राज्य

डोमकल विधानसभा केंद्र से सी पी आई (एम) के उम्मीदवार मोस्ताफिजुर रहमान (राना)विजयी

श्रेया जायसवाल04 मई 20261 मिनट पठन50 बार पढ़ा गया
डोमकल से माकपा (CPI-M) के उम्मीदवार मोस्ताफिजुर रहमान (राना) विजयी हुए हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार हुमायूं कबीर को पराजित किया।
डोमकल विधानसभा केंद्र से सी पी आई (एम) के उम्मीदवार मोस्ताफिजुर रहमान (राना)विजयी

डोमकल विधानसभा केंद्र से सी पी आई (एम) के उम्मीदवार 

मोस्ताफिजुर रहमान (राना) विजयी

डोमकल से माकपा (CPI-M) के उम्मीदवार मोस्ताफिजुर रहमान (राना) विजयी हुए हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार हुमायूं कबीर को पराजित किया। मतगणना की शुरुआत से ही वे बढ़त बनाए हुए थे। तृणमूल के आतंक की परवाह न करते हुए डोमकल की आम जनता ने 23 अप्रैल को मतदान किया था।

इस अवसर पर दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान माकपा महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा, "बंगाल में तृणमूल के भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में गुस्सा था। इसके अलावा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, दोनों दलों द्वारा किया गया भारी खर्च और एसआईआर (SIR) जैसे कारक भी थे। इस ध्रुवीकरण के बीच भी वामपंथियों ने राज्य में अपना वोट बैंक सुरक्षित रखा है। कुछ समय के अंतराल के बाद अब पश्चिम बंगाल विधानसभा में वामपंथी प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। राज्य में तीव्र ध्रुवीकरण की राजनीति के बावजूद 35 सीटों पर वामपंथियों का वोट प्रतिशत बढ़ा है। हालांकि, हमें और भी बेहतर परिणामों की उम्मीद थी।

अपलोडर: श्रेया जायसवाल

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

विज्ञापन
और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़13 अप्रैल 2026