पिछले 15 वर्षों में बंगाल के लोगों ने चोरी, गुंडाराज, हत्या-बलात्कार, भाई-भतीजावाद, धमकी, पुलिस केस, सबूत मिटाना, पाला बदलना, उत्सव-मेला, गिरफ्तारी-जमानत और शाम की रंगीन महफिलों के किस्से बहुत देखे हैं। दो समुदायों के बीच फैलाए गए जहरीले सांप्रदायिक विद्वेष को तो इससे भी कहीं अधिक देखा है। 'अवैध घुसपैठियों' और 'रोहिंग्या' संक्रमण को लेकर लोगों ने बहुत सिर खपाया है। 'परिवर्तन' के बाद 'अच्छे दिन' से लेकर 'विकास' तक सब देख लिया है। 'जय श्री राम' और 'जय बांग्ला' के नारे भी बहुत सुन लिए हैं। अब बात हो नौकरी, कारखानों और फसलों के उचित दाम की; स्कूल-कॉलेज-अस्पतालों की उन्नति, बढ़ती महंगाई के बोझ, बढ़ी हुई मजदूरी की मांग, अन्यायपूर्ण छंटनी के खिलाफ विरोध और राज्य में नए निवेश की। हर क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं - सड़कों, सार्वजनिक परिवहन, सीवरेज, पुल और शुद्ध पेयजल पर बात हो। इसलिए हमारी मांग है: 'छब्बीस के विधानसभा के सभी वोट - धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक वाम मोर्चा'। (प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक कमलेश्वर मुखर्जी)