जन समाचार मंच

पश्चिम बंगाल: सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव मोहम्मद सलीम ने चुनाव आयोग से मांग की है कि भले ही राज्य के लोगों ने कुल मिलाकर निर्बाध रूप से मतदान किया है, लेकिन मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया का निष्पक्ष और सटीक होना सुनिश्चित किया जाए। बुधवार शाम दूसरे चरण का मतदान संपन्न होने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा हालांकि पुराने तरीके से वोट लूटने की कोशिशें की गईं, लेकिन इस बार के मतदान में कोई बड़ी घटना नहीं हुई। पिछले डेढ़ दशक की तुलना में इस बार बमबारी या गोलीबारी नहीं हुई और बड़ी संख्या में लोग बिना किसी बाधा के वोट डाल सके। उन्होंने कहा जब तक काम पूरा न हो जाए, तब तक भरोसा नहीं किया जा सकता।मतगणना की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सही होनी चाहिए। मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी धांधली दोबारा नहीं होनी चाहिए। चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा।
मोहम्मद सलीम ने कहा कि चुनावी चरण के दौरान वामपंथियों ने पूरी सफलता के साथ प्रचार किया है। बड़ी संख्या में वामपंथी कार्यकर्ताओं ने समर्पित होकर काम किया और अपनी जुझारू मानसिकता का परिचय दिया। आज भी निर्बाध मतदान सुनिश्चित करने की जिद के साथ वामपंथी कार्यकर्ता सड़कों पर थे और बूथों की रक्षा की। मतगणना के दिन भी वे इसी तरह डटे रहेंगे।जिन लोगों ने उम्मीद के साथ वामपंथियों को वोट दिया है, हमारे उम्मीदवार निर्वाचित होने पर उनकी मर्यादा की रक्षा करेंगे।जनता वामपंथियों को या तो सरकार बनाने जैसा समर्थन देगी, या फिर विपक्ष की भूमिका निभाने का जनादेश देगी। "सीपीआई (एम) के निर्वाचित प्रतिनिधि बंगाल को बचाने के लिए जनता से किए गए वादों के प्रति जवाबदेह रहेंगे। हम किसी भी तरह के 'हॉर्स ट्रेडिंग' (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के खेल में शामिल नहीं होंगे।"परिवार के कई सदस्यों के नाम मतदाता सूची में न होने के कारण कई लोगों ने दुखी मन से वोट दिया है। जो लोग वोट नहीं दे पाए, उनके अधिकारों की रक्षा के लिए भी हमारा संघर्ष जारी रहेगा एसआईआर (SIR) के माहौल में तमाम उत्पीड़न और पीड़ा झेलने के बावजूद बड़े पैमाने पर मतदान करने के लिए जनता को बधाई देते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि एसआईआर के कारण लाखों लोगों के मताधिकार छीन लिए गए।अंत समय में ट्रिब्यूनल के माध्यम से बेहद हास्यास्पद तरीके से केवल लगभग डेढ़ हजार नाम ही सूची में शामिल किए गए।इस पीड़ादायक अनुभव से लोगों ने अपने वोट की कीमत समझी है, इसीलिए वे अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए बड़ी संख्या में आगे आए हैं।जो लोग काम या अन्य कारणों से राज्य के बाहर रहते हैं, वे भी वापस लौटे और इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया।मतदाता सूची से कुछ मृत और फर्जी नाम हटा दिए गए हैं, जिस वजह से सामान्य रूप से मतदान का प्रतिशत बढ़ा है।हम वामपंथी हमेशा से यही चाहते रहे हैं कि चुनावों में जनता की भागीदारी अधिक से अधिक हो। वाममोर्चा सरकार के समय जब भारी मतदान होता था, तब कुछ लोग इसे 'रिगिंग' कहकर इसका मजाक उड़ाते थे। आज यह स्पष्ट हो गया है कि यदि शांतिपूर्ण स्थिति और सुरक्षा सुनिश्चित हो, तो लोग मतदान के लिए उत्साहित होते हैं। समग्र रूप से शांतिपूर्ण मतदान संपन्न होने पर संतोष व्यक्त करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि जो काम केंद्रीय बलों की मदद से किया गया, वही राज्य की पुलिस भी कर सकती थी यदि वे कानून के दायरे में रहकर काम करते। पंचायत, नगरपालिका, सहकारी समितियों और यहाँ तक कि स्कूल-कॉलेज की प्रबंधन समितियों के चुनावों में भी तृणमूल ने राज्य पुलिस को अपना 'दलदास' (गुलाम) बनाकर वोट लूटे, इसी कारण इतनी हिंसा होती थी। पुलिस अधिकारियों की इस चाटुकारिता ने पश्चिम बंगाल की साख को नुकसान पहुँचाया है।
1971 में भी बंगाल में सीआरपीएफ उतारी गई थी, जिसके बाद आपातकाल लगा। केंद्रीय बलों के जूतों की धमक से डर का माहौल बनता है। सिर्फ केंद्रीय बल होने का मतलब लोकतंत्र नहीं होता।जब ममता बनर्जी विपक्षी नेता और रेल मंत्री थीं, तब उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए राज्य पुलिस के बजाय आरपीएफ को रखा था। वे बात-बात पर 356 धारा और केंद्रीय बलों की मांग करती थीं।तृणमूल की गोद में राजनीतिक रूप से बड़े हुए शुभेंदु अधिकारी भी अब भाजपा नेता बनकर वही मांग कर रहे हैं। ममता बनर्जी को आज हाथ मलने की जरूरत नहीं पड़ती, यदि उन्होंने तृणमूल के अपराधियों को बचाने के लिए राज्य पुलिस को अपना गुलाम न बनाया होता।इस बार जनता ने खुद निर्भीक होकर वोट दिया है, जिससे तृणमूल नेता डरे हुए हैं। अपनी पकड़ ढीली होते देख उनमें से कई नेताओं ने अब भाजपा नेताओं के साथ संपर्क साधना शुरू कर दिया है।मोहम्मद सलीम ने कहा कि आज मतदान के दौरान हमने प्रशासन को हर विधानसभा क्षेत्र के अनुसार कई शिकायतें भेजीं। अधिकांश मामलों में कार्रवाई की गई, लेकिन कुछ जगहों पर ढिलाई बरती गई। जहाँ भाजपा के वोट बचाने का सवाल नहीं था, वहाँ पुलिस और प्रशासन की तत्परता कम थी और स्पष्ट पक्षपात देखा गया।जिन बूथों पर ईवीएम में हमारे उम्मीदवार के नाम और प्रतीक वाले बटन पर स्टिकर चिपकाए गए थे, हमने चुनाव आयोग से उन जगहों पर फिर से मतदान कराने की मांग की है।महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली का उदाहरण देते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि हमने देखा है कि मतदान समाप्त होने के बाद भी वोट प्रतिशत अचानक बढ़ जाता है। यहाँ भी आधी रात तक यह आंकड़ा कितना बढ़ेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। चुनाव आयोग को यह देखना होगा कि कहीं आंकड़ों में कोई 'मिलावट' तो नहीं हो रही है।राज्य के पंचायत चुनावों में हमने देखा है कि कुछ एजेंसियां मतगणना केंद्रों पर नकली कर्मचारी घुसाकर केंद्रों पर कब्जा कर लेती हैं और गिनती को प्रभावित करती हैं।मतगणना केंद्र पूरी तरह सुरक्षित होने चाहिए। आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी व्यक्ति फर्जी कार्ड या सर्टिफिकेट लेकर वहां प्रवेश न कर सके।
चुनाव के बाद होने वाली हिंसा और आतंक को रोकने की मांग करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि मुख्यमंत्री और तृणमूल नेता भय का माहौल पैदा करने में जुट गए हैं। 2011 के चुनाव परिणामों के बाद हमारे पार्टी के तीन कार्यकर्ता शहीद हुए थे। हालिया उपचुनावों में भी तमन्ना की हत्या कर दी गई। इस बार किसी भी तरह का आतंक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस को कानून के दायरे में रहकर काम करना होगा; सत्ता पक्ष की 'दलाली' नहीं चलेगी।इस राज्य में हमने 'भतीजे' के लिए वसूली करने वाले पुलिस अफसर देखे हैं, और अब हम उत्तर प्रदेश के 'मैचो एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' को भी देख रहे हैं। ये लोग जनता के अधिकारों के पक्ष में नहीं, बल्कि उनके अधिकार छीनने के पक्ष में हैं। क्या ये लोग उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त कर पाए हैं?
अपलोडर: श्रेया जायसवाल
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अपलोडर: श्रेया जायसवाल • प्रकाशित: 30 अप्रैल 2026 • 6 मिनट पठन

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव
14 जून 2026

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।
श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026
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