जन समाचार मंच


"तृणमूल कांग्रेस ने डोमकल (मुर्शिदाबाद)के लोगों को वोट का अधिकार का प्रयोग करने से रोकने की कोशिश की थी। लेकिन लोगों ने उन्हें रोक दिया और समूह बनाकर बूथ पर जाकर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।" पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोमकल के सीपीआई(एम) के उम्मीदवार मोस्तफिजुर रहमान (राना) ने यह बात कही।
कल रात से ही डोमकल का रायपुर गांव अशांत हो उठा। आरोप है कि तृणमूल की उन्मत्त वाहिनी ने सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं पर हमला किया। डोमकल से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व आईपीएस हुमायूँ कबीर के उकसावे पर ही रायपुर गांव में यह हमला हुआ। हमले में गंभीर रूप से घायल सीपीआई(एम) कार्यकर्ता रकीबुल अंसारी को मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर किया गया है। रकीबुल और उनके पिता महबुल अंसारी दोनों ही सीपीआई(एम) कार्यकर्ता हैं। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की ओर से कहा जा रहा है कि उनके भी दो कार्यकर्ता घायल हुए हैं।
आज सुबह भी उस गाँव के मतदाताओं को तृणमूल कांग्रेस की वाहिनी ने डराने-धमकाने की कोशिश की। लेकिन उस वाहिनी की परवाह न करते हुए, पूरा गाँव एक साथ समूह बनाकर मतदान केंद्र पर वोट देने पहुँचा।
सीपीआई(एम) के उम्मीदवार ने कहा, "तृणमूल -कांग्रेस कुछ जगहों पर अशांति फैलाना चाहती थी, लेकिन जनता ने उसका प्रतिरोध किया है। चुनाव आयोग पहले सुस्त था, मगर जनता के दबाव में आयोग को सख्त होने पर मजबूर होना पड़ा। डोमकल की जनता सड़कों पर उतरकर तृणमूल की गुंडा वाहिनी का मुकाबला कर रही है। यह लड़ाई डोमकल के लोग खुद लड़ रहे हैं। तृणमूल के उम्मीदवार बाहरी हैं, इसलिए वह डोमकल को अशांत करना चाहेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "रायपुर में महिलाओं ने एकजुट होकर डर को दरकिनार करते हुए अपने वोट के अधिकार का प्रयोग किया। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ने विभिन्न तरीकों से इलाके को गरमाने की कोशिश की है। वे गुंडों को लेकर बूथ पर गए और लोगों को डराने की कोशिश की, लेकिन जनता ने उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी।"
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प्रकाशित: 23 अप्रैल 2026 • 2 मिनट पठन

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव
14 जून 2026

मोहम्मद सलीम • 25 अप्रैल 2026

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिल्म निर्देशक और लेखक सत्यजीत राय ने महानायक उत्तम कुमार के आकस्मिक निधन (24 जुलाई 1980) पर आनंदबाज़ार पत्रिका में 26 जुलाई 1980 को एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक आलेख लिखा था, जिसका बांग्ला शीर्षक था - "অস্তমিত নক্ষত্র" - 'अस्तमित नक्षत्र'। यह आलेख 24 जुलाई 2019 को 'अस्तमित उत्तम' (অস্তমিত উত্তম) के नाम से पुनः प्रकाशित हुआ। इस शीर्षक में बहुत ही सुंदर शब्दावली का खेल किया गया , जिसके दो समानांतर अर्थ निकलते हैं: उत्तम कुमार के नाम के संदर्भ में - यहाँ 'उत्तम' का सीधा अर्थ अभिनेता 'उत्तम कुमार' से है। यानी "उत्तम कुमार का अस्त हो जाना (निधन हो जाना)"। बांग्ला और हिन्दी दोनों में 'उत्तम' का गुणवाचक अर्थ 'सर्वश्रेष्ठ' या 'सबसे अच्छा' होता है। इसके अनुसार इस शीर्षक का भावार्थ है—"श्रेष्ठता का ढल जाना" या "एक स्वर्णिम युग का अंत"। अपने इस आलेख में महानायक के निधन के बाद उनकी अभिनय क्षमता का विश्लेषण किया था महान निर्देशक सत्यजीत राय ने। आनंदबाज़ार पत्रिका का आभार व्यक्त करते हुए उत्तम कुमार (03 नवंबर 1926- 24 जुलाई 1980) जन्मशती वर्ष में हिन्दी पाठकों के लिए प्रस्तुत है इस ऐतिहासिक आलेख का हिन्दी में भावानुवाद । भावानुवाद करते समय मूल लेख का भाव, विश्लेषण और महान निर्देशक सत्यजीत राय की भाषा की गंभीरता बनाए रखने की कोशिश की गई है। जन्मशती वर्ष में किवदंती महानायक का सादर स्मरण, श्रद्धांजलि ।
केशव कुमार भट्टड़ • 10 सितंबर 2026
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