जनवरी 2026 में एपस्टीन फाइल्स के बड़े हिस्से सार्वजनिक किए गए, जिनमें ट्रंप का नाम भी शामिल था। घरेलू विरोध और नाकामियों के बीच ट्रंप प्रशासन बाहरी आक्रामकता के माध्यम से राष्ट्रवादी उन्माद फैलाकर अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रहा है। यह साम्राज्यवादी रणनीति का क्लासिक उदाहरण है। अब इसका प्रमुख लक्ष्य समाजवादी क्यूबा है। क्यूबा की जनता और उसका समाजवादी मॉडल साम्राज्यवाद के विरुद्ध अटूट प्रतिरोध का प्रतीक है। 20-22 घंटे बिजली कटौती झेलते हुए भी क्यूबा ने सिर नहीं झुकाया। विश्व के सभी प्रगतिशील, शोषित और न्यायप्रिय शक्तियाँ क्यूबा के साथ खड़ी हैं।   भारतीय वामपंथी पार्टियाँ: सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई(एमएल) लिबरेशन, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी धमकियों की निंदा की। उन्होंने इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया और भारत सरकार से क्यूबा के साथ एकजुटता व्यक्त करने की माँग की।.

क्यूबा अकेला नहीं है

*

अमेरिकी साम्राज्यवाद की नई आक्रामकता की घोर निंदा

        इक्कीसवीं सदी के इस युग में, जब मानवता साम्राज्यवाद-विरोधी संघर्षों की नई लहर देख रही है, डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी साम्राज्यवादी शक्ति मध्ययुगीन बर्बरता और औपनिवेशिक लूट की मानसिकता को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। विश्व साम्राज्यवाद का प्रमुख केंद्र अमेरिका आज भी शोषण, हस्तक्षेप और आक्रामक नीतियों पर अडिग है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका ने विश्व पूँजीवाद के शोषण को नव-औपनिवेशवाद के रूप में नया आयाम दिया है — बिना प्रत्यक्ष कब्जे के आर्थिक नियंत्रण और शोषण।

        द्वितीय विश्व युद्धोत्तर राष्ट्रीय मुक्ति संग्रामों ने कई देशों को राजनीतिक स्वाधीनता दिलाई, किंतु अधिकांश मामलों में आर्थिक जुए से मुक्ति नहीं हो सकी। अमेरिका के नेतृत्व में साम्राज्यवादी शक्तियाँ विश्व अर्थव्यवस्था को नियंत्रित कर पूँजीवादी लूट को जारी रखे हुए हैं। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल (2025 से) में यह साम्राज्यवाद फिर से प्रत्यक्ष सैन्य-औपनिवेशिक आक्रामकता की ओर मुड़ रहा है। कनाडा को 51वाँ प्रांत बनाने, ग्रीनलैंड और पनामा नहर पर नियंत्रण की धमकियाँ, मेक्सिको पर आक्रामक रुख तथा वेनेजुएला में जनवरी 2026 में चुने हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का सैन्य अभियान द्वारा अपहरण और अमेरिकी हिरासत — ये घटनाएँ अमेरिकी विस्तारवादी महत्वाकांक्षा को स्पष्ट रूप से उजागर करती हैं।

        अब इसका प्रमुख लक्ष्य समाजवादी क्यूबा है। अमेरिकी तट से मात्र 90 किलोमीटर दूर स्थित यह द्वीप राष्ट्र पिछले सात दशकों से साम्राज्यवादी शोषण के विरुद्ध समानता, सामाजिक न्याय और जन-केंद्रित विकास का वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। अमेरिका इसे कभी स्वीकार नहीं कर सका। इसलिए क्यूबा अपनी क्रांति के बाद से ही अमेरिकी आर्थिक नाकेबंदी का शिकार रहा है।

        ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में क्यूबा पर तेल नाकेबंदी (fuel blockade) थोप दी। वेनेजुएला से तेल आयात पूरी तरह बंद कर दिया गया (मादुरो की गिरफ्तारी के बाद) और अन्य देशों को तेल निर्यात करने पर प्रतिबंधों एवं टैरिफ की धमकियाँ दी गईं। परिणामस्वरूप क्यूबा में गंभीर ईंधन संकट उत्पन्न हो गया है। मई 2026 में ऊर्जा मंत्री Vicente de la O Levy ने स्वीकार किया कि देश में डीजल और फ्यूल ऑयल के भंडार पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। इससे 20 घंटे या उससे अधिक समय तक बिजली कटौती हो रही है, अस्पताल, कारखाने और दैनिक जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हैं।

        इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने क्यूबा के आसपास निगरानी गतिविधियाँ बढ़ा दी हैं। मई 2026 में USS Nimitz विमानवाहक पोत और उसका स्ट्राइक ग्रुप कॅरिबियन क्षेत्र में तैनात किया गया है, जो दबाव बढ़ाने का स्पष्ट संकेत है।

        20 मई 2026 को ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा के क्रांतिकारी नेता राउल कास्त्रो (94 वर्षीय) पर 1996 की घटना (Brothers to the Rescue विमानों की घटना) में हत्या और साजिश के आरोप में अभियोग चलाया तथा गिरफ्तारी वारंट जारी किया। यह कदम क्यूबा के नेतृत्व को तोड़ने और आंतरिक अस्थिरता पैदा करने की साजिश का हिस्सा है।

विशिष्ट नेताओं और संगठनों की प्रतिक्रियाएँ :

-     भारतीय वामपंथी पार्टियाँ: सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई(एमएल) लिबरेशन, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी धमकियों की निंदा की। उन्होंने इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया और भारत सरकार से क्यूबा के साथ एकजुटता व्यक्त करने की माँग की।

    - चीन: चीनी सरकार ने राउल कास्त्रो पर आरोप लगाए जाने के बाद अमेरिका को चेतावनी दी कि वह क्यूबा को “धमकाना” बंद करे। चीन ने इसे “बाहरी हस्तक्षेप” करार दिया।

    - रूस: रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाइयों की निंदा की और क्यूबा के साथ एकजुटता व्यक्त की। (वेनेजुएला संदर्भ में भी रूस ने “बाहरी आक्रमण” की आलोचना की थी।)

    - वेनेजुएला: मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अंतरिम सरकार और समर्थकों ने अमेरिकी कार्रवाई को “अपहरण” बताया। क्यूबा संकट पर भी वेनेजुएला ने अमेरिका की निंदा की।

    - निकारागुआ: निकारागुआ सरकार ने अमेरिकी नीति को “साम्राज्यवादी आक्रामकता” बताया और क्यूबा के साथ पूर्ण एकजुटता जताई।

दुनिया के प्रमुख अखबारों की टिप्पणियाँ:

    - न्यूयॉर्क टाइम्स: ट्रंप की नीति को “क्यूबा पर दबाव बढ़ाने वाली” बताया। संपादकीयों में इसे मानवीय संकट पैदा करने वाली और घरेलू नाकामियों से ध्यान भटकाने की रणनीति माना।

    - द गार्जियन: अमेरिकी तेल नाकेबंदी को “मानवीय संकट” का कारण बताया और इसे “अस्थिरता फैलाने वाली” नीति करार दिया।

    - अल जज़ीरा: ट्रंप प्रशासन द्वारा राउल कास्त्रो पर आरोप को “तनाव में तेजी लाने वाला” बताया। इसमें इसे “रेजिम चेंज” की कोशिश के रूप में देखा गया।

अमेरिका में प्रतिक्रिया

        मई 2026 में ट्रंप की अनुमोदन दर औसतन 37-40% के आसपास है, जबकि अस्वीकृति दर 58-63% है। एपस्टीन फाइल्स और घरेलू आर्थिक मुद्दों ने उनकी स्थिति को कमजोर किया है।

ट्रंप अपनी असफलताओं और एपस्टीन फाइल्स से ध्यान भटका रहे हैं?

        जनवरी 2026 में एपस्टीन फाइल्स के बड़े हिस्से सार्वजनिक किए गए, जिनमें ट्रंप का नाम भी शामिल था। घरेलू विरोध और नाकामियों के बीच ट्रंप प्रशासन बाहरी आक्रामकता के माध्यम से राष्ट्रवादी उन्माद फैलाकर अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रहा है। यह साम्राज्यवादी रणनीति का क्लासिक उदाहरण है।

        क्यूबा की जनता और उसका समाजवादी मॉडल साम्राज्यवाद के विरुद्ध अटूट प्रतिरोध का प्रतीक है। 20-22 घंटे बिजली कटौती झेलते हुए भी क्यूबा ने सिर नहीं झुकाया। विश्व के सभी प्रगतिशील, शोषित और न्यायप्रिय शक्तियाँ क्यूबा के साथ खड़ी हैं।

        ट्रंप की यह आक्रामकता अंततः असफल होगी। साम्राज्यवाद का पतन अपरिहार्य है। क्यूबा विजयी होगा! साम्राज्यवाद पराजित होगा!

        हम अमेरिकी साम्राज्यवाद की इस क्रूर नाकेबंदी, सैन्य धमकियों और मानवता-विरोधी कार्रवाइयों की घोर निंदा करते हैं।

.

.

सूत्र: गणशक्ति (संपादकीय) 24.05.2026