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" मेहनतकश लोगों के हित में विधानसभा के भीतर और बाहर संघर्ष जारी रहेगा "- मोहम्मद सलीम

श्रेया जायसवाल•22 मई 20266 मिनट पठन55 बार पढ़ा गया

" 80 विधायक, 29 सांसद और पंचायत से लेकर नगर पालिका तक हर चीज पर कब्जा होने के बावजूद नवान्न से हटते ही तृणमूल-कांग्रेस पूरे राज्य में भागती फिर रही है। वह मोमबत्ती की तरह पिघलकर राजनीति के मैदान से गायब हो रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसने गुंडागर्दी और पुलिस के दम पर हर जगह सत्ता हथियाई थी, उसे जनता का प्यार नहीं मिला। राज्य में भाजपा जो नया संकट लेकर आई है, उसके खिलाफ भले ही एक सीट पर जीत मिली हो, लेकिन वामपंथी ही मताधिकार की रक्षा, बुलडोजर की आक्रामकता को रोकने और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा की माँगों को लेकर लड़ाई के मैदान में डटे रहेंगे। .."

" मेहनतकश लोगों के हित में विधानसभा के भीतर और बाहर संघर्ष जारी रहेगा "- मोहम्मद सलीम

" मेहनतकश लोगों के हित में विधानसभा के भीतर और बाहर संघर्ष जारी रहेगा "

मोहम्मद सलीम

सीपीआई एम पश्चिम बंगाल के सचिव

भले ही एक सीट पर जीत मिली हो, लेकिन डोमकल के साथ-साथ पूरे राज्य के मेहनतकश लोगों के हितों के लिए सीपीआई(एम) विधायक मोस्ताफिजुर रहमान विधानसभा में आवाज बुलंद रखेंगे। और सड़कों पर जनता को लामबंद करके माकपा संघर्ष जारी रखेगी। गुरुवार को डोमकल में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम, डोमकल के विधायक और माकपा नेताओं ने यह बात कही।

मोहम्मद सलीम ने कहा कि 80 विधायक, 29 सांसद और पंचायत से लेकर नगर पालिका तक हर चीज पर कब्जा होने के बावजूद नवान्न से हटते ही तृणमूल-कांग्रेस पूरे राज्य में भागती फिर रही है। वह मोमबत्ती की तरह पिघलकर राजनीति के मैदान से गायब हो रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसने गुंडागर्दी और पुलिस के दम पर हर जगह सत्ता हथियाई थी, उसे जनता का प्यार नहीं मिला। राज्य में भाजपा जो नया संकट लेकर आई है, उसके खिलाफ भले ही एक सीट पर जीत मिली हो, लेकिन वामपंथी ही मताधिकार की रक्षा, बुलडोजर की आक्रामकता को रोकने और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा की माँगों को लेकर लड़ाई के मैदान में डटे रहेंगे।

डोमकल में आयोजित सीपीआई (एम) की इस जनसभा में आईएसएफ और एसडीपीआई के कार्यकर्ता भी शामिल हुए थे। सभा में मोहम्मद सलीम के अलावा विधायक मोस्ताफिजुर रहमान, माकपा नेता शतरूप घोष, पार्टी के जिला सचिव जामीर मोल्ला और वरिष्ठ नेता अनीसुर रहमान ने भाषण देकर डोमकल के लोगों का अभिनंदन किया। सभा की अध्यक्षता इकबाल हुसैन ने की।

नए विधायक मोस्ताफिजुर रहमान ने विधानसभा में जनता के हितों की रक्षा के लिए मुखर रहने का संकल्प लेते हुए कहा "मैं सिर्फ माकपा का विधायक नहीं हूँ, बल्कि डोमकल के सभी लोगों का विधायक हूँ। कोई राजनीतिक भेदभाव नहीं किया जाएगा। वाम मोर्चा सरकार के समय जिस तरह सबको साथ लेकर डोमकल का विकास हुआ था, जिससे यह पिछड़े ब्लॉक से सब-डिवीजन शहर बना, उसी तरह सबके विकास के लिए मैं विधानसभा में लड़ूँगा। और हमारे सभी कार्यकर्ता व समर्थक सबको साथ लेकर सड़कों पर रहेंगे।"

मोहम्मद सलीम ने कहा, "हमारा एक विधायक निर्वाचित होकर भी कह रहा है कि वह सबके लिए काम करेगा। वहीं दूसरी ओर, नए मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक कह रहे हैं कि इन्होंने हमें वोट दिया, उन्होंने हमें वोट नहीं दिया, इनके लिए करेंगे और उनके लिए नहीं करेंगे। शपथ लेते समय जो कहा था, अभी से उसका उल्टा कर रहे हैं। जिन्होंने भाजपा और तृणमूल-कांग्रेस का समर्थन किया था, उनसे भी मैं कहूँगा कि पुरानी बातें छोड़िए, अब हाथ से हाथ मिलाकर काम करना होगा। मैं नई भाजपा सरकार को चुनौती देता हूँ, चुनौती स्वीकार करो। डोमकल नगर पालिका का चुनाव करा कर दिखाओ। अभी भी जो अच्छे लोग तृणमूल के झंडे के नीचे हैं, वे लाल झंडे के नीचे आ जाएँ। सब नहीं, जिन्होंने चोरी-भ्रष्टाचार किया है और धर्म के नाम पर राजनीति की है, उनके लिए 'नो एंट्री' है। जो चोर हैं वे कालीघाट जाएँ। जो चोर नहीं हैं, वे हमारे साथ सड़कों पर उतरें। मेहनतकश लोग, अल्पसंख्यक, दलित, अनुसूचित जाति, आदिवासी महिलाओं के हक के लिए हम ही सबको साथ लेकर लड़ेंगे। केवल लाल झंडा ही लोगों के बीच पुल बनाकर उन्हें एकजुट कर सकता है।"

यह एकजुट लड़ाई क्यों जरूरी है, इसका उल्लेख करते हुए सलीम ने कहा कि अगर नई सरकार अच्छा काम करती, तो मुख्य सचिव निर्देश जारी करके सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारियों के आलोचना करने के अधिकार को नहीं छीनते। सरकार अन्याय करेगी, लेकिन आलोचना सहने की हिम्मत नहीं है। यह एक अघोषित आपातकाल (इमरजेंसी) है। हमारे वकील इस काले कानून को रद्द कराने के लिए अदालत जाएँगे। ममता बनर्जी ने जिस तरह मुँह पर ल्यूकोप्लास्ट लगाने को कहा था और मीटिंग-जुलूस निकालने पर रोक लगाई थी, यह भी वैसा ही किया जा रहा है। ईद पर कुर्बानी के समय सरकार ने डरा-धमकार गोमांस बंद करने और तंग करने का फतवा दिया है। मुसीबत में तो वे लोग पड़ गए जो गो-पालन करते हैं, दूध का व्यवसाय करते हैं और गाय बेचते हैं। सदगोप, घोष, यादव जो गाय की अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं, वे संकट में हैं। आज हमारे पक्ष से विकास भट्टाचार्य ने इसके खिलाफ अदालत में लड़ाई शुरू कर दी है।

शतरूप घोष ने कहा कि अब ममता बनर्जी भाजपा के खिलाफ लड़ाई में वामपंथियों को बुला रही हैं। पिछले पंद्रह वर्षों में जब केंद्र के खिलाफ हड़ताल होती थी, तो उन्होंने पुलिस से पिटवाया था। मोदी के लिए बंगाल की धरती पर दलाली की थी। अब पासा पलटने के बाद बुला रही हैं? वे 80 विधायकों को लेकर घरों में दुबक गए हैं, और हम एक विधायक को लेकर सड़क पर हैं। ममता बनर्जी ने कहा था कि 294 सीटों पर वही उम्मीदवार हैं। तो फिर फलता से दुम दबाकर कौन भागा? आप ही ना? अच्छा ही हुआ, फलता में आज भाजपा बनाम वाम मोर्चा की जो सीधी लड़ाई हो रही है, यही भविष्य है। पश्चिम बंगाल की धरती पर हम एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ेंगे।

सभा में पार्टी के जिला सचिव जामीर मोल्ला ने कहा कि डोमकल में तृणमूल ने दमघोंटू माहौल और आतंक का माहौल बना दिया था। लेकिन आखिरी शब्द आतंक नहीं, बल्कि जनता कहती है। सिर्फ हमारी पार्टी ने नहीं, बल्कि सबने मिलकर मोस्ताफिजुर रहमान को चुना है। भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि एक चुनाव में मतदाताओं के एक हिस्से को मताधिकार से वंचित करके चुनाव कराया गया। चुनाव आयोग 'उत्पीड़न आयोग' में बदल गया था। आज सरकार लोगों को 'डी' (संदिग्ध) वोटर बनाकर सरकारी सुविधाओं से भी वंचित करने पर उतारू है। हमारी पार्टी की मुस्तारी बानू ने इसके खिलाफ मामला दर्ज कराया था। उस मामले में नाम कमाने के लिए मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) कोर्ट गई थीं, लेकिन जनता ने उन्हें 'पूर्व' बना दिया। तृणमूल तो चली गई, लेकिन भाजपा जैसी पार्टी सत्ता में आई है जो बुलडोजर लेकर लोगों के बीच सांप्रदायिक नफरत फैला रही है। बला टली, तो आफत आ गई। ये सांप्रदायिक दंगे भड़काना चाहते हैं। इसके खिलाफ लोगों की एकजुटता कायम कर जनता की माँगों को लेकर हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

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साभार:गणशक्ति

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" मेहनतकश लोगों के हित में विधानसभा के भीतर और बाहर संघर्ष जारी रहेगा "- मोहम्मद सलीम

प्रकाशित: 22 मई 2026 • 6 मिनट पठन

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