जन समाचार मंच


बैरकपुर: ICSE में देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। बोर्ड की कक्षा 12वीं की परीक्षा में 400 में से पूरे 400 अंक हासिल किए हैं। ICSE के नतीजे घोषित होने के बाद से ही बैरकपुर की बेटी अनुष्का घोष चर्चा के केंद्र में हैं। इसी चर्चा के बीच अनुष्का ने साफ कर दिया है कि वे भविष्य में राजनीति में आना चाहती हैं। उन्होंने अपनी पसंदीदा राजनीतिक विचारधारा के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, "मैं वामपंथी हूँ।"
अनुष्का बैरकपुर के आनंदपुरी की रहने वाली हैं। 2024 में आईसीएसई (ICSE) में भी उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया था। कक्षा 10वीं के परिणाम को याद करते हुए उन्होंने कहा, "10वीं की परीक्षा में अंग्रेजी में मेरे 2 नंबर कम रह गए थे। इसलिए मैंने सोचा था कि इस बार पूरे नंबर लाने ही होंगे।" अनुष्का ने 12वीं की परीक्षा में वही कर दिखाया। उन्होंने भविष्य में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की इच्छा जताई है और अपनी सफलता का श्रेय स्कूल और अपनी माँ को दिया है।
राजनीति पर क्या बोलीं अनुष्का?
जब परिवार और रिश्तेदार उनकी सफलता का जश्न मना रहे हैं, तब अनुष्का ने अपनी राजनीतिक सोच को स्पष्ट रूप से साझा किया। TV9 बांग्ला चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा:
"एक निश्चित उम्र के बाद मैं राजनीति में प्रवेश करूँगी। मुझे लगता है कि अभी सब कुछ ठीक नहीं है। इसे ठीक करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार जो भी बन पड़ेगा, मैं वो करूँगी। शायद लगेगा कि छोटी उम्र में बहुत बड़ी-बड़ी बातें कर रही हूँ, लेकिन यह मेरी इच्छा है। मैं वामपंथी हूँ। हो सकता है कि मैं वामपंथियों की हर बात से सहमत न हूँ, लेकिन कुल मिलाकर मैं यही कहूँगी कि मैं वामपंथी हूँ। मैं उनकी अधिकांश विचारधाराओं से सहमत हूँ।"
सीपीएम (CPIM) का क्या कहना है?
अनुष्का के राजनीतिक विचारों पर SFI के अखिल भारतीय महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने कहा, "मैं बहुत खुश हूँ। उनके शानदार परिणाम के लिए उन्हें बधाई देता हूँ। वे जीवन में और भी आगे बढ़ें। वे जो भी करें, समाज और सभ्यता में योगदान देने के उद्देश्य से करें। अगर वे कहती हैं कि वे वामपंथी बनना चाहती हैं, तो यह हमारे लिए गर्व की बात है। हम यही चाहेंगे कि सभी लोग समाज के प्रति जागरूक बनें।"
अपलोडर: श्रेया जायसवाल
क्या यह लेख उपयोगी था?
अपलोडर: श्रेया जायसवाल • प्रकाशित: 01 मई 2026 • 2 मिनट पठन

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव
14 जून 2026

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।
श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...