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मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल, गाँव में दहशत। बलात्कारी नहीं, असली निशाना जैसे प्रदर्शनकारी ही हैं!

अपराजिता09 जुलाई 20265 मिनट पठन26 बार पढ़ा गया

"रात में अब बहुत से लोग घर पर नहीं रुकते। सुना है कि पुलिस ने शायद 200 लोगों की पहचान की है और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करेगी! इसी डर से कई लोग रात में घर पर नहीं रह रहे हैं। पता नहीं क्या से क्या हो गया!"

मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल, गाँव में दहशत।

बलात्कारी नहीं, असली निशाना जैसे प्रदर्शनकारी ही हैं!

अनिल कुण्डू ■ बारुईपुर

बारुईपुर के सूर्यपुर में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी का नाम कबीर मोल्ला है। उत्तर 24 परगना के बसीरहाट इलाके में राज्य पुलिस की एसटीएफ (STF), बारुईपुर एसओजी (SOG) और जिला पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे गिरफ्तार किया। इस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में अब तक 4 आरोपी पुलिस की हिरासत में आ चुके हैं। इनमें से एक मुख्य आरोपी, प्रभास मण्डल, मंगलवार रात पुलिस हिरासत में एक 'एनकाउंटर' में मारा गया।

पिछले रविवार को इलाके में ही उस नाबालिग का शव बेहद भयावह स्थिति में बरामद होने और पुलिस की शुरुआती लापरवाही के बाद, गुस्से में आकर सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए थे। न्याय की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ और रास्ता जाम कर दिया गया। उत्तेजित भीड़ के एक हिस्से ने पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की। पुलिस पर हमला हुआ, जिसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। हालांकि, बाद में ग्रामीणों ने खुद ही स्थिति को नियंत्रण में लिया। ऐसी संवेदनशील घटना में सड़कों पर उतरे आम लोगों को ही मुख्यमंत्री ने धमकी दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा था, "किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।"

मुख्यमंत्री की इस धमकी के बाद ही, मंगलवार पूरी रात और बुधवार को भी पुलिस ने इलाके में अंधाधुंध छापेमारी कर 23 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए लोग मुख्य रूप से शंकरपुर-2, धपधपी और सूर्यपुर इलाके के निवासी हैं। ये वो लोग हैं जो पिछले रविवार की सुबह से न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। उनके खिलाफ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिस के काम में बाधा डालने और तनाव बनाए रखने के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए हैं।

बारुईपुर की इस घटना में खुद मुख्यमंत्री सुभेदु अधिकारी की भूमिका पर भी जनता के बीच सवाल उठने लगे हैं। कई लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री जैसे विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों को ही बारुईपुर कांड का केंद्र बिंदु बनाना चाहते हैं! रविवार सुबह से बारुईपुर-जयनगर रोड जाम कर हजारों आम लोग जिस तरह प्रदर्शन में शामिल हुए थे, मुख्यमंत्री बार-बार उसी बात को सामने ला रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो बलात्कारी या आरोपी और पुलिस की शुरुआती निष्क्रियता अपराधी नहीं हैं, बल्कि गांव की नाबालिग के साथ हुए बलात्कार और हत्या के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग ही अपराधी हैं!

मंगलवार को बारुईपुर में एसपी (SP) कार्यालय में धमकी भरे लहजे में सुभेंदु अधिकारी ने कहा, "वीडियो देखकर 200 लोगों की पहचान की गई है। उनमें से किसी को नहीं छोड़ा जाएगा। मैंने पुलिस को निर्देश दिया है कि जिन्होंने तांडव मचाया है, उनमें से किसी को भी बख्शा न जाए।" ग्रामीणों के इस स्वतःस्फूर्त विरोध प्रदर्शन में राजनीतिक उकसावे का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, "पीछे से जिन लोगों ने उकसाया है, उन्हें भी नहीं छोड़ा जाएगा। जो लोग चुनाव में खारिज हो चुके हैं, जो शून्य से एक हुए हैं, जो चुनाव हारे हैं, उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा। जिन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया पर सस्ते व्यूज बढ़ाने के लिए उकसाया है, पुलिस को उन सभी को चिन्हित करने के लिए कहा गया है। मैंने डीजीपी को उनके फोन कॉल रिकॉर्ड की जांच करने के लिए कहा है।"

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद स्वाभाविक रूप से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और दहशत फैल गई है। पिछले दो दिनों से महिला, पुरुष और धर्म की परवाह किए बिना जो ग्रामीण सड़कों पर थे, पीड़िता के घर के पास और सूर्यपुर हाट इलाके में प्रदर्शन कर रहे थे और न्याय की मांग कर रहे थे, उनमें से कई ग्रामीण पुलिस की कार्रवाई के डर से अब इलाका छोड़कर भाग गए हैं।

बुधवार दोपहर को सूर्यपुर जाकर देखा गया कि सड़कें पूरी तरह सुनसान हैं। कई दुकानें भी बंद हैं। सामान्य जनजीवन काफी हद तक थम गया है। पीड़िता के घर के सामने भी केवल पुलिस और मीडिया कर्मियों की भीड़ दिखाई दे रही है। इलाके की ही एक गृहणी ने डरते हुए बताया, "रात में अब बहुत से लोग घर पर नहीं रुकते। सुना है कि पुलिस ने शायद 200 लोगों की पहचान की है और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करेगी! इसी डर से कई लोग रात में घर पर नहीं रह रहे हैं। पता नहीं क्या से क्या हो गया!"

आरोप है कि चुन-चुनकर विपक्षी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को गैर-जमानती धाराओं के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। इस बीच, एक भाजपा कार्यकर्ता के जरिए माकपा केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजन चक्रवर्ती, बारुईपुर पश्चिम विधानसभा से माकपा के उम्मीदवार लाहेक अली, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य सचिव मोनालिसा सिन्हा और स्थानीय पार्टी नेता सैफुद्दीन खान सहित कई माकपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।

यह भी पढ़ें : पश्चिम बंगाल में 'एनकाउंटर राज' की आहट ? बारूईपुर में गैर-न्यायिक कार्रवाई आरोपों के घेरे में। जाँच के बीच में ही मुख्य आरोपी ढेर, एनकाउंटर को लेकर पुलिस पर उठ रहे गंभीर सवाल।

साभार: गणशक्ति

अपलोडर: VKA-43UUB7

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'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़13 अप्रैल 2026