वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | Tuesday, 13 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराज्य

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राज्य

"एकदम लाल झंडा देखकर मैं वोट देता हूँ! जहाँ लाल झंडा,मेरा वोट वहाँ": कमलेश्वर मुखोपाध्याय, (प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक)

श्रेया जायसवाल•19 अप्रैल 20264 मिनट पठन68 बार पढ़ा गया
प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक कमलेश्वर मुखर्जी का साक्षात्कार।
"एकदम लाल झंडा देखकर मैं वोट देता हूँ! जहाँ लाल झंडा,मेरा वोट वहाँ": कमलेश्वर मुखोपाध्याय, (प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक)
" एकदम लाल झंडा देखकर मैं वोट देता हूँ! जहाँ लाल झंडा,मेरा वोट वहाँ ": कमलेश्वर मुखोपाध्याय, (प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक)

1.मुख्यमंत्री के रूप में आप किसे देखना चाहते हैं?

कमलेश्वर मुखर्जी: एक वामपंथी होने के नाते मैं बस इतना कह सकता हूँ कि मेरी पार्टी जिसे भी चुनेगी या जो भी निर्णय लेगी, मैं उससे सहमत हूँ।

2.आप पार्टी देखकर वोट देते हैं या उम्मीदवार?

कमलेश्वर मुखर्जी: मैं रंग देखकर वोट देता हूँ। एकदम लाल झंडा देखकर वोट देता हूँ। जहाँ लाल झंडा है, मेरा वोट वहीं है।

3.उम्मीदवारों के चयन के लिए कोई परीक्षा हो तो कैसा रहेगा? और जीत के बाद अगर विधायकों का प्रशिक्षण हो तो?

कमलेश्वर मुखर्जी: पहली बात तो यह कि वामपंथी दलों में परीक्षा देते-देते ही कोई उम्मीदवार बनता है। यह देखा जाता है कि उम्मीदवार जन आंदोलनों से कितना जुड़ा हुआ है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि उनके लिए अलग से किसी परीक्षा की आवश्यकता है। रही बात अन्य दलों के उम्मीदवारों की, तो मेरी राय में उन्हें सक्रिय राजनीति में होना चाहिए या राजनीति के अभ्यास में होना चाहिए। उस लिहाज से मैं कहूँगा कि जनता को उनकी राजनीतिक चेतना देखकर ही वोट देना चाहिए। हालाँकि, अक्सर ऐसा होता नहीं है।

4.अगर आप खुद विधायक होते, तो क्या बदलना चाहते?

कमलेश्वर मुखर्जी: पहली बात, मैं विधायक नहीं बनना चाहता। सिर्फ विधायक ही क्यों, मैं किसी भी राजनीतिक पद पर नहीं रहना चाहता क्योंकि मुझे लगता है कि मुझमें वह योग्यता नहीं है। दूसरी बात, किसी भी विधायक के लिए केवल उसका क्षेत्र ही नहीं, बल्कि राज्य की समग्र उन्नति वांछनीय है। साथ ही, उन्हें ईमानदार, नीतिवान और नियमनिष्ठ होना चाहिए। और मैं फिर कहूँगा कि उन्हें एक राजनीतिक व्यक्तित्व होना चाहिए। उन्हें जनता के सुख-दुख में पास रहना चाहिए।

5.क्या आपके पेशा जगत में कोई शिकायत है कि चुनाव प्रचार में महत्व मिलना चाहिए?

कमलेश्वर मुखर्जी: एक सांस्कृतिक कार्यकता के रूप में मैं कहूँगा कि इस राज्य में संस्कृति का जो पतन हुआ है, उस संस्कृति में बदलाव की जरूरत है। सांस्कृतिक परिवेश को बदलना आवश्यक है। इस बारे में मुझे कोई संदेह नहीं है।

6.निर्वाचन प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त रखने के लिए क्या किया जा सकता है?

कमलेश्वर मुखर्जी: वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में हर कोई चाहता है कि शत-प्रतिशत भ्रष्टाचार मुक्त चुनाव हों। लेकिन इस बाजार व्यवस्था में यह कितना संभव है, इसे लेकर मुझे संदेह है। मैं व्यक्तिगत रूप से समाजवादी लोकतंत्र में विश्वास करता हूँ, बुर्जुआ लोकतंत्र में नहीं। इसी कारण मुझे संदेह है कि वर्तमान परिस्थितियों में शत-प्रतिशत भ्रष्टाचार मुक्त चुनाव प्रक्रिया संभव है भी या नहीं।

7.क्या बार-बार दल बदलने के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए?

कमलेश्वर मुखर्जी: निश्चित रूप से दलबदल के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि जब कोई किसी पार्टी के प्रतीक पर उम्मीदवार बनता है और फिर दूसरी पार्टी में चला जाता है, तो यह जनता के साथ विश्वासघात है। किसी भी उम्मीदवार को लोगों को ठगने का अधिकार लोकतंत्र में नहीं देना चाहिए।

8.क्या राजनीति में अपशब्दों का प्रयोग जरूरी है?

कमलेश्वर मुखर्जी: भले ही आप साहित्य की भाषा का उपयोग न करें, लेकिन भाषा की शालीनता का ध्यान अवश्य रखा जाना चाहिए।

9.स्वदेशी संस्कृति, विकास या समान अधिकार— चुनाव प्रचार में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?

कमलेश्वर मुखर्जी: समान अधिकार  सबसे पहले आता है। यही हमारे संविधान का मूल वक्तव्य भी है। मैंने हमेशा इसी का समर्थन किया है।

10.क्या 'भत्ता' की राजनीति समाज की उन्नति करती है?

कमलेश्वर मुखर्जी: अल्पकालिक भत्ता शायद अस्थायी रूप से कुछ लोगों की मदद कर सकता है, विशेषकर गरीब वर्ग के लोगों की। लेकिन लंबी अवधि में भत्ता समाधान नहीं है। उस स्थिति में सबसे पहले रोजगार की आवश्यकता है। मेरी राय में, भत्ता कभी भी नौकरी का विकल्प नहीं हो सकता।

11.क्या लगभग विपक्ष-विहीन राजनीति स्वस्थ है?

कमलेश्वर मुखर्जी: लोकतंत्र में राजनीति कभी भी विपक्ष-विहीन नहीं होनी चाहिए। इसलिए यह राजनीति के लिए एक 'स्वस्थ' व्यवस्था नहीं है। हमेशा द्विपक्षीय या त्रिपक्षीय मतों  की आवश्यकता होती है।

12.क्या 'सितारे' वोट खींचने का शॉर्टकट हैं?

कमलेश्वर मुखर्जी: मैं फिर कहूँगा कि लोकप्रिय चेहरों का भी राजनीति से जुड़ा होना अनिवार्य है। नहीं तो यह जनता के साथ धोखा होगा।

13.आपका पसंदीदा राजनीतिज्ञ कौन है?

कमलेश्वर मुखर्जी: सर्वकालिक पसंदीदा राजनीतिज्ञ लेनिन हैं। और अगर इस पीढ़ी की बात करूँ, तो मीनाक्षी मुखोपाध्याय।

साभार: आनंद बाजार पत्रिका

18/4/26

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

"एकदम लाल झंडा देखकर मैं वोट देता हूँ! जहाँ लाल झंडा,मेरा वोट वहाँ": कमलेश्वर मुखोपाध्याय, (प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक)

प्रकाशित: 19 अप्रैल 2026 • 4 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

361 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
राज्य

मुखौटा हट गया है, अब लड़ाई असली चेहरे से है - मोहम्मद सलीम

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

17 जून 2026

राज्य

हिंदू-मुस्लिम सभी बुलडोजर के शिकार होंगे: मोहम्मद सलीम

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

17 जून 2026

राज्य

बुलडोजर नीति के खिलाफ भी लड़ेंगे वामपंथी: मोहम्मद सलीम

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव

14 जून 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

राज्य

राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement