक्षण।  

10. भ्रष्टाचार के खिलाफ विशेष जांच आयोग।  

11. 20 लाख नए स्वयं सहायता समूह (SHG) और महिलाओं का सशक्तिकरण।  

12. वरिष्ठ नागरिकों को ₹6000 मासिक पेंशन और स्वास्थ्य योजना।  

13. अल्पसंख्यक, आदिवासी, SC, ST और OBC के लिए शिक्षा, आरक्षण और सांस्कृतिक सुरक्षा।

“लेफ्ट फॉर फ्यूचर” का सार यही है — एक ऐसा बंगाल जहां कोई भूखा न सोए, कोई बेरोजगार न रहे, संस्कृति राजनीति से ऊपर हो और विकास हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचे।

अब समय आ गया है कि टीएमसी-भाजपा की संकीर्ण द्विध्रुवीय राजनीति से मुक्त हों, इस जाल को तोड़ें और सोच-समझकर फैसला करें।  

बंगाल की सांस्कृतिक विरासत समता, भाईचारे और प्रगति की ओर बुला रही है।  

वक़्त आ गया है कि “लेफ्ट फॉर फ्यूचर” को मजबूत करें और बंगाल की असली अस्मिता को पुनः जीवित करें। यह हर वोटर का दायित्व है। निर्णय हर एक वोटर का, भविष्य पूरे पश्चिम बंगाल का। 

जानकारी के लिए लेफ्टफ्रंट का घोषणा-पत्र जरूर पढ़ें।