वही तो सूत्रधार है 

जिसकी कलम में धार है 

नेपथ्य में था जो कभी 

उसे देखने की मार है

बोधिसत्व, भारतरत्न  

वो न्याय की मियार है 

देश का निर्माता जो 

संविधान का शिल्पकार है

भेदभाव,असमानता

वो अन्याय पर तलवार है 

समता न्याय बंधुत्व के लिए 

जो लड़ने को तैयार है

उसकी नस्लों को देखो 

ये सामने ही बढ़वार है 

छांव जिसे मयस्सर न था 

वो आज बरगदाकार है

गीता,कुरआन,भागवत नहीं 

संविधान का ये सार है 

कि भीम मनुवादियों के लिए 

एक खुला नंगा तार है