सोमवार, 25 मई 2026
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फलता विधानसभा चुनाव पुनर्मतदान : बूथ-वाइज़ चुनावी रिपोर्ट और उसके निहितार्थफलता में भाजपा की जीत, दूसरे स्थान पर माकपा; हाशिए के लोगों की लड़ाई पर सलीम का ज़ोरक्यूबा अकेला नहीं है: अमेरिकी साम्राज्यवाद की नई आक्रामकता की घोर निंदाकलकत्ता बन गया बनर्जी परिवार का निजी साम्राज्य: 45 प्लॉट पर कब्जा, 1100 परिवार उजाड़ेपर्दे के पीछे के रणनीतिकार: स्वतःस्फूर्त गुस्सा या 'सेफ्टी वाल्व' की चालाकी? (काकरोच जनता पार्टी की अंतर्कथा -2 ) - केशव भट्टड़शहीद कर्तार सिंह सराभा -भगत सिंहहिंदी की प्रसिद्ध लेखिका नासिरा शर्मा ने फिलीस्तीनी कवयित्री फ़दवा तूकान को फेसबुक पोस्ट पर श्रद्धांजलि दी है।" सोमेन चन्द-फासीवादविरोधी संघर्ष में शहादत देने वाले प्रथम साहित्यकार "- विद्युत पालफलता विधानसभा चुनाव पुनर्मतदान : बूथ-वाइज़ चुनावी रिपोर्ट और उसके निहितार्थफलता में भाजपा की जीत, दूसरे स्थान पर माकपा; हाशिए के लोगों की लड़ाई पर सलीम का ज़ोरक्यूबा अकेला नहीं है: अमेरिकी साम्राज्यवाद की नई आक्रामकता की घोर निंदाकलकत्ता बन गया बनर्जी परिवार का निजी साम्राज्य: 45 प्लॉट पर कब्जा, 1100 परिवार उजाड़ेपर्दे के पीछे के रणनीतिकार: स्वतःस्फूर्त गुस्सा या 'सेफ्टी वाल्व' की चालाकी? (काकरोच जनता पार्टी की अंतर्कथा -2 ) - केशव भट्टड़शहीद कर्तार सिंह सराभा -भगत सिंहहिंदी की प्रसिद्ध लेखिका नासिरा शर्मा ने फिलीस्तीनी कवयित्री फ़दवा तूकान को फेसबुक पोस्ट पर श्रद्धांजलि दी है।" सोमेन चन्द-फासीवादविरोधी संघर्ष में शहादत देने वाले प्रथम साहित्यकार "- विद्युत पाल
फलता विधानसभा चुनाव पुनर्मतदान : बूथ-वाइज़ चुनावी रिपोर्ट और उसके निहितार्थ

विश्लेषण

फलता विधानसभा चुनाव पुनर्मतदान : बूथ-वाइज़ चुनावी रिपोर्ट और उसके निहितार्थ

फलता विधानसभा के पुनर्मतदान के नतीजे अभूतपूर्व हैं। कुल 285 बूथों का गणित इस प्रकार है:

| श्रेणी | बूथों की संख्या | राजनीतिक निहितार्थ |

| सीपीआई(एम) की बढ़त/जीत | 58 बूथ | वामपंथ का जमीनी स्तर पर मजबूत पुनरुत्थान। |

| भाजपा की बढ़त | 226 बूथ | दक्षिणपंथी ध्रुवीकरण अभी भी कई हिस्सों में मजबूत। |

| टाई (बराबरी) | 01 बूथ | सीपीआई(एम) और भाजपा के बीच सीधी और कांटे की टक्कर। |

| तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीत | 00 बूथ | सत्ताधारी दल का पूरी तरह से सफाया। |

केशव कुमार भट्टड़
कुछ घंटे पहले39 क्लिक
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फलता में भाजपा की जीत, दूसरे स्थान पर माकपा; हाशिए के लोगों की लड़ाई पर सलीम का ज़ोर

राज्य

फलता में भाजपा की जीत, दूसरे स्थान पर माकपा; हाशिए के लोगों की लड़ाई पर सलीम का ज़ोर

"जिस तरह इस गर्मी में तृणमूल कांग्रेस बर्फ की तरह पिघल रही है, उसके विपरीत माकपा अपनी ताकत को मजबूत कर रही है। हम हाशिए के लोगों के साथ खड़े हैं और इस परिणाम में इसकी साफ झलक मिल रही है। हाशिए पर मौजूद लोग अब अपने आश्रय के रूप में माकपा को ही चुन रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस असल में आरएसएस (RSS) की ही एक मुखौटा या सजाई हुई टीम थी। उन्होंने गुंडागर्दी और मस्तानी के दम पर जो माहौल बनाया था, उसमें जनता अपनी राय नहीं दे पा रही थी। अगर लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिले और हम लोकतंत्र को वापस ला सकें, तो लोकतंत्र की स्थापना के साथ-साथ वामपंथ का पुनरुत्थान भी निश्चित है; फलता के नतीजे यही साबित करते हैं।"

श्रेया जायसवाल
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क्यूबा अकेला नहीं है: अमेरिकी साम्राज्यवाद की नई आक्रामकता की घोर निंदा

ब्लॉग

क्यूबा अकेला नहीं है: अमेरिकी साम्राज्यवाद की नई आक्रामकता की घोर निंदा

जनवरी 2026 में एपस्टीन फाइल्स के बड़े हिस्से सार्वजनिक किए गए, जिनमें ट्रंप का नाम भी शामिल था। घरेलू विरोध और नाकामियों के बीच ट्रंप प्रशासन बाहरी आक्रामकता के माध्यम से राष्ट्रवादी उन्माद फैलाकर अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रहा है। यह साम्राज्यवादी रणनीति का क्लासिक उदाहरण है। अब इसका प्रमुख लक्ष्य समाजवादी क्यूबा है। क्यूबा की जनता और उसका समाजवादी मॉडल साम्राज्यवाद के विरुद्ध अटूट प्रतिरोध का प्रतीक है। 20-22 घंटे बिजली कटौती झेलते हुए भी क्यूबा ने सिर नहीं झुकाया। विश्व के सभी प्रगतिशील, शोषित और न्यायप्रिय शक्तियाँ क्यूबा के साथ खड़ी हैं। भारतीय वामपंथी पार्टियाँ: सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई(एमएल) लिबरेशन, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी धमकियों की निंदा की। उन्होंने इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया और भारत सरकार से क्यूबा के साथ एकजुटता व्यक्त करने की माँग की।

केशव कुमार भट्टड़
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फलता विधानसभा चुनाव पुनर्मतदान : बूथ-वाइज़ चुनावी रिपोर्ट और उसके निहितार्थ

विश्लेषण

फलता विधानसभा चुनाव पुनर्मतदान : बूथ-वाइज़ चुनावी रिपोर्ट और उसके निहितार्थ

फलता विधानसभा के पुनर्मतदान के नतीजे अभूतपूर्व हैं। कुल 285 बूथों का गणित इस प्रकार है:

| श्रेणी | बूथों की संख्या | राजनीतिक निहितार्थ |

| सीपीआई(एम) की बढ़त/जीत | 58 बूथ | वामपंथ का जमीनी स्तर पर मजबूत पुनरुत्थान। |

| भाजपा की बढ़त | 226 बूथ | दक्षिणपंथी ध्रुवीकरण अभी भी कई हिस्सों में मजबूत। |

| टाई (बराबरी) | 01 बूथ | सीपीआई(एम) और भाजपा के बीच सीधी और कांटे की टक्कर। |

| तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीत | 00 बूथ | सत्ताधारी दल का पूरी तरह से सफाया। |

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
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फलता में भाजपा की जीत, दूसरे स्थान पर माकपा; हाशिए के लोगों की लड़ाई पर सलीम का ज़ोर

राज्य

फलता में भाजपा की जीत, दूसरे स्थान पर माकपा; हाशिए के लोगों की लड़ाई पर सलीम का ज़ोर

"जिस तरह इस गर्मी में तृणमूल कांग्रेस बर्फ की तरह पिघल रही है, उसके विपरीत माकपा अपनी ताकत को मजबूत कर रही है। हम हाशिए के लोगों के साथ खड़े हैं और इस परिणाम में इसकी साफ झलक मिल रही है। हाशिए पर मौजूद लोग अब अपने आश्रय के रूप में माकपा को ही चुन रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस असल में आरएसएस (RSS) की ही एक मुखौटा या सजाई हुई टीम थी। उन्होंने गुंडागर्दी और मस्तानी के दम पर जो माहौल बनाया था, उसमें जनता अपनी राय नहीं दे पा रही थी। अगर लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिले और हम लोकतंत्र को वापस ला सकें, तो लोकतंत्र की स्थापना के साथ-साथ वामपंथ का पुनरुत्थान भी निश्चित है; फलता के नतीजे यही साबित करते हैं।"

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
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क्यूबा अकेला नहीं है: अमेरिकी साम्राज्यवाद की नई आक्रामकता की घोर निंदा

ब्लॉग

क्यूबा अकेला नहीं है: अमेरिकी साम्राज्यवाद की नई आक्रामकता की घोर निंदा

जनवरी 2026 में एपस्टीन फाइल्स के बड़े हिस्से सार्वजनिक किए गए, जिनमें ट्रंप का नाम भी शामिल था। घरेलू विरोध और नाकामियों के बीच ट्रंप प्रशासन बाहरी आक्रामकता के माध्यम से राष्ट्रवादी उन्माद फैलाकर अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रहा है। यह साम्राज्यवादी रणनीति का क्लासिक उदाहरण है। अब इसका प्रमुख लक्ष्य समाजवादी क्यूबा है। क्यूबा की जनता और उसका समाजवादी मॉडल साम्राज्यवाद के विरुद्ध अटूट प्रतिरोध का प्रतीक है। 20-22 घंटे बिजली कटौती झेलते हुए भी क्यूबा ने सिर नहीं झुकाया। विश्व के सभी प्रगतिशील, शोषित और न्यायप्रिय शक्तियाँ क्यूबा के साथ खड़ी हैं। भारतीय वामपंथी पार्टियाँ: सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई(एमएल) लिबरेशन, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी धमकियों की निंदा की। उन्होंने इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया और भारत सरकार से क्यूबा के साथ एकजुटता व्यक्त करने की माँग की।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
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ब्लॉग

कलकत्ता बन गया बनर्जी परिवार का निजी साम्राज्य: 45 प्लॉट पर कब्जा, 1100 परिवार उजाड़े

- ममता बनर्जी के घर के 400 गज के दायरे में 45 प्लॉट बनर्जी परिवार के कब्जे में।

- कालीघाट अब 'बनर्जीपाड़ा' बन गया, स्थानीय लोग उजाड़कर बेघर।

- लिप्स एंड बाउंस से लेकर विश्व बांग्ला तक — हर घोटाले की जड़ का ठिकाना 30बी हरिश चटर्जी स्ट्रीट।

- सत्ता के 15 साल में जमीन माफिया का मॉडल — भांगड़ से डायमंड हार्बर तक।

- अब जब सत्ता गई तो नोटिस आया, लेकिन सवाल है — कौन जवाबदेह होगा?

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
कुछ घंटे पहले61 क्लिक
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पर्दे के पीछे के रणनीतिकार: स्वतःस्फूर्त गुस्सा या 'सेफ्टी वाल्व' की चालाकी? (काकरोच जनता पार्टी की अंतर्कथा -2 ) - केशव भट्टड़

विश्लेषण

पर्दे के पीछे के रणनीतिकार: स्वतःस्फूर्त गुस्सा या 'सेफ्टी वाल्व' की चालाकी? (काकरोच जनता पार्टी की अंतर्कथा -2 ) - केशव भट्टड़

इस शृंखला का यह दूसरा खंड इस डिजिटल लहर के रणनीतिक और प्रासंगिक पहलू को उजागर करता है। इसमें तथ्यपरक विश्लेषण है कि इसके पीछे बोस्टन रिटर्न और 'आप' के पूर्व सोशल मीडिया एक्सपर्ट अभिजीत दीपके का दिमाग है। यह खंड बताता है कि यह आंदोलन पूरी तरह स्वतःस्फूर्त नहीं है, बल्कि CJI के एक बयान के बाद युवाओं के आक्रोश को भुनाने की सोची-समझी क्रोनोलॉजी है। यहाँ 'सेफ्टी वाल्व थ्योरी' के तहत यह आशंका जताई गई है कि यह ट्रेंड युवाओं के वास्तविक और आक्रामक गुस्से को सड़कों पर आने से रोकने और उसे 'इंटरनेट मज़ाक' में बदलकर ठंडा करने की चालाकी भी हो सकता है। फिलहाल, इसका एक्स (X) अकाउंट भारत में ब्लॉक किया जाना यह दिखाता है कि सत्ता इसे सिर्फ एक मज़ाक नहीं मान रही है, बल्कि इसमें चुनौती की संभावना देख रही है।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
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शहीद कर्तार सिंह सराभा -भगत सिंह

श्रद्धांजलि

शहीद कर्तार सिंह सराभा -भगत सिंह

कर्तारसिंह ने बड़ी मस्तानी अदा से केवल इतना कहा, "फांसी ही तो चढ़ा देंगे, और क्या? हम इससे नहीं डरते।"

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
कुछ घंटे पहले28 क्लिक
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हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका नासिरा शर्मा ने फिलीस्तीनी कवयित्री फ़दवा तूकान को फेसबुक पोस्ट पर श्रद्धांजलि दी है।

अंतर्राष्ट्रीय

हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका नासिरा शर्मा ने फिलीस्तीनी कवयित्री फ़दवा तूकान को फेसबुक पोस्ट पर श्रद्धांजलि दी है।

कवयित्री की एक-एक पंक्ति बीस कमांडो पर भारी पड़ती है। इसके बाद फ़दवा के लिखने, छपने, पढ़ने पर रोक लगा दी गयी। जेल जाना, पूछताछ और कई तरह के अत्याचारों को सहती फ़दवा अपने देश में जमीं रहीं जब तक उन्हें मौत की सजा नहीं सुनायी गयी। वह मौत नहीं जंग चाहती थीं। इसलिए शरणार्थी बनना मंज़ूर कर लिया। 1917 में नेबुलुस में पैदा हुई फ़दवा पहले गीत, संगीत और घुमक्कड़ी की शौक़ीन थीं। पिता चाहते थे कि फ़दवा अपने भाई इब्राहीम तुकान की तरह विरोधी कविताएँ लिखें, मगर उन्हें यह मंज़ूर न हुआ। 1967 में जब फ़िलिस्तीन की करारी हार हुई तो फ़दवा ख़्वाबों से जागीं और एक कविता ‘मैं हरगिज़ नहीं रोऊँगी ‘लिखी और अपनी शायरी का अंदाज़ बदल लिया।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
कुछ घंटे पहले41 क्लिक
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" सोमेन चन्द-फासीवादविरोधी संघर्ष में शहादत देने वाले प्रथम साहित्यकार "- विद्युत पाल

अंतर्राष्ट्रीय

" सोमेन चन्द-फासीवादविरोधी संघर्ष में शहादत देने वाले प्रथम साहित्यकार "- विद्युत पाल

" सोमेन का परिचय उन मार्क्सवादी क्रांतिकारियों से हुआ जो अन्दमान में जेल की अवधि पूरी कर घर आये थे, जैसे सतीश पकड़ाशी एवं अन्य। उनका गहरा असर सोमेन के जीवन पर पड़ा। इस असर के कारण सोमेन के नजरिए एवं सोच के तरीके में बदलाव आया। स्पेन के गृहयुद्ध में कलाकारों एवं लेखकों ने जो महान त्याग स्वीकारे, उसके बारे में सुनने के बाद सोमेन, निराश व उद्यमशून्य असहाय गरीब जनता के जीवन की कहानियों पर आधारित, आम आदमी का साहित्य रचने को प्रेरित हुए। "

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
कुछ घंटे पहले88 क्लिक
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वेबसाइट बंद की गई: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का आरोप

राष्ट्रीय

वेबसाइट बंद की गई: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का आरोप

" यदि मतदाता सूची से वैध नाम हटाए गए और यह पकड़ा गया, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को यूएपीए (UAPA) कानून के तहत गिरफ्तार किया जाएगा; क्योंकि किसी का मताधिकार छीनना आतंकवाद से कम नहीं है। "

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
23 मई 202639 क्लिक
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डिजिटल विद्रोह या पीआर का खेल? (कॉकरोच जनता पार्टी की अंतर्कथा-1 )

विश्लेषण

डिजिटल विद्रोह या पीआर का खेल? (कॉकरोच जनता पार्टी की अंतर्कथा-1 )

तीन खंडों में पूरा विश्लेषण पढ़ें। इस पहले खंड में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के सोशल मीडिया पर अचानक वायरल होने के प्राथमिक कारणों की पड़ताल की गई है। यह स्पष्ट करता है कि यह कोई वास्तविक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि रचनात्मक कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा आज की गंभीर और उबाऊ राजनीति पर किया गया एक तीखा व्यंग्य (Satire) है। इसमें 'कॉकरोच' के प्रतीकवाद को समझाते हुए बताया गया है कि कैसे इसे आम आदमी की 'सर्वाइवल' की फितरत और राजनेताओं के ढीठपन से जोड़कर मीम संस्कृति के जरिए युवाओं को एक मानसिक राहत (Comedy Relief) दी गई है।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
23 मई 2026101 क्लिक
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युग-प्रवर्तक भारतपथिक राममोहन राय :- विद्युत पाल

साहित्य-संस्कृति

युग-प्रवर्तक भारतपथिक राममोहन राय :- विद्युत पाल

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने स्पष्टत: कहा कि राममोहन राय ने भारत में आधुनिक युग का उद्घाटन किया, आज के विश्वजनीन सहयोग के जमाने की मानवता में हमारी दीक्षा उन्होंने ही सम्पन्न किया।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
22 मई 2026182 क्लिक
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राममोहन राय - रवीन्द्रनाथ ठाकुर

साहित्य-संस्कृति

राममोहन राय - रवीन्द्रनाथ ठाकुर

राममोहन के युग में पूरी दुनिया में वे एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने आधुनिक युग के वास्तविक अर्थ को पूर्ण रूप से समझा था। वे जानते थे कि अलग-अलग संकीर्ण स्वतंत्रता मानव-साधना का उद्देश्य नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर सार्वभौमिक पारस्परिक निर्भरता और बंधुत्व में ही मानव-सभ्यता की सार्थकता है। अपने अगाध ज्ञान और सहज अंतर्दृष्टि के बल पर उन्होंने मानवता के इस आदर्श को समाज, साहित्य और धर्म के क्षेत्र में संचारित किया।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
22 मई 202664 क्लिक
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राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
22 मई 2026212 क्लिक
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" मेहनतकश लोगों के हित में विधानसभा के भीतर और बाहर संघर्ष जारी रहेगा "- मोहम्मद सलीम

राज्य

" मेहनतकश लोगों के हित में विधानसभा के भीतर और बाहर संघर्ष जारी रहेगा "- मोहम्मद सलीम

" 80 विधायक, 29 सांसद और पंचायत से लेकर नगर पालिका तक हर चीज पर कब्जा होने के बावजूद नवान्न से हटते ही तृणमूल-कांग्रेस पूरे राज्य में भागती फिर रही है। वह मोमबत्ती की तरह पिघलकर राजनीति के मैदान से गायब हो रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसने गुंडागर्दी और पुलिस के दम पर हर जगह सत्ता हथियाई थी, उसे जनता का प्यार नहीं मिला। राज्य में भाजपा जो नया संकट लेकर आई है, उसके खिलाफ भले ही एक सीट पर जीत मिली हो, लेकिन वामपंथी ही मताधिकार की रक्षा, बुलडोजर की आक्रामकता को रोकने और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा की माँगों को लेकर लड़ाई के मैदान में डटे रहेंगे। .."

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
22 मई 202651 क्लिक
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पिताजी (सलिल चौधरी) ने पद्मश्री ठुकरा दिया था   - अंतरा चौधरी

सिनेमा

पिताजी (सलिल चौधरी) ने पद्मश्री ठुकरा दिया था - अंतरा चौधरी

पिता जी एक मशहूर संगीतकार हैं, यह समझने में मुझे वक्त लगा था। क्योंकि घर पर तो वह एक अलग ही इंसान थे। सिनेमाघरों में 'रजनीगंधा' या 'छोटी सी बात' जैसी फिल्में देखने जाने पर जब संगीत निर्देशक के रूप में परदे पर पिता जी का नाम उभरता, तब देखकर समझ आता कि मेरे पिता जी एक मशहूर व्यक्ति हैं। घर पर मेहमानों का आना-जाना देखकर भी मैं यह समझ पाती थी। घर पर रिहर्सल या महफिल में मन्ना काका (मन्ना डे), आशा दी (आशा भोंसले) आते थे। स्टूडियो जाकर देखा कि 'आज नय गुनगुन' की रिकॉर्डिंग में लता दी (लता मंगेशकर) आई हुई हैं। तब मुझे अहसास हुआ कि पिता जी कोई बड़ी हस्ती हैं।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
21 मई 2026115 क्लिक
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एकजुट प्रतिरोध के आगे झुका रेलवे, बेदखली अभियान स्थगित

राज्य

एकजुट प्रतिरोध के आगे झुका रेलवे, बेदखली अभियान स्थगित

" हॉकर्स के इस उत्पीड़न के लिए पूर्व रेल मंत्री ममता बनर्जी जिम्मेदार हैं। जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब उन्होंने हॉकरों के लाइसेंस के मुद्दे को चर्चा में रखा था। लेकिन बाद में जब ममता बनर्जी रेल मंत्री बनीं, तो उन्होंने हॉकरों को लाइसेंस देने के मुद्दे को कोई महत्व नहीं दिया। "
श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
21 मई 202672 क्लिक
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अंधाधुंध हॉकर उन्मूलन नहीं, पुनर्वास चाहिए.!.

ब्लॉग

अंधाधुंध हॉकर उन्मूलन नहीं, पुनर्वास चाहिए.!.

साल 2014 का Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act देश के स्ट्रीट वेंडरों की आजीविका के अधिकार को मान्यता देता है। लेकिन रेल हॉकर अभी भी इस सुरक्षा से बाहर हैं। जबकि भारतीय रेलवे के साथ उनका रिश्ता कई दशकों पुराना है। ट्रेन यात्रा की संस्कृति के साथ झालमूड़ी , चनाचूर, चाय, मूंगफली, किताबें या खिलौने बेचने वाले रचे-बसे हुए हैं। वे सिर्फ सामान नहीं बेचते; वे रेल यात्रा की एक जीवंत सामाजिक वास्तविकता हैं।

इसलिए रेल हॉकरों की मांग पूरी तरह जायज है—लाइसेंस देकर पेशे को मान्यता दी जाए, पुनर्वास के बिना कोई उन्मूलन न हो, उन्हें Street Vendors Act के दायरे में लाया जाए, सामाजिक सुरक्षा, ईएसआई (ESI) और भविष्य निधि (प्रॉविडेंट फंड) में शामिल किया जाए, विकास के नाम पर आजीविका नष्ट न की जाए।

इस लड़ाई में 'पश्चिम बंगाल रेलवे हॉक्टर्स यूनियन' (CITU) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लंबे समय से यह संगठन रेल हॉकरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। राजनीतिक आतंक, प्रशासनिक उत्पीड़न, जबरन यूनियन पर कब्जा—इन सबके खिलाफ उन्होंने रेल हॉकरों को एकजुट करने का प्रयास किया है। अलग-अलग समय पर तृणमूल समर्थक यूनियनों के हमलों, धमकियों और यहां तक कि सदस्यों को जबरन दल-बदल कराने की कोशिशों के खिलाफ भी उन्होंने कड़ा प्रतिरोध खड़ा किया है।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
20 मई 2026156 क्लिक
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वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य

अंतर्राष्ट्रीय

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य

यह आलेख वियतनाम के गौरवशाली मुक्ति संघर्ष, वहाँ समाजवाद की स्थापना और इस क्रांति में हो ची मिन्ह के अप्रतिम योगदान की एक ऐतिहासिक समीक्षा है, जिसे बुद्धदेव भट्टाचार्य (6 नवंबर 2000 से 13 मई 2011 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे ) ने लिखा था। कल 19 मई को हो ची मिन्ह के जन्मदिन के अवसर पर उन्हें याद करते हुए इसे पुनः प्रकाशित किया जा रहा है। वियतनाम एक छोटा और कृषि-प्रधान देश होने के बावजूद सदियों तक फ्रांसीसी, जापानी और अमेरिकी साम्राज्यवाद के क्रूर शोषण और हमलों का शिकार रहा, लेकिन वहाँ की स्वतंत्रता प्रेमी जनता ने अपनी विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। कॉमरेड हो ची मिन्ह और वियतनाम वर्कर्स पार्टी के कुशल नेतृत्व में, क्रांतिकारियों ने बिना किसी अंधानुकरण के अपने देश की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार मार्क्सवाद-लेनिनवाद के सिद्धांतों को लागू किया। इस क्रांति की अभूतपूर्व सफलता का मुख्य स्रोत समाज के सभी वर्गों (मजदूरों, किसानों, बुद्धिजीवियों और अल्पसंख्यकों) की फौलादी एकजुटता, 'जनयुद्ध' (पीपल्स वॉर) की गुरिल्ला रणनीति और वैश्विक स्तर पर मिला भारी जनसमर्थन था। आलेख यह महत्वपूर्ण सीख भी देता है कि क्रांति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए कट्टरपंथ और विशेष रूप से संशोधनवाद के खतरों से मुक्त रहना अनिवार्य है। अंततः 30 अप्रैल 1975 को पूर्ण स्वतंत्रता हासिल कर वियतनाम ने दुनिया के सामने साबित कर दिया कि अदम्य इच्छाशक्ति और सही वैचारिक दिशा के बल पर दुनिया की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी ताकत को भी झुकाया जा सकता है, और यही कारण है कि वियतनाम का यह संघर्ष आज भी दुनिया भर के मुक्ति आंदोलनों के लिए प्रेरणापुँज है।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
20 मई 202680 क्लिक
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हम मानिक बंद्योपाध्याय को क्यों पढ़ें? - मालिनी भट्टाचार्य

राज्य

हम मानिक बंद्योपाध्याय को क्यों पढ़ें? - मालिनी भट्टाचार्य

" विशेष रूप से 1920 के दशक से न केवल हमारे देश में, बल्कि पूरी दुनिया में समय बहुत उथल-पुथल भरा और तेज़ी से बदलने वाला था। उस समय भारत का स्वतंत्रता आंदोलन विभिन्न स्तरों के अनगिनत लोगों को समेटकर एक विशाल जन-आंदोलन का रूप ले रहा था। इंसानों को दो-दो विश्व युद्धों का गवाह बनना पड़ा था। सोवियत रूस के उदय ने उस पीढ़ी को चमत्कृत कर दिया था। इसके साथ ही, इस देश में अकाल , दंगे, देश का विभाजन और आज़ादी के बाद के शुरुआती कुछ वर्षों के भारी मंथन से विष और अमृत दोनों ही निकले, जो समाज के सभी अलग-अलग स्तरों के लोगों की जीवनशैली और सोच को बदल सकते थे। बांग्ला भाषा के साहित्यकारों के बीच यथार्थवादी शैली को लेकर तरह-तरह के प्रयोग इसी दौर में प्रासंगिक हुए। एक रचनात्मक लेखक के रूप में मानिक का आत्म-विकास भी इसी समय के दौरान हुआ।"

केशव कुमार भट्टर
20 मई 202643 क्लिक
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विश्लेषण

'इंकलाब जिंदाबाद' कहना अपराध.?. पढ़ें इस खबर का निहितार्थ और विश्लेषण

मानेसर/गुड़गांव का यह श्रमिक आंदोलन और कोर्ट का फैसला यह साबित करता है कि श्रमिक वर्ग का शोषण और दमन ही पूंजीवाद का असली चरित्र है। सीआईटीयू का यह संकल्प कि "दमन से आंदोलन खत्म नहीं होगा", वामपंथ के इस विश्वास को दोहराता है कि पूंजीपतियों और राज्य के दमनकारी चक्रव्यूह को केवल मजदूरों की वर्गीय एकजुटता, निरंतर संघर्ष और क्रांतिकारी चेतना के बल पर ही तोड़ा जा सकता है।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
20 मई 202646 क्लिक
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राष्ट्रीय

'इंकलाब जिंदाबाद' कहना अपराध.?. प्रशासन को आनी चाहिए शर्म.!.पुलिस को अदालत की फटकार.!.2 CITU नेताओं को दी जमानत

मानेसर (हरियाणा) में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे श्रमिक नेताओं (अजीत कुमार और अंकित) को अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की न्यायाधीश गगन गीत कौर ने हरियाणा पुलिस द्वारा लगाए गए 'देशविरोधी साजिश' और 'हत्या के प्रयास' जैसे गंभीर आरोपों को खारिज कर दिया। अदालत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि पुलिस आरोपियों को हिरासत में रखने का कोई ठोस सबूत नहीं दे सकी। साथ ही, प्रसिद्ध वकील वृंदा ग्रोवर ने भी अदालत में पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के नियमों (जैसे कारण न बताना और परिवार को सूचित न करना) के उल्लंघन की बात उठाई। सीआईटीयू (CITU) ने इस फैसले का स्वागत करते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस कॉर्पोरेट घरानों के इशारे पर मजदूरों के लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रही है।
केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
20 मई 202693 क्लिक
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राज्य

राज्य में ओबीसी आरक्षण फिर से 7%

8 फरवरी 2010 को राइटर्स बिल्डिंग से ओबीसी आरक्षण को 7 से बढ़ाकर 17 प्रतिशत करने के फैसले की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने की थी। पिछड़े मुसलमानों के विभिन्न समूहों को ओबीसी सूची में शामिल करने का नीतिगत फैसला लेते हुए उस दिन बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा था, "धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि मुसलमानों में जो लोग आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं, वही इस आरक्षण के दायरे में आएँगे। समाज के क्रीमी लेयर यानी अमीरों के लिए यह आरक्षण नहीं है।"

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
19 मई 2026171 क्लिक
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राष्ट्रीय

संसदीय इतिहास का वो 'मौन' अध्याय: जब मोहम्मद सलीम की चुनौती पर लोकसभा में दो मिनट का सन्नाटा छा गया था

प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा: पश्चिम बंगाल माकपा के सचिव और पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम ने मुजफ्फर अहमद भवन (राज्य सचिवालय) में एक सवाल के जवाब में संसद का एक बेहद दिलचस्प ऐतिहासिक संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके स्कूली दिनों में बिना किसी राजनीतिक विवाद के 'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' सहित कई देशभक्ति गीत गाए जाते थे, जिससे बच्चों में सच्चे मूल्यबोध का निर्माण होता था। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम के पहले दो पदों को लेकर हुए विवाद पर 80 के दशक में वामपंथी नेता सरोज मुखर्जी ने एक ऐतिहासिक बुकलेट लिखी थी, जो मुजफ्फर अहमद भवन की लाइब्रेरी में आज भी सुरक्षित है। उन्होंने वर्तमान के उन नेताओं पर निशाना साधा जो साधारण बांग्ला का शपथ-पत्र भी अटक-अटक कर पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग वंदे मातरम के कठिन संस्कृतनिष्ठ शब्दों को देख कर भी नहीं पढ़ सकते। 2000 के दशक में जब भाजपा ने वंदे मातरम पर राजनीति शुरू की, तो सांसद रहते हुए मोहम्मद सलीम ने लोकसभा में चुनौती दी थी कि भाजपा का कोई एक सदस्य इसे गाकर सुना दे तो वे इस्तीफा दे देंगे। नतीजा यह हुआ कि पूरी संसद में दो मिनट तक सन्नाटा पसर गया था और कोई भाजपा सदस्य खड़ा नहीं हुआ, जिसे अगले दिन 'टाइम्स ऑफ इंडिया' ने प्रमुखता से छापा था।
केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
19 मई 202694 क्लिक
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जनसंघर्ष

मनरेगा को बचाने के लिए राष्ट्रव्यापी हड़ताल सफल - पढ़ें डॉ. विक्रम सिंह की रिपोर्ट

  • देशव्यापी आंदोलन: 15 मई 2026 को पूरे भारत के गाँवों में लाखों मनरेगा और खेत-मजदूरों ने मिलकर सरकार के नए 'वीबी-ग्राम (जी)' कानून के खिलाफ एक बड़ी और सफल हड़ताल की।
  • मुख्य मांगें: आंदोलनकारी मजदूरों की मांग है कि नया कानून तुरंत रद्द हो, साल में कम से कम 200 दिन का काम मिले, रोजाना 700 रुपये मजदूरी तय हो और ऑनलाइन हाजिरी का झंझट पूरी तरह बंद किया जाए।
  • रोजगार पर खतरा: मजदूरों का मानना है कि इस नए कानून से गाँवों में रोजगार की गारंटी पूरी तरह खत्म हो जाएगी और पिछले तीन महीनों से पहले ही काम ठप पड़ा है।
  • बजट का नया पेंच: केंद्र सरकार ने बिना राज्यों से पूछे योजना का 40% वित्तीय बोझ राज्यों पर डाल दिया है, जिससे बजट की कमी के कारण राज्य सरकारें अब मजदूरों को काम देने से कतराएंगी।
  • बदहाल आंकड़े: 'लिबटेक इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल देश भर में मनरेगा के तहत काम पाने वाले परिवार, मजदूर और कुल काम के दिन भारी मात्रा में घटे हैं।
  • जानलेवा तकनीक: हाजिरी के लिए 'चेहरा पहचानने' और मोबाइल ऐप जैसी जबरन थोपी गई तकनीकों के कारण नेटवर्क न मिलने से आंध्र प्रदेश में पाँच महिला मजदूरों की सड़क हादसे में जान तक चली गई।
  • हर तरफ असर: दक्षिण भारत के राज्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे उत्तर भारत के इलाकों में भी मजदूरों ने भारी संख्या में जुटकर अपनी गजब की एकता दिखाई।
केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
18 मई 202643 क्लिक
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