जन समाचार मंच


दक्षिण चौबीस परगना में पूरा दिन प्रचार
बंगाल की शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण, भाईचारा, कृषि और व्यापार-वाणिज्य समेत स्कूल-कॉलेजों को बचाना होगा।
इस बंगाल को सजाने के लिए वामपंथ का उदय जरूरी है। कोई 'छप्पन इंच' नवान्न से चोरों को खींचकर बाहर नहीं निकालेगा। जनता ही एकजुट होकर यह काम करेगी। बंगाल में नई शक्ति के साथ कालवैसाखी की तरह 'लाल आंधी' उठी है।
CPI(M) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने बुधवार को बारुईपुर में यह बातें कहीं। बुधवार शाम को बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई (एम) के उम्मीदवार स्वपन नस्कर और बारुईपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई (एम) के उम्मीदवार लाहेक अली के समर्थन में अमृतलाल कॉलेज मैदान में आयोजित एक जनसभा को मोहम्मद सलीम ने संबोधित किया।
मोहम्मद सलीम के अलावा जनसभा को सीपीआई (एम) की केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजन चक्रवर्ती, दक्षिण 24 परगना जिला सचिव रतन बागची, राहुल घोष, आलोक भट्टाचार्य, दोनों उम्मीदवार स्वपन नस्कर और लाहेक अली, तथा आईएसएफ के अनिर्वाण तलापात्रा ने भी संबोधित किया। सभा का संचालन अशोक भट्टाचार्य ने किया।
उसी दिन सुबह, मोहम्मद सलीम ने महेशतला विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई (एम) के उम्मीदवार सायन बनर्जी के समर्थन में एक रोड-शो किया। आकरा स्कूल मोड़ से नुंगी स्टेशन तक चले इस कार्यक्रम में सीपीआई (एम) की केंद्रीय कमेटी के सदस्य शमीक लाहिड़ी, रतन बागची, शत्रुघ्न घोष, प्रभात चौधरी और अन्य नेता शामिल हुए।
दोपहर में, उन्होंने मगराहाट पूर्व विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई (एम)के उम्मीदवार चंदन साहा के समर्थन में आयोजित एक और रोड-शो में हिस्सा लिया।
चाकदाहाट से हरिशंकरपुर स्कूल मैदान तक निकले इस रोड-शो में उनके साथ सीपीआई (एम) की केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजन चक्रवर्ती, राहुल घोष और अन्य नेता भी उपस्थित थे।
जादवपुर विधानसभा क्षेत्र से सीपीआई (एम) के उम्मीदवार विकासरंजन भट्टाचार्य और कसबा क्षेत्र से सीपीआई (एम) की उम्मीदवार दीपू दास के समर्थन में हाल्तू नंदी बागान मैदान में एक जनसभा आयोजित की गई। इस सभा में दोनों उम्मीदवारों के अलावा सीपीआई (एम) की केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजन चक्रवर्ती, शमीक लाहिड़ी, सृजन भट्टाचार्य, अपर्णा बनर्जी, आरएसपी के देवाशीष मुखर्जी और सीपीआई (एमएल) के तमाल चक्रवर्ती ने भी अपने विचार रखे। सभा की अध्यक्षता पार्टी नेता अशेस विश्वास ने की।
जनसभाओं को संबोधित करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि तृणमूल-कांग्रेस और भाजपा लोकतंत्र को ध्वंस कर रही हैं। वे एसआईआर के नाम पर लोगों के वोट देने के अधिकार को छीन रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा ने ही 18 वर्ष की आयु में वोट का अधिकार दिया था, जिसे बाद में पूरे देश में लागू किया गया और अब भाजपा और तृणमूल-कांग्रेस वोटों की चोरी कर रहे हैं। वाममोर्चा सरकार के समय वोट काटने का साहस चुनाव आयोग के पास नहीं था।
जनता से अपने बच्चों के भविष्य और परिवार की भलाई के लिए तृणमूल-कांग्रेस और भाजपा को हराकर वामपंथी उम्मीदवारों को विजयी बनाने का आह्वान रतन बागची ने किया।
अपलोडर: श्रेया जायसवाल
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अपलोडर: श्रेया जायसवाल • प्रकाशित: 23 अप्रैल 2026 • 3 मिनट पठन

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव
14 जून 2026

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।
श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026
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