जन समाचार मंच
वही तो सूत्रधार है
जिसकी कलम में धार है
नेपथ्य में था जो कभी
उसे देखने की मार है
बोधिसत्व, भारतरत्न
वो न्याय की मियार है
देश का निर्माता जो
संविधान का शिल्पकार है
भेदभाव,असमानता
वो अन्याय पर तलवार है
समता न्याय बंधुत्व के लिए
जो लड़ने को तैयार है
उसकी नस्लों को देखो
ये सामने ही बढ़वार है
छांव जिसे मयस्सर न था
वो आज बरगदाकार है
गीता,कुरआन,भागवत नहीं
संविधान का ये सार है
कि भीम मनुवादियों के लिए
एक खुला नंगा तार है
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अपलोडर: VKA-BEVEZZ • प्रकाशित: 14 अप्रैल 2026 • 1 मिनट पठन

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने स्पष्टत: कहा कि राममोहन राय ने भारत में आधुनिक युग का उद्घाटन किया, आज के विश्वजनीन सहयोग के जमाने की मानवता में हमारी दीक्षा उन्होंने ही सम्पन्न किया।
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

भक्ति-आन्दोलन का जनसाधारण पर जितना व्यापक प्रभाव हुआ उतना किसी अन्य आन्दोलन का नहीं। पहली बार शूद्रों ने अपने सन्त पैदा किये, अपना साहित्य और अपने गीत सृजित किये। कबीर, रैदास, नाभा सिपी, सेना नाई, आदि-आदि महापुरुषों ने ईश्वर के नाम पर जातिवाद के विरुद्ध आवाज बुलन्द की। समाज के न्यस्त स्वार्थवादी वर्ग के विरुद्ध नया विचारवाद अवश्यम्भावी था , वह हुआ।
अपराजिता • 30 जुलाई 2026

अपने शब्दों से समाज को आईना दिखाने वाले और साहित्य को राजनीति की मशाल कहने वाले प्रेमचंद का जीवन कितना चुनौतीपूर्ण रहा, यह इस फ़िल्म के माध्यम से देखा जा सकता है।प्रेमचंद के बचपन से लेकर मृत्यु पर्यन्त जीवन के प्रत्येक पड़ाव को जिस जीवंतता से दर्शकों के सामने लाया गया वह अविस्मरणीय था । एक व्यक्ति की वैचारिक पृष्ठभूमि कैसे विकसित होती है और कैसे वह अपने विचारों को अपनी कलम के माध्यम से समाज की सोचने की क्षमता को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल करता है, कैसे कुरीतियों पर कुठाराघात कर उसे सबके सामने लाने की जिद्द में कई यातनाएँ सहता है - फ़िल्म के माध्यम से प्रेमचंद के जीवन का यह पहलू काफी प्रभावशाली तरीके से दर्शकों के समक्ष रखा गया है।।
राजीव कुमार पाण्डेय • 03 अगस्त 2026
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