नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। 

"छात्रों का भरोसा टूटना" सरकार की बड़ी असफलता है। 

-केशव भट्टड़

नीट (NEET) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में पेपर लीक होना करोड़ों छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर एक गंभीर प्रहार है। वर्तमान में सीबीआई (CBI) इस मामले की तकनीकी और आपराधिक पहलुओं से जांच कर रही है। अब तक की जांच में पीवी कुलकर्णी (प्रोफेसर और पूर्व NTA अधिकारी) और मनीषा वाघमारे जैसे नामों का खुलासा हुआ है। अभी तक कुल सात लोगों की गिरफ़्तारी की सूचना है। जांच जारी है, और अंतिम चार्जशीट ही तय करेगी कि पर्दे के पीछे कौन से प्रभावशाली लोग शामिल थे। SFI ने प्रश्न पत्र लीक के विरोध में देशव्यापी आंदोलन के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेश प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई है। 

सरकार और शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी

लोकतंत्र में किसी भी राष्ट्रीय स्तर की विफलता के लिए जवाबदेही (Accountability) सर्वोपरि है। सरकार नीतिगत, नैतिक और निगरानी के मोर्चे पर बुरी तरह विफल रही है। 

    • नीतिगत जिम्मेदारी: शिक्षा मंत्रालय का काम केवल परीक्षा की तारीख तय करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि NTA जैसी संस्थाएं पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी हों।
    • नैतिक जिम्मेदारी: यदि सिस्टम में सेंध लगती है, तो शिक्षा मंत्री की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इसकी खामियों को स्वीकार करें और सुधार के सख्त कदम उठाएं। 
    • निगरानी: NTA एक स्वायत्त (Autonomous) संस्था है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली की समय-समय पर ऑडिट और निगरानी सुनिश्चित करना मंत्रालय का दायित्व है।

प्रश्न पत्र सुरक्षा का प्रोटोकॉल

प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर छात्रों तक पहुँचने तक एक जटिल और सुरक्षित प्रक्रिया होती है ,जो इस मामले में विफल रही:

  1. पेपर सेटिंग: विशेषज्ञों का चयन गोपनीय होता है। प्रश्न पत्र के कई सेट तैयार किए जाते हैं।
  2. गोपनीय प्रिंटिंग: पेपर अज्ञात और उच्च-सुरक्षा वाले प्रेस में छापे जाते हैं।
  3. लॉजिस्टिक्स: पेपर को 'जीपीएस-ट्रैक्ड' बक्सों में रखा जाता है। इन्हें बैंकों के 'स्ट्रांग रूम' में पुलिस सुरक्षा के बीच रखा जाता है।
  4. डिलीवरी: परीक्षा के दिन ही कुछ घंटे पहले इन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।

तो चूक कहाँ हुई? 

अभी तक की जांच से सामने आया है कि इस मामले में आरोपी खुद NTA का पूर्व अधिकारी था।  अपनी पहुँच से उसने इस सुरक्षा चक्र (Security Loop) की कमियों का फायदा उठाया।

केन्द्रीय सरकार कैसे दोषी है?

यह सिस्टम की विफलता है जिसके लिए केन्द्रीय सरकार सीधे जिम्मेदार है। जांच से संलिप्तता का और उसके स्तर का पता चलेगा। लेकिन सरकार के यह दोष स्पष्ट हैं :

    • प्रशासनिक विफलता: यदि कोई व्यक्ति सिस्टम के अंदर रहकर (Inside Job) पेपर लीक कर रहा है, तो इसका मतलब है कि सरकार के चयन और निगरानी की प्रक्रिया (Vetting Process) कमजोर है।
    • चेतावनी की अनदेखी: अक्सर पेपर लीक से पहले कई बार गड़बड़ियों की शिकायतें आती हैं। सरकार ने उन पर ध्यान नहीं दिया तभी प्रश्न पत्र लीक हुआ। अपराधियों की निडरता बताती है कि उन्हे सरकार के तंत्र का लेशमात्र भी भय नहीं था। 
    • NTA की संरचना: NTA जैसी संस्था के पास अपनी स्थायी जांच इकाई या डेटा सुरक्षा का अभाव होना, सरकार की दूरदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
    • आउटसोर्सिंग की समस्या: कई बार परीक्षा केंद्रों या लॉजिस्टिक्स का निजीकरण (Outsourcing) भ्रष्टाचार का रास्ता खोल देता है, जिसकी जिम्मेदारी अंततः सरकार की होती है।

.

किसी भी बड़े घोटाले में अपराधी भले ही व्यक्ति हों, व्यक्तियों का समूह हो, लेकिन "छात्रों का भरोसा टूटना" सरकार की बड़ी असफलता है। सरकार केवल जांच तक सीमित न रहकर, पूरी चयन और सुरक्षा प्रक्रिया का 'रूट कैनाल ट्रीटमेंट' (जड़ से सफाई) करे। यह करना जरूरी है। पेपर लीक की यह घटना पहली बार नहीं है। इससे पहले भी प्रश्न पत्र लीक हुए हैं। सरकार को बताना चाहिए कि उसने समय समय पर क्या-क्या कदम उठाए ताकि लीक की घटनाएं ना हो। राष्ट्रीय स्तर की बड़ी परीक्षाओं में आ रहे व्यवधान साबित करते हैं कि सरकार ऐसी घटनाओं के प्रति गंभीर नहीं है। यह छात्रों के साथ तो धोखा है ही, देश के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। नीट पेपर का लीक होना सरकार के काम-काज की गंभीरता पर सीधा सवालिया निशान है। 

.

  1. संबंधित खबर :  प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?
  2. संबंधित खबर : नीट पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' निकला NTA का अधिकारी
  3. विश्लेषण : नीट महाघोटाला: क्या 'सस्ते' चरित्र और 'महंगे' पँचों की बलि चढ़ेगा देश का भविष्य? - केशव भट्टड़