कलकत्ता बन गया बनर्जी परिवार का निजी साम्राज्य:
45 प्लॉट पर कब्जा, 1100 परिवार उजाड़े
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- ममता बनर्जी के घर के 400 गज के दायरे में 45 प्लॉट बनर्जी परिवार के कब्जे में।
- कालीघाट अब 'बनर्जीपाड़ा' बन गया, स्थानीय लोग उजाड़कर बेघर।
- लिप्स एंड बाउंस से लेकर विश्व बांग्ला तक — हर घोटाले की जड़ का ठिकाना 30बी हरिश चटर्जी स्ट्रीट।
- सत्ता के 15 साल में जमीन माफिया का मॉडल — भांगड़ से डायमंड हार्बर तक।
- अब जब सत्ता गई तो नोटिस आया, लेकिन सवाल है — कौन जवाबदेह होगा?
कोलकाता। वरिष्ठ पत्रकार सुदीप्त बोस ने एक 'विशेष बातचीत में' तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कलकत्ता के कालीघाट इलाके को बनर्जी परिवार ने व्यवहारतः अपना निजी साम्राज्य बना लिया है।
सुदीप्त बोस के अनुसार, 2019 में हरिश चटर्जी स्ट्रीट, हरिश मुखर्जी रोड और आसपास के इलाके में बनर्जी परिवार से जुड़े 34 प्लॉट थे, जो 2026 में बढ़कर 45 हो गए हैं। ममता बनर्जी के आधिकारिक आवास 30बी हरिश चटर्जी स्ट्रीट को केंद्र मानकर 500 मीटर के दायरे में यह सारा कब्जा फैला हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस दौरान 73 नंबर वार्ड से ही करीब 1100 परिवार और पूरे भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से 5000 से अधिक परिवारों को उजाड़ दिया गया।
पत्रकार सुदीप्त बोस ने कहा कि लिप्स एंड बाउंस कंपनी (अभिषेक बनर्जी की कंपनी के रूप में चर्चित) का पुराना पता भी 30बी हरिश चटर्जी स्ट्रीट ही था, जिसे शिक्षक भर्ती घोटाले और कोयला घोटाले से जोड़ा जा रहा है। इसी पते से अभिषेक बनर्जी ने 2013 में विश्व बांग्ला ट्रेडमार्क का आवेदन भी किया था। बाद में विश्व बांग्ला मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाया गया और इसके प्रमोशनल कार्यक्रमों से होने वाली रॉयल्टी अभिषेक बनर्जी के पास जा रही है।
सुदीप्त बोस ने आगे बताया कि भांगड़, बाकड़ाहाट, साजुआ, विष्णुपुर और डायमंड हार्बर में भी बनर्जी परिवार के सदस्यों — अभिषेक बनर्जी, कार्तिक बनर्जी, अमित बनर्जी आदि के नाम पर बिघा-बिघा जमीन है। उन्होंने इसे “जमीन माफिया का आधुनिकतम मॉडल” बताया।
अब तृणमूल सरकार के पतन के बाद कोलकाता नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी की 121 कालीघात रोड वाली संपत्ति (जहाँ वे रहते हैं) समेत दो संपत्तियों को नोटिस जारी किया है। सुदीप्त बोस ने सवाल उठाया कि जब सत्ता में थे तब कुछ नहीं जानते थे, अब नोटिस आने पर क्या जवाब देंगे?
'वाम की आवाज' का मत है कि यह केवल एक परिवार के लालच की ही कहानी नहीं है , बल्कि सत्ता में रहते हुए संस्थागत भ्रष्टाचार और जोर-जुलुम से जमीन कब्जे का सबसे बड़ा उदाहरण भी है। बंगाल की जनता अब इन सवालों के जवाब मांग रही है।
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