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सुप्रीम कोर्ट का आदेश भाजपा के “गाल पर करारा तमाचा” - मोहम्मद सलीम

श्रेया जायसवाल•17 अप्रैल 20263 मिनट पठन11 बार पढ़ा गया
नई दिल्ली/कोलकाता: उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में उन लाखों मतदाताओं के वोट का अधिकार को बहाल करने का निर्देश दिया है, जिन्हें 'विचाराधीन' सूची में डाल दिया गया था। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि ट्रिब्यूनल मतदान से दो दिन पहले भी किसी मतदाता को वैध घोषित करता है, तो निर्वाचन आयोग को उसकी पूरक सूची जारी कर उसे वोट देने का अधिकार देना होगा। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने इसे भाजपा के लिए "गाल पर करारा तमाचा" करार दिया है। उन्होंने भाजपा और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए- मोहम्मद सलीम ने प्रश्न उठाया कि तकनीकी कारणों से या राज्य सरकार और चुनाव आयोग की अक्षमता के कारण अगर किसी का नाम मतदाता सूची में नहीं रहा, तो क्या भाजपा उन लोगों की देशभक्ति या देशद्रोह का सर्टिफिकेट देगी? तकनीकी खामियों या आयोग की विफलता के कारण जिन लोगों के नाम कटे, भाजपा ने उन्हें 'देशद्रोही' कहकर अपमानित किया । देश के गृह मंत्री ने भी भड़काऊ बयान दिए हैं। उन्होंने मांग की कि इसके लिए भाजपा को माफी मांगनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश भाजपा के “गाल पर करारा तमाचा” -  मोहम्मद सलीम

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लाखों मतदाताओं को राहत, पर प्रशासनिक चुनौतियाँ बरकरार

सुप्रीम कोर्ट का आदेश भाजपा के “गाल पर करारा तमाचा” -  मोहम्मद सलीम

नई दिल्ली/कोलकाता: उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में उन लाखों मतदाताओं के वोट का अधिकार को बहाल करने का निर्देश दिया है, जिन्हें 'विचाराधीन' सूची में डाल दिया गया था। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि ट्रिब्यूनल मतदान से दो दिन पहले भी किसी मतदाता को वैध घोषित करता है, तो निर्वाचन आयोग को उसकी पूरक सूची जारी कर उसे वोट देने का अधिकार देना होगा।

समय और संख्या का भारी दबाव

न्यायालय के निर्देशानुसार, पहले चरण के मतदान (23 अप्रैल) के लिए 21 अप्रैल तक और दूसरे चरण (29 अप्रैल) के लिए 27 अप्रैल तक ट्रिब्यूनल को सुनवाई पूरी करनी होगी। हालांकि, यह कार्य हिमालय जैसी चुनौती के समान है:

  • विशाल संख्या: केवल पश्चिम बंगाल के पहले चरण में ही लगभग 14.84 लाख मतदाता सूची से बाहर हैं।
  • सीमित संसाधन: मामलों के निपटारे के लिए केवल 19 पूर्व न्यायाधीशों का ट्रिब्यूनल बनाया गया है। आंकड़ों के हिसाब से एक न्यायाधीश को प्रतिदिन हजारों मामलों का फैसला करना होगा, जो व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव दिखता है।
  • प्रशासनिक चिंता: राज्य के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि इतने कम समय में लाखों आवेदनों का सत्यापन और नई सूची का प्रकाशन करना एक अत्यंत कठिन कार्य है।

मोहम्मद सलीम  का भाजपा और आयोग पर तीखा हमला

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम  ने इसे भाजपा के लिए "गाल पर करारा तमाचा" करार दिया है। उन्होंने भाजपा और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए:

  • देशद्रोह का ठप्पा: मोहम्मद सलीम  ने प्रश्न उठाया कि तकनीकी कारणों से या राज्य सरकार और चुनाव आयोग की अक्षमता के कारण अगर किसी का नाम मतदाता सूची में नहीं रहा, तो क्या भाजपा उन लोगों की देशभक्ति या देशद्रोह का सर्टिफिकेट देगी?
  • तकनीकी खामियों या आयोग की विफलता के कारण जिन लोगों के नाम कटे, भाजपा ने उन्हें 'देशद्रोही' कहकर अपमानित किया । देश के गृह मंत्री ने भी भड़काऊ बयान दिए हैं। उन्होंने मांग की कि इसके लिए भाजपा को माफी मांगनी चाहिए।
  • RSS पर आरोप: उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि आरएसएस के प्रभाव में आकर चुनाव आयोग ने योजनाबद्ध तरीके से आम नागरिकों को इस परेशानी में डाला है, जिसमें राज्य प्रशासन ने भी साथ दिया है।"
  • वामपंथ का वादा: मोहम्मद सलीम ने स्पष्ट किया कि  सत्ता में आने पर वामपंथी दल हर नागरिक के वोट का अधिकार  की सुरक्षा और भयमुक्त चुनावी माहौल सुनिश्चित करने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा की हक़ की लड़ाई लड़ कर हासिल की गयी है और पूरा न्याय मिलने तक यह जारी रहेगी । 

क्या है वर्तमान स्थिति?

फिलहाल कोलकाता के जोका स्थित जलशक्ति मंत्रालय के भवन में ट्रिब्यूनल ने काम शुरू कर दिया है। हजारों लोगों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से आवेदन किए हैं। जिलाधिकारियों पर इन आवेदनों को जल्द से जल्द अपलोड करने का भारी दबाव है।

निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप ने उन लोगों के मन में उम्मीद तो जगाई है जिनके नाम काट दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर समय की कमी और प्रशासनिक सुस्ती अभी भी लाखों लोगों के वोट का अधिकार  पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है।

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सुप्रीम कोर्ट का आदेश भाजपा के “गाल पर करारा तमाचा” - मोहम्मद सलीम

प्रकाशित: 17 अप्रैल 2026 • 3 मिनट पठन

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