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युवाओं की भारी भागीदारी व्यर्थ नहीं जाएगी:- मोहम्मद सलीम

श्रेया जायसवाल•03 मई 20265 मिनट पठन62 बार पढ़ा गया
तृणमूल और भाजपा ने अपने वफादार मीडिया माध्यमों की मदद से जो राजनीतिक नैरेटिव तैयार किया था, उसके खिलाफ वामपंथियों और विशेषकर युवाओं के संघर्ष ने एक मजबूत जनमत तैयार किया है। इसलिए परिणाम चाहे जो भी हों, वामपंथी कार्यकर्ता भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।
युवाओं की भारी भागीदारी व्यर्थ नहीं जाएगी:- मोहम्मद सलीम

 युवाओं की भारी भागीदारी 

व्यर्थ नहीं जाएगी:- मोहम्मद सलीम 

कॉमरेड बनानी विश्वास की शोक सभा

 

सीपीआई (एम)के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने इस विधानसभा चुनाव में वामपंथ के पक्ष में युवा पीढ़ी के संघर्ष को एक बड़ी उपलब्धि और भविष्य में दक्षिणपंथ के खिलाफ लड़ाई के लिए महत्वपूर्ण पूँजी बताया है। शनिवार को कोलकाता के प्रमोद दासगुप्ता भवन में महिला आंदोलन की नेता दिवंगत कॉमरेड बनानी विश्वास की याद में आयोजित शोक सभा में उन्होंने कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में वामपंथी उम्मीदवारों की सूची से लेकर बूथ प्रबंधन तक में युवा पीढ़ी की भूमिका अहम रही। विशेष रूप से चुनावी प्रचार में जिस तरह से उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, वह वामपंथियों के लिए भविष्य की शक्ति है। चुनाव परिणामों और आने वाले समय पर इसका क्रांतिकारी प्रभाव पड़ेगा। दुनिया भर में बढ़ते दक्षिणपंथ के विपरीत, राज्य की राजनीति में वामपंथ के प्रति युवाओं की यह रुचि और भागीदारी अत्यंत उत्साहजनक है।

सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति और राज्य समिति की पूर्व सदस्य तथा जनवादी महिला आंदोलन की अखिल भारतीय नेता कॉमरेड बनानी विश्वास का निधन बीते 3 अप्रैल को हो गया था। इस शोक सभा में पार्टी और अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के केंद्रीय व राज्य नेतृत्व की उपस्थिति में जन आंदोलनों में उनके योगदान को याद किया गया। सभा की अध्यक्षता मोहम्मद सलीम ने की। कॉमरेड बनानी विश्वास के संघर्ष की निरंतरता को बनाए रखने के लिए युवाओं के आगे आने को भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरी चुनाव प्रक्रिया में युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी है। यह भागीदारी न केवल वामपंथी संघर्ष के परिमाण को बढ़ाएगी, बल्कि उसकी गुणवत्ता  में भी सुधार करेगी। वामपंथी शक्तियों के पुनरुत्थान और जन आंदोलनों में महिलाओं और युवाओं को अग्रिम पंक्ति में लाना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है।

एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए और युवाओं के उत्साहपूर्ण योगदान को अटूट बताते हुए सलीम ने कहा कि यह विधानसभा चुनाव कई मायनों में अलग रहा। मतदाताओं के एक वर्ग में केंद्र सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर थी। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आए, भाजपा के खिलाफ इस गुस्से को धीरे-धीरे राज्य सरकार की ओर मोड़ दिया गया। राज्य की तृणमूल सरकार के प्रति लोगों के भारी असंतोष का भी प्रभाव पड़ा है। साथ ही, धर्म, जाति और भाषा के आधार पर विभाजन की कोशिशों के कारण भाजपा के खिलाफ भी एक जनमत था। दुनिया भर में सिर उठाते दक्षिणपंथ के खतरे को भांपते हुए कई लोग वामपंथ की ओर भी झुके हैं। इसलिए, ये सर्वेक्षण (सर्वे) चाहे जो भी कहें, तृणमूल और भाजपा भी उन पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रही हैं।

सलीम ने आगे कहा कि जहाँ एक ओर बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया, वहीं एसआईआर (SIR) के कारण एक बड़ा वर्ग मतदान से वंचित भी रहा। कई लोग अपने परिवार और परिचितों के मताधिकार न होने का दर्द लेकर बूथों पर वोट डालने पहुंचे। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एक वर्ग ऐसा भी था, जो अनिच्छा या डर के कारण पहले वोट नहीं देता था, लेकिन इस बार उन्होंने भी मतदान किया। उनके वोटिंग पैटर्न को समझना और उस पर शोध करना इतना आसान नहीं है। परिणामस्वरूप, सर्वेक्षण के नतीजों पर कई सवाल खड़े होते हैं। तृणमूल और भाजपा ने अपने वफादार मीडिया माध्यमों की मदद से जो राजनीतिक नैरेटिव  तैयार किया था, उसके खिलाफ वामपंथियों और विशेषकर युवाओं के संघर्ष ने एक मजबूत जनमत तैयार किया है। इसलिए परिणाम चाहे जो भी हों, वामपंथी कार्यकर्ता भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आह्वान किया कि जिस तरह दिवंगत कॉमरेड बनानी विश्वास ने महिला आंदोलन के कार्यकर्ताओं को संगठित कर संघर्ष का नेतृत्व किया था, उसी धारा को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं, छात्रों और युवाओं को जन आंदोलनों में आगे आना चाहिए।

कॉमरेड बनानी विश्वास को श्रद्धांजलि देने के लिए सभा में वरिष्ठ माकपा नेता बिमान बसु, सूर्यकांत मिश्रा, वृंदा करात और पार्टी पोलित ब्यूरो सदस्य श्रीदीप भट्टाचार्य ,मरियम धवले भी उपस्थित थी। पार्टी और महिला आंदोलन के कार्यकर्ताओं के बीच कॉमरेड बनानी विश्वास 'मनुदी' के नाम से लोकप्रिय थीं। नेताओं ने श्रद्धापूर्वक याद किया कि कैसे कठिन समय में भी 'मनुदी' पार्टी कार्यकर्ताओं का संरक्षण करती थीं। बिमान बसु ने 1960 के दशक के उथल-पुथल वाले समय में पार्टी संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। सभा को संबोधित करते हुए वृंदा करात ने मृत्यु से कुछ समय पहले बनानी विश्वास के साथ हुई अपनी अंतिम बातचीत का जिक्र किया। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, "राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद लोगों तक वामपंथ की बात पहुँचाने में युवाओं और महिला कार्यकर्ताओं के प्रयासों को देखकर 'मनुदी' निश्चित रूप से गौरवान्वित होतीं। वह हमेशा समाज और पार्टी में महिलाओं की स्थिति और प्रगति के बारे में चिंतित रहती थीं। वह निस्वार्थ भाव से पार्टी, जन संगठनों और कार्यकर्ताओं को अपने परिवार की तरह प्यार करती थीं।" श्रीदीप भट्टाचार्य ने उनके साथ काम करने के अपने लंबे अनुभव को साझा किया और उनके शोक को शक्ति में बदलकर संगठन को आगे ले जाने का आह्वान किया।

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युवाओं की भारी भागीदारी व्यर्थ नहीं जाएगी:- मोहम्मद सलीम

प्रकाशित: 03 मई 2026 • 5 मिनट पठन

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