वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
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आपातकाल के समय भी ऐसा दृश्य नहीं देखा - पवित्र सरकार॥कलामंदिर में अनुमति रद्द, खुले आसमान के नीचे होगा नागरिक कन्वेंशन॥'ज्ञानेश' हटाओ, 'एसआईआर' रोको ~ एम ए बेबी॥क्या अपनी ही जनता से भयभीत है हुकूमत ?॥दिल्‍ली प्रदर्शन 10 अक्टूबर : प्रदर्शन रोकने के लिए गृह सचिव ने की बैठक, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी भी नहीं दिया जा रहा।॥विरोध प्रदर्शन: दिल्ली में पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीपीआईएम॥'वाम वध' का फासीवादी उन्माद: एक बीमारी॥संघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगा॥आपातकाल के समय भी ऐसा दृश्य नहीं देखा - पवित्र सरकार॥कलामंदिर में अनुमति रद्द, खुले आसमान के नीचे होगा नागरिक कन्वेंशन॥'ज्ञानेश' हटाओ, 'एसआईआर' रोको ~ एम ए बेबी॥क्या अपनी ही जनता से भयभीत है हुकूमत ?॥दिल्‍ली प्रदर्शन 10 अक्टूबर : प्रदर्शन रोकने के लिए गृह सचिव ने की बैठक, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी भी नहीं दिया जा रहा।॥विरोध प्रदर्शन: दिल्ली में पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीपीआईएम॥'वाम वध' का फासीवादी उन्माद: एक बीमारी॥संघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगा॥
✊ इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊   ✊ इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊  
आपातकाल के समय भी ऐसा दृश्य नहीं देखा - पवित्र सरकार
राष्ट्रीय

आपातकाल के समय भी ऐसा दृश्य नहीं देखा - पवित्र सरकार

'सरकार डर गई है, वे डगमगा गए हैं। इसलिए वे फासीवादी तरीके से लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाना चाहते हैं। उन्होंने लोगों के आंदोलन पर फासीवादी शैली में हमला बोला है। सरकार चाहती तो चर्चा के लिए बैठ सकती थी, बात कर सकती थी। कुछ माँगों को स्वीकार भी किया जा सकता था। लेकिन सरकार उस रास्ते पर नहीं गई। असल में उन्हें अपनी कुर्सी की चिंता है, इसलिए यह आक्रामकता है। पहले से ही ट्रेनें रद्द कर दी गईं, मेट्रो बंद कर दी गई, उड़ानों (एयरपोर्ट) से लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। मैंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा, आपातकाल के समय भी नहीं देखा।'

अपराजिता · कल · 5 मिनट पाठ
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कलामंदिर में अनुमति रद्द, खुले आसमान के नीचे होगा  नागरिक कन्वेंशन
राज्य

कलामंदिर में अनुमति रद्द, खुले आसमान के नीचे होगा नागरिक कन्वेंशन

किसी कार्यक्रम में सरकार विरोधी भावना हो सकती है, इस आशंका से पहले से दी गई अनुमति को रद्द करना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रवृत्ति में फासीवादी मानसिकता झलकता है।

अपराजिता · 2 दिन पहले · 4 मिनट पाठ
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7
'ज्ञानेश' हटाओ, 'एसआईआर' रोको ~ एम ए बेबी
राष्ट्रीय

'ज्ञानेश' हटाओ, 'एसआईआर' रोको ~ एम ए बेबी

"वोट के अधिकार पर हमला बंद करो, लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बहाल करो!" मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालों और मतदाता सूचियों से नाम छांटने की मनमानी के बीच देश में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। 'इंडियन एक्सप्रेस' के सनसनीखेज खुलासे के बाद सीपीआई (एम) ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग को लेकर देशव्यापी जन-आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

केशव कुमार भट्टड़ · 2 दिन पहले · 6 मिनट पाठ
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क्या अपनी ही जनता से भयभीत है हुकूमत ?
विश्लेषण

क्या अपनी ही जनता से भयभीत है हुकूमत ?

10 अक्टूबर की सुबह सड़कों का मंजर लोकतंत्र की नहीं, बल्कि एक सीलबंद सैन्य क्षेत्र की गवाही दे रहा था। जब एक सरकार अपने ही नागरिकों को रोकने और घेरने के लिए इतने व्यापक स्तर पर युद्ध जैसी तैयारियाँ करती है, तो स्वयं से यह सवाल पूछना ही होगा - आखिर सरकार किस चीज को दबाने और रोकने की कोशिश कर रही है?

केशव कुमार भट्टड़ · 2 दिन पहले · 5 मिनट पाठ
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दिल्‍ली प्रदर्शन 10 अक्टूबर : प्रदर्शन रोकने के लिए गृह सचिव ने की बैठक, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी भी नहीं दिया जा रहा।
राष्ट्रीय

दिल्‍ली प्रदर्शन 10 अक्टूबर : प्रदर्शन रोकने के लिए गृह सचिव ने की बैठक, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी भी नहीं दिया जा रहा।

SFI की नेत्री आइशी घोष ने एक वीडियो संदेश में बताया है कि उन्हें मुंडका पुलिस थाने में रखा गया है। उन्हें काफी समय से पीने का पानी नहीं दिया गया है। धरपकड़ के कारण सभी लोग घायल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह सोचकर गलतफहमी में है कि पानी या खाना न देकर और लोगों को कैद करके वह इस विरोध को दबा सकती है।

अपराजिता · 3 दिन पहले · 3 मिनट पाठ
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विरोध प्रदर्शन: दिल्ली में पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीपीआईएमराष्ट्रीयविरोध प्रदर्शन: दिल्ली में पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीपीआईएमलोकतंत्र में जनता का अधिकार नहीं दबेगा! दिल्ली में 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से पहले ट्रेनों के रद्द होने, मेट्रो स्टेशनों के बंद होने और इंटरनेट पर पाबंदियों के खिलाफ सीपीआई(एम) के महासचिव एम. ए. बेबी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने प्रशासन के इस रवैये पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हनन बताया। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि नागरिकों के संगठित होने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार मौलिक है। अब कोर्ट ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए आयोजकों से अतिरिक्त जानकारी मांगी है।केशव कुमार भट्टड़ · 3 दिन पहले · 65 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →'वाम वध' का फासीवादी उन्माद: एक बीमारीविश्लेषण'वाम वध' का फासीवादी उन्माद: एक बीमारीकेशव कुमार भट्टड़ · 3 दिन पहले · 66 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →संघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगाराज्यसंघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगाअपराजिता · 5 दिन पहले · 4 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →तृणमूल-कांग्रेस नहीं कर सकी, भाजपा भी नहीं कर पाएगी: लालगढ़ में मीनाक्षी की चेतावनीराज्यतृणमूल-कांग्रेस नहीं कर सकी, भाजपा भी नहीं कर पाएगी: लालगढ़ में मीनाक्षी की चेतावनीअपराजिता · 6 दिन पहले · 19 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →वकीलों पर हमले के विरोध में हाईकोर्ट में जुलूसराज्यवकीलों पर हमले के विरोध में हाईकोर्ट में जुलूसअपराजिता · 06 अक्टूबर 2026 · 12 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →
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दिल्ली सीमा · नवंबर 2024 से
न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग जारी।
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मनरेगा मज़दूर मोर्चा
झारखंड · मार्च 2026 से
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लंबित नियुक्तियों पर अदालती फैसले के बाद आंशिक जीत।
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आपातकाल के समय भी ऐसा दृश्य नहीं देखा - पवित्र सरकार

'सरकार डर गई है, वे डगमगा गए हैं। इसलिए वे फासीवादी तरीके से लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाना चाहते हैं। उन्होंने लोगों के आंदोलन पर फासीवादी शैली में हमला बोला है। सरकार चाहती तो चर्चा के लिए बैठ सकती थी, बात कर सकती थी। कुछ माँगों को स्वीकार भी किया जा सकता था। लेकिन सरकार उस रास्ते पर नहीं गई। असल में उन्हें अपनी कुर्सी की चिंता है, इसलिए यह आक्रामकता है। पहले से ही ट्रेनें रद्द कर दी गईं, मेट्रो बंद कर दी गई, उड़ानों (एयरपोर्ट) से लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। मैंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा, आपातकाल के समय भी नहीं देखा।'

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कलामंदिर में अनुमति रद्द, खुले आसमान के नीचे होगा नागरिक कन्वेंशन

2 दिन पहले · 4 मिनट पाठ
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'ज्ञानेश' हटाओ, 'एसआईआर' रोको ~ एम ए बेबी

2 दिन पहले · 6 मिनट पाठ
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क्या अपनी ही जनता से भयभीत है हुकूमत ?

2 दिन पहले · 5 मिनट पाठ
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किसी कार्यक्रम में सरकार विरोधी भावना हो सकती है, इस आशंका से पहले से दी गई अनुमति को रद्द करना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रवृत्ति में फासीवादी मानसिकता झलकता है।

अपराजिता · 4 मिनट · 7 पाठक · 2 दिन पहले
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केशव कुमार भट्टड़ · 6 मिनट · 71 पाठक · 2 दिन पहले
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क्या अपनी ही जनता से भयभीत है हुकूमत ?
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क्या अपनी ही जनता से भयभीत है हुकूमत ?

10 अक्टूबर की सुबह सड़कों का मंजर लोकतंत्र की नहीं, बल्कि एक सीलबंद सैन्य क्षेत्र की गवाही दे रहा था। जब एक सरकार अपने ही नागरिकों को रोकने और घेरने के लिए इतने व्यापक स्तर पर युद्ध जैसी तैयारियाँ करती है, तो स्वयं से यह सवाल पूछना ही होगा - आखिर सरकार किस चीज को दबाने और रोकने की कोशिश कर रही है?

केशव कुमार भट्टड़ · 5 मिनट · 72 पाठक · 2 दिन पहले
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दिल्‍ली प्रदर्शन 10 अक्टूबर : प्रदर्शन रोकने के लिए गृह सचिव ने की बैठक, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी भी नहीं दिया जा रहा।
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दिल्‍ली प्रदर्शन 10 अक्टूबर : प्रदर्शन रोकने के लिए गृह सचिव ने की बैठक, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी भी नहीं दिया जा रहा।

SFI की नेत्री आइशी घोष ने एक वीडियो संदेश में बताया है कि उन्हें मुंडका पुलिस थाने में रखा गया है। उन्हें काफी समय से पीने का पानी नहीं दिया गया है। धरपकड़ के कारण सभी लोग घायल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह सोचकर गलतफहमी में है कि पानी या खाना न देकर और लोगों को कैद करके वह इस विरोध को दबा सकती है।

अपराजिता · 3 मिनट · 23 पाठक · 3 दिन पहले
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'सरकार डर गई है, वे डगमगा गए हैं। इसलिए वे फासीवादी तरीके से लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाना चाहते हैं। उन्होंने लोगों के आंदोलन पर फासीवादी शैली में हमला बोला है। सरकार चाहती तो चर्चा के लिए बैठ सकती थी, बात कर सकती थी। कुछ माँगों को स्वीकार भी किया जा सकता था। लेकिन सरकार उस रास्ते पर नहीं गई। असल में उन्हें अपनी कुर्सी की चिंता है, इसलिए यह आक्रामकता है। पहले से ही ट्रेनें रद्द कर दी गईं, मेट्रो बंद कर दी गई, उड़ानों (एयरपोर्ट) से लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। मैंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा, आपातकाल के समय भी नहीं देखा।'

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किसी कार्यक्रम में सरकार विरोधी भावना हो सकती है, इस आशंका से पहले से दी गई अनुमति को रद्द करना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रवृत्ति में फासीवादी मानसिकता झलकता है।

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• 2 दिन पहले • 7 क्लिक
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केशव कुमार भट्टड़
• 2 दिन पहले • 71 क्लिक
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क्या अपनी ही जनता से भयभीत है हुकूमत ?

10 अक्टूबर की सुबह सड़कों का मंजर लोकतंत्र की नहीं, बल्कि एक सीलबंद सैन्य क्षेत्र की गवाही दे रहा था। जब एक सरकार अपने ही नागरिकों को रोकने और घेरने के लिए इतने व्यापक स्तर पर युद्ध जैसी तैयारियाँ करती है, तो स्वयं से यह सवाल पूछना ही होगा - आखिर सरकार किस चीज को दबाने और रोकने की कोशिश कर रही है?

केशव कुमार भट्टड़
• 2 दिन पहले • 72 क्लिक
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दिल्‍ली प्रदर्शन 10 अक्टूबर : प्रदर्शन रोकने के लिए गृह सचिव ने की बैठक, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी भी नहीं दिया जा रहा।

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SFI की नेत्री आइशी घोष ने एक वीडियो संदेश में बताया है कि उन्हें मुंडका पुलिस थाने में रखा गया है। उन्हें काफी समय से पीने का पानी नहीं दिया गया है। धरपकड़ के कारण सभी लोग घायल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह सोचकर गलतफहमी में है कि पानी या खाना न देकर और लोगों को कैद करके वह इस विरोध को दबा सकती है।

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• 3 दिन पहले • 23 क्लिक
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विरोध प्रदर्शन: दिल्ली में पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीपीआईएम

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विरोध प्रदर्शन: दिल्ली में पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीपीआईएम

लोकतंत्र में जनता का अधिकार नहीं दबेगा! दिल्ली में 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से पहले ट्रेनों के रद्द होने, मेट्रो स्टेशनों के बंद होने और इंटरनेट पर पाबंदियों के खिलाफ सीपीआई(एम) के महासचिव एम. ए. बेबी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने प्रशासन के इस रवैये पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हनन बताया। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि नागरिकों के संगठित होने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार मौलिक है। अब कोर्ट ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए आयोजकों से अतिरिक्त जानकारी मांगी है।

केशव कुमार भट्टड़
• 3 दिन पहले • 65 क्लिक
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'वाम वध' का फासीवादी उन्माद: एक बीमारी

विश्लेषण

'वाम वध' का फासीवादी उन्माद: एक बीमारी

"विचारधाराओं का 'वध' नहीं होता; तानाशाह मिट जाते हैं, लाल झंडा लहराता रहता है!"कोलकाता में सीपीआई (एम) राज्य दफ़्तर के बाहर मुख्य सड़क पर टंगे 'वाम वध' और उसके जवाब में 'हिटलर' के संदर्भ वाले पोस्टर केवल चुनावी प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि नव-फासीवादी आक्रामकता और वैचारिक प्रतिरोध के सबसे बड़े द्वंद्व को दर्शाते हैं। लोकतंत्र में विरोधी को 'दानव' मानकर उसका समूल नाश करने की भाषा एक राजनीतिक-सांस्कृतिक बीमारी का लक्षण है। इतिहास गवाह है कि तानाशाही फरमानों से जन-आंदोलनों और प्रगतिशील चेतना को मिटाया नहीं जा सकता। संघी-भाजपा के इस नफ़रती आख्यान का स्थायी इलाज केवल वर्ग-एकजुटता, सांस्कृतिक चेतना और व्यापक जन-आंदोलन ही हैं।

केशव कुमार भट्टड़
• 3 दिन पहले • 66 क्लिक
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संघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगा

राज्य

संघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगा

राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर हमलों के साथ-साथ देश के कॉलेज-विश्वविद्यालयों में एबीवीपी के कब्जे और परिसरों में हिंदुत्ववादी राजनीति का विस्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कब्जे के खिलाफ एसएफआई अपना संघर्ष जारी रखेगी।

अपराजिता
• 5 दिन पहले • 4 क्लिक
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तृणमूल-कांग्रेस नहीं कर सकी, भाजपा भी नहीं कर पाएगी: लालगढ़ में मीनाक्षी की चेतावनी

राज्य

तृणमूल-कांग्रेस नहीं कर सकी, भाजपा भी नहीं कर पाएगी: लालगढ़ में मीनाक्षी की चेतावनी

तृणमूल-कांग्रेस का गुंडाराज और माफियाराज वामपंथियों को दबा नहीं सका और भाजपा भी ऐसा नहीं कर पाएगी। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की बदहाल स्थिति को बदलने तथा अपने अर्जित अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी है।

मीनाक्षी मुखर्जी

सीपीआई (एम) की केंद्रीय कमेटी की सदस्य

अपराजिता
• 6 दिन पहले • 19 क्लिक
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वकीलों पर हमले के विरोध में हाईकोर्ट में जुलूस

राज्य

वकीलों पर हमले के विरोध में हाईकोर्ट में जुलूस

बदमाशों की गिरफ्तारी और कानून का शासन स्थापित करने की माँग को लेकर 'प्रगतिशील आइनजीवी मंच' द्वारा यह जुलूस निकाला गया। संगठन का आरोप है कि राज्य में राजनीतिक संघर्ष और हमले की घटनाओं में वकील भी शिकार हो रहे हैं।

अपराजिता
• 06 अक्टूबर 2026 • 12 क्लिक
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जादवपुर में उमड़ा छात्र सैलाब, फासीवाद के खिलाफ हुंकार

राष्ट्रीय

जादवपुर में उमड़ा छात्र सैलाब, फासीवाद के खिलाफ हुंकार

जो ना डरती है, ना बिकती है - उस जुझारू कौम का नाम वामपंथ है! कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में वामपंथी छात्र संगठनों के संयुक्त सम्मेलन में छात्रों और युवाओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। एबीवीपी की धमकियों और बाधाओं को दरकिनार कर आयोजित इस कन्वेंशन में आईसा (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, एसएफआई (SFI) के महासचिव सृजन भट्टाचार्य सहित प्रमुख छात्र नेताओं ने हिस्सा लिया। छात्र नेताओं ने केंद्र व राज्य सरकार की दमनकारी नीतियों, एसआईआर (SIR), शिक्षा के बाजारीकरण और शैक्षणिक संस्थानों पर हो रहे हमलों के खिलाफ एकजुट होकर प्रतिरोधी आंदोलन तेज करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वामपंथ की ऐतिहासिक विरासत कभी घुटने टेकना नहीं सीखती और लोकतंत्र व संविधान की रक्षा के लिए यह संघर्ष आखिरी सांस तक जारी रहेगा।

केशव कुमार भट्टड़
• 06 अक्टूबर 2026 • 63 क्लिक
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हर दिन पता चल रहा है 'वोट चोरी' : दो आयुक्तों की आपत्ति के बावजूद उसी अधिकारी के पास आईटी फाइल!

राष्ट्रीय

हर दिन पता चल रहा है 'वोट चोरी' : दो आयुक्तों की आपत्ति के बावजूद उसी अधिकारी के पास आईटी फाइल!

'द हिंदू' की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि नया विकल्प शुरू होने से उस प्रक्रिया में बदलाव आया है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इससे पहले बताया था कि पोर्टल में आवश्यक लचीलापन (फ्लेक्सिबिलिटी) लाने के लिए इसे अपग्रेड किया गया है।

परिणामस्वरूप, एक तरफ आयोग की आईटी शाखा की फाइलों की निगरानी पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति, और दूसरी तरफ एसआईआर के दौरान मतदाता सूची प्रबंधन की तकनीकी व्यवस्था में बदलाव—इन दोनों घटनाओं ने चुनाव आयोग के प्रशासनिक ढांचे और निगरानी प्रणाली पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैंं।

अपराजिता
• 05 अक्टूबर 2026 • 9 क्लिक
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एम ए बेबी का क्रांतिकारी संदेश ~ स्वतंत्रता संग्राम के दूसरे चरण में युवाओं का आह्वान

राष्ट्रीय

एम ए बेबी का क्रांतिकारी संदेश ~ स्वतंत्रता संग्राम के दूसरे चरण में युवाओं का आह्वान

DYFI के नए केंद्रीय कार्यालय 'शहीद भगत सिंह भवन' के उद्घाटन पर सीपीआई(एम) के महासचिव एम ए बेबी ने देश के युवाओं से स्वतंत्रता संग्राम के दूसरे चरण को गति देने का ऐतिहासिक आह्वान किया..। उन्होंने कहा कि देशभर में स्वतंत्रता संग्राम का दूसरा दौर शुरू हो चुका है और इस ऐतिहासिक आंदोलन के केंद्र में देश की युवा शक्ति खड़ी है!

उद्घाटन भाषण में एम ए बेबी ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गाँधी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह के अमूल्य योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके दिखाए क्रांतिकारी रास्ते पर चलते हुए ही आज की युवा पीढ़ी देश के लोकतंत्र और संविधान को बचाने के इस विशाल आंदोलन को आगे बढ़ाएगी। यह आंदोलन देश में बेरोजगारी, शिक्षा की बदहाली, लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ युवाओं के लिए सम्मानजनक मजदूरी की मांगों को लेकर केंद्रित है। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-युवाओं पर दिल्ली पुलिस के दमन की कड़े शब्दों में निंदा की और आंदोलनकारियों के वीरतापूर्ण प्रतिरोध को सलाम किया। इस अवसर पर हन्नान मोल्ला, वृंदा करात, बी वेंकट, कनीनिका घोष बोस, ए ए रहीम और हिमघ्नराज भट्टाचार्य सहित वामपंथी और जनवादी संगठनों के कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे।

केशव कुमार भट्टड़
• 04 अक्टूबर 2026 • 102 क्लिक
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प्रगतिशील संस्कृति ही फासीवाद के ख़िलाफ़ ढाल ~ मोहम्मद सलीम

राज्य

प्रगतिशील संस्कृति ही फासीवाद के ख़िलाफ़ ढाल ~ मोहम्मद सलीम

"जब कला और सिनेमा से सौहार्द को मिटाया जाएगा, तब प्रगतिशील संस्कृति ही फासीवाद के ख़िलाफ़ ढाल बनेगी।"

"संवैधानिक सिद्धांतों और वैचारिक संवाद के माध्यम से ही समावेशी संस्कृति को समृद्ध बनाया जा सकता है।"- सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम

सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने बहरमपुर में 'मार्क्सवादी पथ' के तत्वावधान में आयोजित तीसरा 'काजी नजरुल इस्लाम स्मारक व्याख्यान' में वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी बात रखते हुए केंद्र सरकार और संघ परिवार की सांप्रदायिक राजनीति पर सीधी चोट की । उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद से मुंबई फिल्म इंडस्ट्री पर धर्मनिरपेक्षता और बहुलतावादी ताने-बाने को मिटाने का दबाव बनाया जा रहा है। सत्ता कायम रखने के लिए आज सिनेमा, कला और साहित्य को हथियार बनाया जा रहा है तथा प्रगतिशील विचारकों को 'दिमागी नक्सल' कहकर डराने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इप्टा (IPTA) और वामपंथी सांस्कृतिक आंदोलनों की ऐतिहासिक भूमिका का ज़िक्र करते हुए जनपक्षधर संस्कृति के ज़रिए इस नफ़रती राजनीति का डटकर मुकाबला करने का आह्वान किया।

केशव कुमार भट्टड़
• 01 अक्टूबर 2026 • 106 क्लिक
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हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत

राष्ट्रीय

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत

सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है।

अपराजिता
• 30 सितंबर 2026 • 15 क्लिक
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भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न

राष्ट्रीय

भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न

"न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए - क्या हमारा लोकतंत्र इस कसौटी पर खरा उतर रहा है?" यह आलेख भारतीय न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग जैसी शीर्ष संवैधानिक संस्थाओं में गहराते 'हितों के टकराव'और संस्थागत पतन पर गंभीर चिंता व्यक्त करता है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा द्वारा चुनाव आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करना - जबकि उनके पुत्र आयोग के स्थायी वकील हैं - न्यायिक शुचिता और रोस्टर नियमों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त की आईएएस बेटी को हाईकोर्ट के दंडात्मक आदेश से सुप्रीम कोर्ट द्वारा त्वरित राहत मिलना और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका का अनिश्चितकाल के लिए टल जाना व्यवस्थागत पक्षपात की ओर इशारा करता है। पूरा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि कार्यपालिका (सरकार) के बढ़ते प्रभाव और प्रक्रियागत कमियों के सहारे देश में 'नियंत्रित लोकतंत्र' की जड़ें मजबूत की जा रही हैं। संवैधानिक संतुलन का तराजू सत्ता हित की तरफ झुका जा रहा है। संवैधानिक लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। खतरे की घंटी बज चुकी है।

केशव कुमार भट्टड़
• 29 सितंबर 2026 • 115 क्लिक
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शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक

श्रद्धांजलि

शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक

28 सितंबर 2026 - शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती है। उनका प्रसिद्ध नारा ‘इंकलाब जिंदाबाद’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध आदमी होने की असली तमीज़ और चेतना का महाकाव्य है। यह वर्ष 'नौजवान भारत सभा' का शताब्दी वर्ष और 'शहीद यादगार समिति' का रजत जयंती वर्ष भी है। भगत सिंह की क्रांतिकारी आवाज़ केवल शोर नहीं थी, बल्कि उसके पीछे गहरा अध्ययन, सामाजिक न्याय और विश्व के महान विचारकों का वैचारिक आधार था। साम्राज्यवादी ब्रिटिश हुकूमत ने डरकर 23 मार्च 1931 को उन्हें फाँसी दे दी, लेकिन उनके विचार आज भी अमर हैं। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ बाज़ारवाद, शोषण और अन्याय के खिलाफ आम आदमी की चेतना और बदलाव के लिए संघर्ष का प्रतीक है। आज के अवसरवादी राजनीतिक दौर में भगत सिंह के विचार एक न्यायपूर्ण भविष्य गढ़ने की प्रेरणा देते हैं और मशाल बनकर राह दिखाते हैं।

केशव कुमार भट्टड़
• 27 सितंबर 2026 • 137 क्लिक
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चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु

राष्ट्रीय

चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु

वोटर लिस्ट में शुद्धि के नाम पर करोड़ों नागरिकों के मताधिकार पर डाका- यह लोकतंत्र का सुधार नहीं, उसका संहार है! विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में अन्य आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसलों ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी सॉफ्टवेयर, आईटी विभाग के केंद्रीकरण और 'फॉर्म 7' के थोक दुरुपयोग के जरिए करोड़ों पात्र व अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से बाहर करने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। अपीलों की जांच में 91% मामलों में नाम बहाल होना आयोग की मनमानी और न्यायिक ट्रिब्यूनल व सुप्रीम कोर्ट की नाकामी को उजागर करता है। यदि निष्पक्षता और जिम्मेदार अधिकारियों की बर्खास्तगी की मांग नहीं उठाई गई, तो देश के चुनावी लोकतंत्र का भविष्य बेहद अंधकारमय है।

केशव कुमार भट्टड़
• 27 सितंबर 2026 • 58 क्लिक
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सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन)  प्रकाशित की गयी ।

राज्य

सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।

भाषा, जाति, धर्म और खान-पान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति चल रही है।

अपराजिता
• 27 सितंबर 2026 • 8 क्लिक
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देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम

राज्य

देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम

"यह जो चुनाव हुआ, उसमें तरह-तरह की गड़बड़ियां करके और वोटर लिस्ट को ताक पर रखकर वोट कराए गए। एक शब्द में कहें तो कानून का पालन किए बिना काम हुआ है, नियम-कानून जैसा कुछ नहीं छोड़ा गया। हमने शुरुआत से ही संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात की है। असल बात यह है कि भ्रष्ट तृणमूल-कांग्रेस बीजेपी के साथ मिल गई है। शुभेंदु अधिकारी ने एक समय तृणमूल-कांग्रेस का झंडा लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए और पुलिस व असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल करके पंचायत पर कब्जा किया था—यह बात लोग खुद कह रहे हैं। वही शुभेंदु अधिकारी अब बीजेपी में जाकर राज्य सरकार में आ गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कई लोगों ने सोचा था कि शायद अब भ्रष्टाचार बंद होगा। हमने तभी कहा था कि इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है। वही बात अब साबित हो चुकी है। तृणमूल-कांग्रेस खुलेआम बीजेपी में चली गई है। तो फिर क्या इस पार्टी से विकास की उम्मीद की जा सकती है? शुभेंदु अधिकारी और शमीक भट्टाचार्य हर दिन अपनी बात बदलते हैं। बीजेपी अपने फायदे के लिए आरएसएस के जरिए हुमायूं कबीर जैसे नेताओं को तैयार करती है। यही उनकी नीति है।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

अपराजिता
• 25 सितंबर 2026 • 12 क्लिक
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लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलान

राष्ट्रीय

लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलान

सीपीआई(एम) के महासचिव एम. ए. बेबी , भाकपा के महासचिव डी. राजा और भाकपा-माले लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आज संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। वामपंथी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सप्ताह भर के देशव्यापी विरोध का ऐलान किया है। इसमें 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया के नाम पर करोड़ों नागरिकों के मताधिकार छीनने का आरोप लगाया गया है। वाम दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे/महाभियोग और SIR प्रक्रिया पर तुरंत रोक की मांग की है। इस आंदोलन में शहीद भगत सिंह जयंती (28 सितंबर) और गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर विशाल जन-विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। वामपंथी नेताओं ने सभी धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों, सिविल सोसाइटी और जन-बुद्धिजीवियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।

केशव कुमार भट्टड़
• 24 सितंबर 2026 • 72 क्लिक
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'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'

विश्लेषण

'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'

क्या चुनाव आयोग को अदृश्य शक्तिशाली हाथ नियंत्रित कर रहे हैं ? नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल और भीतर से उठता असंतोष - केन्द्रीय चुनाव आयोग पर यह दोहरा खुलासा - साबित करता है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्था अब संविधान, नैतिकता और परंपरा की कसौटी पर पूरी तरह संदिग्ध बन चुकी है। 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने विभाजित फैसला सुनाया है, जिसके बाद मामला प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को भेज दिया गया है। पीठ के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश को हटाकर केंद्रीय मंत्री को शामिल करने पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता प्रभावित होती है। अंतिम निर्णय के लिए सुप्रीम कोर्ट में जारी देरी को जजों ने खुद "संस्थागत शर्मिंदगी" करार दिया है। दूसरी ओर, 'द इंडियन एक्सप्रेस' के खुलासे के अनुसार, आयोग के दो चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी - ने पिछले 10 महीनों में 14 बार प्रक्रियागत उल्लंघनों, अवैध फॉर्म बदलावों और आईटी शक्तियों के केंद्रीयकरण पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आपत्तियों पर आयोग ने ठोस जवाब देने के बजाय इन्हें केवल 'आंतरिक सुझाव' बताकर 'टालने' की कोशिश की है।

केशव कुमार भट्टड़
• 24 सितंबर 2026 • 91 क्लिक
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वाममोर्चा की पुकार पर 29 सितम्बर को  कोलकाता नगर निगम अभियान

राज्य

वाममोर्चा की पुकार पर 29 सितम्बर को कोलकाता नगर निगम अभियान

बीजेपी सरकार ने राजनीतिक मंशा से जानबूझकर राजनीतिक योजना बनाकर कोलकाता नगर निगम का परिसीमन (डीलिमिटेशन) किया है। इस आरोप को उठाते हुए और नगर निगम के समग्र गतिरोध का विरोध जताते हुए आगामी 29 सितम्बर को कोलकाता जिला वाममोर्चा ने 'कोलकाता नगर निगम चलो' का आह्वान किया है।

अपराजिता
• 24 सितंबर 2026 • 7 क्लिक
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ECI: चुनाव आयोग पर तानाशाही कब्ज़ा: 'तीन में से दो' आयुक्तों की अभूतपूर्व बगावत

राष्ट्रीय

ECI: चुनाव आयोग पर तानाशाही कब्ज़ा: 'तीन में से दो' आयुक्तों की अभूतपूर्व बगावत

10 महीनों में 14 बार लिखित विरोध दर्ज। "वोटर लिस्ट में हेरफेर और संवैधानिक संस्थाओं को गुलाम बनाने की हर साजिश के खिलाफ जनता की आवाज बुलंद रहेगी - लोकतंत्र तानाशाही से नहीं हारेगा!" मोदी सरकार द्वारा चुनाव आयोग पर अपने एकाधिकार की कोशिशों का भंडाफोड़ हो गया है। आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त के 'मनमाने' और गैर-कानूनी फैसलों के खिलाफ दो चुनाव आयुक्तों ने सीधी बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। 10 महीनों में 14 बार लिखित विरोध दर्ज कराकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि किस तरह डिजिटल केंद्रीकरण और 'फॉर्म-6' में असंवैधानिक बदलाव के जरिए करोड़ों नागरिकों और युवाओं को मताधिकार से बेदखल करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। अधिकारियों के अधिकारों पर डाका डालने से लेकर अदालतों में फर्जी याचिकाएं लगाने तक, लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था को तानाशाही के औजार में तब्दील किया जा चुका है। इतिहास में यह पहली बार है जब आयोग के बहुमत (तीन में से दो आयुक्तों) ने मतदाता सूची की शुचिता और संस्थागत पारदर्शिता को लेकर खुद आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं। 'यह लोकतंत्र के भरोसे पर प्रश्न चिन्ह है'।

केशव कुमार भट्टड़
• 23 सितंबर 2026 • 161 क्लिक
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प्रमुख विचार

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युग-प्रवर्तक भारतपथिक राममोहन राय :- विद्युत पाल281 क्लिक

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शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

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विरोध प्रदर्शन: दिल्ली में पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीपीआईएम
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विरोध प्रदर्शन: दिल्ली में पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीपीआईएम

लोकतंत्र में जनता का अधिकार नहीं दबेगा! दिल्ली में 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से पहले ट्रेनों के रद्द होने, मेट्रो स्टेशनों के बंद होने और इंटरनेट पर पाबंदियों के खिलाफ सीपीआई(एम) के महासचिव एम. ए. बेबी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने प्रशासन के इस रवैये पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हनन बताया। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि नागरिकों के संगठित होने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार मौलिक है। अब कोर्ट ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए आयोजकों से अतिरिक्त जानकारी मांगी है।

केशव कुमार भट्टड़ · 3 दिन पहले
'वाम वध' का फासीवादी उन्माद: एक बीमारी
विश्लेषण

'वाम वध' का फासीवादी उन्माद: एक बीमारी

केशव कुमार भट्टड़ · 3 दिन पहले
संघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगा
राज्य

संघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगा

अपराजिता · 5 दिन पहले
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दिल्‍ली प्रदर्शन 10 अक्टूबर : प्रदर्शन रोकने के लिए गृह सचिव ने की बैठक, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी भी नहीं दिया जा रहा।

SFI की नेत्री आइशी घोष ने एक वीडियो संदेश में बताया है कि उन्हें मुंडका पुलिस थाने में रखा गया है। उन्हें काफी समय से पीने का पानी नहीं दिया गया है। धरपकड़ के कारण सभी लोग घायल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह सोचकर गलतफहमी में है कि पानी या खाना न देकर और लोगों को कैद करके वह इस विरोध को दबा सकती है।

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संघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगा

राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर हमलों के साथ-साथ देश के कॉलेज-विश्वविद्यालयों में एबीवीपी के कब्जे और परिसरों में हिंदुत्ववादी राजनीति का विस्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कब्जे के खिलाफ एसएफआई अपना संघर्ष जारी रखेगी।

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तृणमूल-कांग्रेस नहीं कर सकी, भाजपा भी नहीं कर पाएगी: लालगढ़ में मीनाक्षी की चेतावनी

तृणमूल-कांग्रेस का गुंडाराज और माफियाराज वामपंथियों को दबा नहीं सका और भाजपा भी ऐसा नहीं कर पाएगी। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की बदहाल स्थिति को बदलने तथा अपने अर्जित अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी है।

मीनाक्षी मुखर्जी

सीपीआई (एम) की केंद्रीय कमेटी की सदस्य

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वकीलों पर हमले के विरोध में हाईकोर्ट में जुलूस

बदमाशों की गिरफ्तारी और कानून का शासन स्थापित करने की माँग को लेकर 'प्रगतिशील आइनजीवी मंच' द्वारा यह जुलूस निकाला गया। संगठन का आरोप है कि राज्य में राजनीतिक संघर्ष और हमले की घटनाओं में वकील भी शिकार हो रहे हैं।

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हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत

सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है।

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सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।

भाषा, जाति, धर्म और खान-पान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति चल रही है।

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केरल कॉलेज यूनियन-चुनावों में SFI की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत

छात्रों के जनादेश का स्पष्ट संदेश: परिसरों में भगवाकरण नामंजूर, SFI पर ही भरोसा भरपूर! स्कूल संसद में जबरदस्त जीत के बाद केरल के विश्वविद्यालय एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज संघ चुनावों में भी SFI ने बंपर जीत हासिल करते हुए अधिकांश कॉलेजों में अपना परचम लहराया है। संगठन ने केरल और कन्नूर विश्वविद्यालय सहित कई प्रमुख संस्थानों में विपक्षी छात्र संगठनों (KSU, UDSF, ABVP) से अनेक यूनियन सीटें वापस छीन लीं। यह ऐतिहासिक जीत ऐसे समय में दर्ज की गई है जब शिक्षा प्रणाली के कथित भगवाकरण के प्रयास किए जा रहे थे। राज्य में UDF शासन के बावजूद मिली इस शानदार सफलता ने मीडिया के उस आख्यान को खारिज कर दिया है कि SFI का वर्चस्व केवल LDF सत्ता के कारण था।

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केरल स्कूल संसद चुनाव: ~ 699 में से 604 स्कूलों में 'एस एफ आई' की महाविजय ~

"समाजवाद ही भविष्य है, धर्मनिरपेक्षता ही ताकत है" - कलम, किताब और क्रांति का संगम; केरल के स्कूलों में लहराया लाल परचम! केरल के स्कूल संसद चुनावों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने 699 में से 604 स्कूलों में शानदार जीत दर्ज कर नया इतिहास रचा है, जिसमें 148 परिसरों में निर्विरोध निर्वाचन शामिल है। यह चुनाव दक्षिणपंथी राजनीति और छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ आम छात्रों का कड़ा प्रतिरोध बनकर उभरा। संगठन ने कासरगोड, कन्नूर, इडुक्की, मलप्पुरम और तिरुवनंतपुरम सहित लगभग सभी जिलों में विरोधियों को पछाड़कर अपना एकतरफा-दबदबा कायम किया। 'एस एफ आई' ने 'यू डी एस एफ' , 'एम एस एफ' और 'के एस यू' जैसे प्रतिद्वंद्वी छात्र गठबंधनों के कई मजबूत किलों और सीटों पर पुनः कब्ज़ा जमाया। एसएफआई राज्य सचिव मण्डल ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय संघर्षशील कार्यकर्ताओं और जागरूक छात्र समुदाय के अटूट विश्वास को दिया है।

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LIVEसक्रिय संघर्ष ट्रैकर
किसान आंदोलन
दिल्ली सीमानवंबर 2024 से
न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग जारी।
सक्रिय
आशा कर्मी हड़ताल
महाराष्ट्रजनवरी 2026 से
वेतन और स्थायीकरण को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल।
हड़ताल
मनरेगा मज़दूर मोर्चा
झारखंडमार्च 2026 से
बकाया भुगतान और कार्यदिवस बढ़ाने की माँग।
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शिक्षक भर्ती संघर्ष
उत्तर प्रदेशदिसंबर 2025 से
लंबित नियुक्तियों पर अदालती फैसले के बाद आंशिक जीत।
आंशिक जीत

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