प्रश्नपत्र लीक : 'नीट' रद्द।
जिम्मेदार कौन ?
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पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ? नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फैल गया था। पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है। प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं। ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।
एनटीए ने कहा है कि केंद्र सरकार की मंज़ूरी के बाद परीक्षा रद्द की गई है और इस परीक्षा को दोबारा आयोजित करवाया जाएगा।
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NEET UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी गई है। NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) ने 3 मई 2026 को आयोजित परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों और जांच में अनियमितताएं पाए जाने के बाद 12 मई 2026 को परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। 22 लाख से अधिक छात्रों के लिए पुन: परीक्षा (Re-exam) आयोजित की जाएगी, जिसकी नई तारीख शीघ्र घोषित होगी।
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सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया ही 'दोषपूर्ण' है और उन्होंने इसमें सुधार की मांग की है। सीपीआई (एम) नेता ने यह आरोप भी लगाया कि नीट (NEET) रद्द होने से उन लाखों छात्रों के मनोबल को चोट पहुंची है जिन्होंने सालों तक कड़ी मेहनत की थी। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, "अखिल भारतीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार ऐसी विफलताएं पूरी व्यवस्था पर से लोगों के विश्वास को मिट्टी में मिला रही हैं।"
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नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फैल गया था।
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किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना रहती है। पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है। प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं। ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं।
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डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी 2026) के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों को लेकर पूरे देश में उबाल आया हुआ है। पिछले 3 मई को नीट-यूजी की परीक्षा हुई थी। लेकिन उसके तुरंत बाद प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगने लगे। उत्पन्न परिस्थितियों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने उक्त परीक्षा रद्द कर दी है। घटना की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह है। वह गिरोह कैसे काम करता था, उस गिरोह में कौन शामिल हैं—यह अभी जांच का विषय है।
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प्रश्नपत्र लीक करने वाले इस तरह के गिरोहों में विभिन्न स्तर होते हैं। इन स्तरों की संरचना काफी हद तक पिरामिड जैसी होती है। गिरोह के शीर्ष पर 'सॉल्वर गैंग' का सरगना बैठा होता है। प्रश्नपत्रों के प्रिंटिंग प्रेस या जिस गाड़ी से प्रश्नपत्रों की आपूर्ति की जाती है—ज्यादातर मामलों में इस 'सरगना' का वहां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध होता है। लीक हुआ प्रश्नपत्र इस गिरोह के 'सरगनाओं' के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। वे इस प्रश्नपत्र को सीधे छात्रों को नहीं बेचते। पहले इसे 'थोक' बाजार में बेचा जाता है। प्रश्नपत्र लीक गिरोह के पिरामिड में सरगना के नीचे कुछ क्षेत्रवार 'किंगपिन' होते हैं। गिरोह का सरगना सबसे पहले इन क्षेत्रवार 'किंगपिन' को प्रश्नपत्र बेचता है।
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इस बार की नीट परीक्षा के मामले में जांचकर्ताओं का अनुमान है कि गिरोह के 'सरगना' ने 180 प्रश्नों का सेट बेचा था। अनुमान है कि इसके बदले उसे 5-10 करोड़ रुपये मिले थे। इन सरगनाओं के पास छिपने का अवसर भी सबसे ज्यादा होता है। कई मामलों में, पहली ओएमआर शीट भरे जाने से पहले ही सरगना विभिन्न फर्जी खातों और क्रिप्टोकरेंसी की आड़ में छिप जाते हैं। इनका मुख्य लक्ष्य 'थोक' बाजार से पैसा कमाना होता है। इसके बाद वे क्षेत्रीय दलालों के माध्यम से कैसे बिक रहे हैं, इसे लेकर इन सरगनाओं को विशेष चिंता नहीं होती।
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इसके बाद पिरामिड के दूसरे स्तर पर कुछ क्षेत्रवार 'किंगपिन' या दलाल होते हैं। ये दलाल मुख्य रूप से कोटा, सीकर या पटना (जिन शहरों में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर हैं) जैसे शहरों में छिपे रहते हैं। कई मामलों में, किसी छोटे कोचिंग सेंटर या हॉस्टल के मालिक इस तरह के गिरोह में दलाल की भूमिका निभाते हैं। परीक्षा से 48-72 घंटे पहले ये दलाल अपने 'प्रीमियम ग्राहकों' से संपर्क करते हैं। 'न्यूज़ 18' के अनुसार, इसके लिए प्रति परीक्षार्थी 15-30 लाख रुपये तक मांगे जाते हैं। यदि कोई दलाल मुख्य सरगना से 50 लाख रुपये में प्रश्नपत्र खरीदता है, तो वह इस स्तर पर आकर भारी लाभ कमा लेता है। मात्र 10 अमीर परिवारों को यह प्रश्नपत्र बेचकर ही उसे 500 प्रतिशत का लाभ हो जाता है।
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प्रश्नपत्र लीक गिरोह के तीसरे स्तर पर कुछ स्थानीय सहयोगी और 'सॉल्वर' (जो प्रश्नपत्र के आधार पर उत्तरपुस्तिका तैयार करते हैं) होते हैं। आमतौर पर इस स्तर पर कोई मेडिकल छात्र या मेधावी छात्र देखा जाता है। लीक हुए प्रश्नपत्र को तेजी से हल करने के लिए उन्हें 2-5 लाख रुपये का पारिश्रमिक दिया जाता है। इसके बाद वह उत्तरपुस्तिका बांटी जाती है। इसके बाद सबसे निचले स्तर पर एक और प्रकार के दलाल होते हैं। ये दलाल मुख्य रूप से 'डिलीवरी एजेंट' के रूप में काम करते हैं। जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आता है, प्रश्नपत्र की कीमत भी कम होने लगती है। 'न्यूज़ 18' के अनुसार, परीक्षा की पूर्व संध्या पर टेलीग्राम या किसी अन्य ऑनलाइन माध्यम से मात्र 25-50 हजार रुपये में भी इस तरह के लीक प्रश्नपत्र बेचे जा सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में प्रश्नपत्र लीक गिरोह के सरगना से लेकर निचले स्तर तक लगभग 100 करोड़ रुपये के लेनदेन की संभावना रहती है।
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जांचकर्ताओं ने पहले ही संकेत दे दिया है कि इस बार नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे भी एक अत्यंत संगठित गिरोह है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फैला था। हालांकि, जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह गिरोह देश के कुछ अन्य राज्यों में भी सक्रिय था और प्रश्नपत्र उन राज्यों तक भी पहुंचा था।
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जांच सूत्रों के अनुसार, प्रश्नपत्र कैसे और कहां से लीक हुआ, इसका सुराग मिल गया है। सीबीआई ने पहले ही इस भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, एक जांच सूत्र का दावा है कि प्रारंभिक तौर पर पता चला है कि इस गिरोह के सदस्य महाराष्ट्र के नासिक में मिले थे। वहां से लीक प्रश्नपत्र की एक प्रति हरियाणा भेजी गई थी। वहां पांच अलग-अलग प्रश्नों के सेट तैयार किए गए थे। एक सेट में 10 प्रश्नपत्र थे। वह सेट राजस्थान के जयपुर पहुंचा, वहां से जमवारामगढ़ और फिर उसी राज्य के सीकर पहुंचा। इसके बाद प्रश्नपत्रों के सेट अलग-अलग तरह से आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, उत्तराखंड, दिल्ली और बिहार भी पहुंच गए थे।
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जांच सूत्रों के अनुसार, राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने अब तक 15 लोगों को हिरासत में लिया है। इतना ही नहीं, यह भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक फैला है, इसकी जांच की जा रही है। जांच सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा से पहले ही विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रश्नपत्र घूम रहा था। जैसे ही मामला संज्ञान में आया, तुरंत कार्रवाई की गई। सोमवार को राज्य के सीकर जिले से इस घटना में शामिल होने के संदेह में 15 लोगों को हिरासत में लिया गया है। दूसरी ओर, जयपुर से मनीष नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। संदेह है कि वह इस प्रश्नपत्र लीक का 'मुख्य साजिशकर्ता' है।
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2024 में भी नीट पीजी की परीक्षा निर्धारित समय से मात्र एक दिन पहले रद्द करनी पड़ी थी, क्योंकि उस समय भी प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे थे और कुछ सबूत भी मिले थे। उस समय परीक्षार्थियों को एडमिट कार्ड भी मिल गए थे। सब कुछ तय होने के बावजूद, अधिकारियों ने अंततः परीक्षा से मात्र 24 घंटे पहले उसे स्थगित कर दिया था। उन्हें लगा था कि प्रश्नपत्र लीक हो गया है।
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अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के आयोजन में बार-बार 'चूक' क्यों हो रही है ? यह देश के युवाओं के भविष्य के प्रति एक अपराध है। बार-बार 'पेपर माफिया' बच निकलते हैं और छात्रों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। अब भी लाखों छात्रों को फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलनी पड़ेगी। प्रश्नपत्र लीक विवाद के कारण नीट-यूजी 2026 प्रवेश परीक्षा रद्द कर दी गई है। मोदी शासन के पिछले एक दशक में लगभग 100 बार प्रश्नपत्र लीक हुए हैं और 50 बार फिर से परीक्षाएं आयोजित की गई हैं। इस बार के लीक कांड से 22 लाख से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं। क्या कोई इसकी जिम्मेदारी लेगा?'
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