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हमारी मांग है: 'छब्बीस के विधानसभा के सभी वोट - धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक वाम मोर्चा':- कमलेश्वर मुखर्जी
सारांश
हमारी मांग है: 'छब्बीस के विधानसभा के सभी वोट - धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक वाम मोर्चा':- कमलेश्वर मुखर्जी
अपलोडर: डॉ. अशोक सिंह• प्रकाशित: 11 अप्रैल 2026 • 1 मिनट पठन
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सिनेमा
पिताजी (सलिल चौधरी) ने पद्मश्री ठुकरा दिया था - अंतरा चौधरी
पिता जी एक मशहूर संगीतकार हैं, यह समझने में मुझे वक्त लगा था। क्योंकि घर पर तो वह एक अलग ही इंसान थे। सिनेमाघरों में 'रजनीगंधा' या 'छोटी सी बात' जैसी फिल्में देखने जाने पर जब संगीत निर्देशक के रूप में परदे पर पिता जी का नाम उभरता, तब देखकर समझ आता कि मेरे पिता जी एक मशहूर व्यक्ति हैं। घर पर मेहमानों का आना-जाना देखकर भी मैं यह समझ पाती थी। घर पर रिहर्सल या महफिल में मन्ना काका (मन्ना डे), आशा दी (आशा भोंसले) आते थे। स्टूडियो जाकर देखा कि 'आज नय गुनगुन' की रिकॉर्डिंग में लता दी (लता मंगेशकर) आई हुई हैं। तब मुझे अहसास हुआ कि पिता जी कोई बड़ी हस्ती हैं।
केशव कुमार भट्टड़ • 21 मई 2026
सिनेमा
सेंस और सेंसर को चुनौती देती जियो स्टूडियो की प्रस्तुति धुरंधर । देशभक्ति और बलिदान के नाम पर यह नई पीढ़ी को क्रूरता और अंध राष्ट्रवाद की ओर धकेलती है।
केशव कुमार भट्टड़ • 10 अप्रैल 2026
सिनेमा
जन्मदिन पर श्रद्धांजलि - "सत्यजीत राय की फिल्मों में कामकाजी महिलाएँ: समाज परिवर्तन की सूचक - आरती, अदिति, कना" - पुनर्जित रायचौधरी
सत्यजीत राय की फिल्मों में कामकाजी महिलाओं का जिक्र होते ही 'महानगर' (1963) की माधवी मुखर्जी की छवि आँखों के सामने तैरने लगती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह फ़िल्म एक बहुत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है—लेकिन यह इकलौती फिल्म नहीं है। 'नायक' (1966), 'प्रतिद्वंद्वी' (1970) और 'जन-अरण्य' (1976) जैसी कई फिल्मों में कामकाजी महिलाओं के चरित्र चित्रण के माध्यम से, आजादी के बाद के भारत में नारी-श्रम और स्वतंत्रता पर सत्यजीत के शक्तिशाली नजरिए का महत्व और प्रासंगिकता बहुत अधिक है। इन पात्रों का उपयोग करके, सत्यजीत राय सीधे तौर पर बंगाली मध्यम वर्ग के सामाजिक और आर्थिक बदलाव को दिखाते हैं। वे यह भी बखूबी दर्शाते हैं कि कैसे बीसवीं सदी में महिलाओं का सार्वजनिक और पेशेवर दुनिया में प्रवेश पारंपरिक लिंग-भेद के नियमों को चुनौती देता है, पारिवारिक समीकरणों को बदलता है और पितृसत्तात्मक समाज के अंतर्विरोधों को उजागर करता है।
केशव कुमार भट्टड़ • 02 मई 2026
ब्लॉग
‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम
मोहम्मद सलीम • 25 अप्रैल 2026
