बीजू कृष्णन ने कहा, "वर्तमान में लुटेरा पूँजीवाद भारत जैसे कृषि प्रधान देश में कृषि क्षेत्र को लूट रहा है। जमीन से लेकर कृषि के तमाम उपकरण—खाद, बीज और उत्पादित फसलें—सब कुछ कॉर्पोरेट्स के हितों के अनुसार नियंत्रित किया जा रहा है।" महाजनी शोषण और निजी वित्तीय संस्थानों की अनियंत्रित लूट के कारण किसान परिवारों में गरीबी और यहाँ तक कि आत्महत्याएँ भी बढ़ रही हैं। कृषि पर एकाधिकार पूँजी के प्रभुत्व के साथ-साथ जमीन हड़पने के कारण सीमांत लोगों को बेदखल किया जा रहा है। भूमि स्वामित्व का केंद्रीकरण और बेदखली की घटनाएं लगातार हो रही हैं। ऐसे समय में सीमांत और मध्यम किसानों की रक्षा की लड़ाई बेहद जरूरी है।
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जन समाचार मंच
कृषक और सीमांत वर्ग के लोगों की रक्षा के लिए लड़ाई तेज़ करनी होगी
कृषक और सीमांत वर्ग के लोगों की रक्षा के लिए लड़ाई तेज़ करनी होगी
** चिन्मय कर — मेदिनीपुर **
कॉर्पोरेट भूमि-माफियाओं के चंगुल से राज्य के कृषकों और सीमांत लोगों के भूमि अधिकारों की रक्षा के आंदोलन को मजबूत करने के लिए राज्य में पहला 'भूमि कन्वेंशन' आयोजित किया गया। अखिल भारतीय किसान सभा' की पश्चिम बंगाल राज्य समिति ने यह कन्वेंशन आयोजित किया। शुक्रवार को मेदिनीपुर शहर के श्यामसंघ भवन में इस कन्वेंशन का उद्घाटन करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव विजू कृष्णन ने कहा कि कॉर्पोरेट व्यापारियों के स्वार्थों को पूरा करने के लिए भूमि का केंद्रीकरण बढ़ रहा है, और जमीन हड़पने वालों के कारण किसान व सीमांत लोग अपनी जमीनों से बेदखल हो रहे हैं। उनकी रक्षा करने के लिए स्थानीय स्तर पर जानकारी (डेटा) एकत्र कर किसान समाज को आंदोलन में शामिल करना होगा।
इस दिन कन्वेंशन में भूमि अधिकार की रक्षा के लिए विजू कृष्णन के अलावा किसान आंदोलन के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत मिश्रा ,किसान सभा के राज्य सचिव परेश पाल और किसान नेता अमल हालदार ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान सभा के राज्य अध्यक्ष मेघनाद भुइयां ने की।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के आने के बाद कॉर्पोरेट और सांप्रदायिक ताकतों के गठजोड़ से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम किसानों के भूमि अधिकारों की रक्षा के आंदोलन का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने खेत मजदूरों और सीमांत लोगों को एकजुट कर प्रतिरोध आंदोलन को तीव्र करने की आवश्यकता बताई।

उद्घाटन भाषण में विजू कृष्णन ने कहा, "वर्तमान में लुटेरा पूँजीवाद भारत जैसे कृषि प्रधान देश में कृषि क्षेत्र को लूट रहा है। जमीन से लेकर कृषि के तमाम उपकरण—खाद, बीज और उत्पादित फसलें—सब कुछ कॉर्पोरेट्स के हितों के अनुसार नियंत्रित किया जा रहा है।" महाजनी शोषण और निजी वित्तीय संस्थानों की अनियंत्रित लूट के कारण किसान परिवारों में गरीबी और यहाँ तक कि आत्महत्याएँ भी बढ़ रही हैं। कृषि पर एकाधिकार पूँजी के प्रभुत्व के साथ-साथ जमीन हड़पने के कारण सीमांत लोगों को बेदखल किया जा रहा है। भूमि स्वामित्व का केंद्रीकरण और बेदखली की घटनाएं लगातार हो रही हैं। ऐसे समय में सीमांत और मध्यम किसानों की रक्षा की लड़ाई बेहद जरूरी है।
इस कन्वेंशन के लक्ष्य और किसान सभा के वर्तमान कर्तव्यों पर प्रकाश डालते हुए सूर्यकांत मिश्रा ने कहा, "एक समय हमने सामंतवादी जमींदारों के चंगुल से किसानों की मुक्ति और आमूलचूल भूमि सुधार के लिए लड़ाई लड़ी थी। अब 'पूँजीवादी जमींदार' सामने आ गए हैं, जिनका सामंतवादियों के साथ भी गठजोड़ है। अब बंगाल में खतरा और भी बड़ा है।"
भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए उन्होंने आगे कहा कि किसानों और खेत मजदूरों को एकजुट होकर लड़ाई के मैदान में उतरना होगा।
इस कन्वेंशन के विषय पर प्रस्ताव रखते हुए परेश पाल ने वर्तमान समय में जमीन हड़पने के कारण पट्टाधारकों और बटाईदारों की बेदखली की घटनाओं से सीमांत किसानों को होने वाले नुकसान को रेखांकित किया। उन्होंने किसानों की मांगों को उठाते हुए कहा कि इस समय बंगाल में कृषि, कृषि भूमि और किसानों के हितों की रक्षा का संघर्ष तेज करना होगा।
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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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0कृषक और सीमांत वर्ग के लोगों की रक्षा के लिए लड़ाई तेज़ करनी होगी
अपलोडर: VKA-43UUB7• प्रकाशित: 11 जुलाई 2026 • 3 मिनट पठन



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