फलता विधानसभा चुनाव पुनर्मतदान :

बूथ-वाइज़ चुनावी रिपोर्ट और उसके निहितार्थ

फलता विधानसभा के पुनर्मतदान के नतीजे अभूतपूर्व हैं, जो राज्य की चुनावी लड़ाई को एक नया मोड़ दे रहे हैं। कुल 285 बूथों का गणित इस प्रकार है:

| श्रेणी                                     | बूथों की संख्या   | राजनीतिक निहितार्थ                                                             |

| सीपीआई(एम) की बढ़त/जीत    | 58 बूथ               | वामपंथ का जमीनी स्तर पर मजबूत पुनरुत्थान।                           |

| भाजपा की बढ़त                     | 226 बूथ             | दक्षिणपंथी ध्रुवीकरण अभी भी कई हिस्सों में मजबूत।                     |

| टाई (बराबरी)                          | 01 बूथ               | सीपीआई(एम) और भाजपा के बीच सीधी और कांटे की टक्कर।      |

| तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीत | 00 बूथ               | सत्ताधारी दल का पूरी तरह से सफाया।                                        |

"यह केवल चुनावी अंकगणित नहीं है, बल्कि फासीवाद और कॉरपोरेट-परस्त ताकतों के खिलाफ जनता के वर्ग-चेतना (Class Consciousness) की जागृति है।"

इस परिणाम को निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

1. सत्ता विरोधी लहर और TMC के पतन का सच

तृणमूल कांग्रेस (TMC) का एक भी बूथ न जीत पाना यह साबित करता है कि जनता अब उनके भ्रष्टाचार, आतंक और जनविरोधी नीतियों से पूरी तरह त्रस्त हो चुकी है। TMC जैसी क्षेत्रीय पूंजीवादी पार्टियां लंबे समय तक जनता को झूठे वादों और डराने-धमकाने की राजनीति से बेवकूफ नहीं बना सकतीं। फलता की जनता ने 'चोरी और सीनाजोरी' की राजनीति को सिरे से खारिज कर दिया है।

2. भाजपा के विकल्प के रूप में वामपंथ का उभार

अब तक दक्षिणपंथी ताकतों (BJP) द्वारा यह नैरेटिव बनाया जा रहा था कि वामपंथ अप्रासंगिक हो चुका है और भाजपा ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन 58 बूथों पर स्पष्ट जीत और 1 बूथ पर बराबरी ने इस भ्रम को तोड़ दिया है।

* यह साफ है कि जहां भी जनता को एक मजबूत, ईमानदार और मेहनतकशों की आवाज उठाने वाला वामपंथी विकल्प मिला, उन्होंने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को नकार कर लाल झंडे पर भरोसा जताया।

3. "आगामी लड़ाई का नया व्याकरण"

'नया व्याकरण लिखना शुरू हो गया है।' इस नए व्याकरण के मायने हैं:

* द्विध्रुवीय संघर्ष का अंत: लड़ाई अब केवल TMC बनाम BJP की नहीं रही।

* मुद्दों की वापसी: अब राजनीति पहचान, धर्म या जाति के नाम पर नहीं, बल्कि रोजी-रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और लोकतांत्रिक अधिकारों के आधार पर होगी। 58 बूथों पर मिली यह जीत इस बात का प्रतीक है कि जनता ने विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ वर्ग-एकता (Working Class Unity) को चुना है।

4. एक बूथ पर बराबरी: कड़े संघर्ष का प्रतीक

1 बूथ पर सीपीआई(एम) और भाजपा के वोट बराबर होना यह दिखाता है कि जमीन पर वैचारिक संघर्ष कितना तीव्र है। यह वामपंथी कार्यकर्ताओं के लिए एक संदेश है कि फासीवादी ताकतों को हराने के लिए अभी और सघन जन-संपर्क तथा वैचारिक धार को तेज करने की जरूरत है।

फलता के यह नतीजे केवल एक क्षेत्र के परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह आने वाले समय में पूरे राज्य और देश की राजनीति के लिए एक 'वेक-अप कॉल' (चेतावनी और उम्मीद) हैं। कॉरपोरेट और सांप्रदायिक ताकतों के गठजोड़ के खिलाफ जनता का यह प्रतिरोध आने वाले दिनों में और तेज होगा। लाल झंडे की यह वापसी बताती है कि जनता के अधिकारों की असली लड़ाई केवल वामपंथ ही लड़ सकता है।

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फलता में भाजपा की जीत, दूसरे स्थान पर माकपा; हाशिए के लोगों की लड़ाई पर सलीम का ज़ोर

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स्रोत: डॉ. अशोक सिंह