वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | Tuesday, 13 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराज्य

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राज्य

दिन बदलने के सपने के साथ वोट देने की कतार में प्रवासी श्रमिक

श्रेया जायसवाल•23 अप्रैल 20263 मिनट पठन27 बार पढ़ा गया
जब तक राज्य में सरकार नहीं बदलेगी, हमारी घर वापसी नहीं होगी। इसलिए हम चाहते हैं कि केरल की तरह यहाँ भी फिर से 'लाल' लौटे।"
दिन बदलने के सपने के साथ वोट देने की कतार में प्रवासी श्रमिक

दिन बदलने के सपने के साथ वोट देने की कतार में प्रवासी श्रमिक

शीतलकुची

दिन बदलने का सपना लिए शीतलकुची विधानसभा क्षेत्र के 5/126 बूथ, नगर गोपालगंज एपी स्कूल की चुनावी लाइन में खड़े ये लोग कोई केरल से आए हैं, तो कोई सूरत और गांधीनगर से; कोई बिहार से लौटा है तो कोई बेंगलुरु से। असल में ये सभी प्रवासी श्रमिक हैं। अपनी इच्छा से कोई गाँव छोड़कर नहीं गया। गाँव में रोजगार नहीं है इसलिए मजबूर होकर गाँव छोड़ना पड़ा। पेट की भूख मिटाने के लिए वे अब दूसरे राज्यों में दिन-रात मेहनत करते हैं।

केरल के कन्नूर में काम करने वाले अखिल विश्वास ने वोट की लाइन में खड़े होकर चौंकाने वाली जानकारी दी। उन्होंने कहा, "हमारे बूथ में 1267 मतदाता हैं। आप लिख लीजिए, इनमें से कम से कम 700 प्रवासी श्रमिक हैं। सिर्फ केरल के अलग-अलग जिलों में ही गाँव के 250 से ज्यादा नौजवान फैले हुए हैं।" गाँव के ही गणेश विश्वास खुद एक प्रवासी श्रमिक हैं और काम की तलाश में भटकने वाले युवाओं को केरल की कंपनियों में काम दिलाते हैं। सब उन्हें 'ठेकेदार' कहकर पुकारते हैं। उन्होंने बताया, "20 साल पहले तक मैंने नहीं सुना था कि कोई काम के लिए गाँव से बाहर जाता था। लेकिन गाँव में काम न होने के कारण पिछले 10 वर्षों में पलायन बढ़ा है। कई कॉलेज पास शिक्षित युवा भी अब कंस्ट्रक्शन के काम में लगे हैं—कोई मजदूर है तो कोई मिस्त्री।"भीषण गर्मी में लंबी लाइन लगी है और मतदान बहुत धीमी गति से चल रहा है, फिर भी वे इंतजार कर रहे हैं। सब वोट देकर ही घर लौटेंगे।

वोट की लाइन में खड़े केरल के पालाघाट में राजमिस्त्री का काम करने वाले हाराधन विश्वास और अधीर सरकार ने कहा, "केरल की हवा खाकर आए हैं, इस बार सब बदल देंगे।" उनका इशारा साफ था। लाइन में खड़े अन्य लोग उनकी बात सुनकर मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे।पास में खड़े मुंबई में काम करने वाले लक्ष्मण दास ने कहा , "मैं मुंबई में भले ही काम करता हूँ, लेकिन हूँ मैं केरल वाली टीम में ही, यह मत भूलिएगा।" कन्नूर में काम करने वाले विश्वजीत सरकार कहते हैं, "यकीन मानिए, अब बाहर काम करने का मन नहीं करता। फिर भी वोट खत्म होते ही वापस लौटना होगा। हमें वोट देने के लिए कोई छुट्टी नहीं मिलती, काम पर न जाने का मतलब है दिहाड़ी का नुकसान। हमने यह समझ लिया है कि जब तक राज्य में सरकार नहीं बदलेगी, हमारी घर वापसी नहीं होगी। इसलिए हम चाहते हैं कि केरल की तरह यहाँ भी फिर से 'लाल' लौटे।"

वोटों की यह लंबी कतार धीरे-धीरे बूथ की ओर बढ़ रही है। प्रवासी श्रमिक ईवीएम का बटन दबाएंगे—सिर्फ इस उम्मीद में कि उन्हें अपने घर में काम मिले। उन्होंने अपने 'दोस्तों' को पहचान लिया है।

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

दिन बदलने के सपने के साथ वोट देने की कतार में प्रवासी श्रमिक

प्रकाशित: 23 अप्रैल 2026 • 3 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

361 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
राज्य

मुखौटा हट गया है, अब लड़ाई असली चेहरे से है - मोहम्मद सलीम

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

17 जून 2026

राज्य

हिंदू-मुस्लिम सभी बुलडोजर के शिकार होंगे: मोहम्मद सलीम

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

17 जून 2026

राज्य

बुलडोजर नीति के खिलाफ भी लड़ेंगे वामपंथी: मोहम्मद सलीम

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव

14 जून 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

राज्य

राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement