जन समाचार मंच

" इस राज्य को किसी भी कीमत पर।
असम जैसा नहीं बनने दिया जाएगा "
मोहम्मद सलीम
जिन लोगों ने वामपंथियों को वोट नहीं दिया है, जिन्होंने तृणमूल या भाजपा का समर्थन किया है, उन्हें भी शांति-सद्भाव और दंगों को रोकने के लिए एकजुट करना होगा। हम किसी भी हाल में इस राज्य को असम जैसी स्थिति में नहीं जाने देंगे।
सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने शुक्रवार को बहरमपुर में एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। वह मुर्शिदाबाद में सीपीआई(एम) की सांगठनिक बैठक में हिस्सा लेने गए थे। इस संवाददाता सम्मेलन में सीपीआई(एम) के मुर्शिदाबाद जिला सचिव जामिर मोल्ला भी मौजूद थे।
मोहम्मद सलीम ने कहा, "हम एक बड़े खतरे के सामने खड़े हैं। बँटवारे की राजनीति के जरिए चुनावी नैया पार की जा रही है। लेकिन भेदभाव की यह चिंगारी चुनाव के बाद भीषण आग में बदल सकती है।"
मोहम्मद सलीम ने आगे कहा कि मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज, धुलियान और जंगीपुर में हमने इस राजनीति का परिणाम देखा है। देश में भी हम यही देख रहे हैं। असम और मणिपुर में भी ऐसी ही घटनाएँ घट रही हैं। यह जरूरी नहीं कि 'डबल इंजन' की सरकार होने पर ही शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहेगी।लोगों ने शांति और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के लिए वोट दिया है। यह सुनिश्चित करना होगा कि कानून का शासन बना रहे। वामपंथी पूरी ताकत के साथ सांप्रदायिकता मुक्त माहौल बनाने और विभाजन को रोकने की कोशिश करेंगे।
सलीम ने कहा, "27 लाख लोगों के वोट का अधिकार छीन लिए गए हैं। वोट के स्वार्थ के लिए उन्हें रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिया करार दे दिया गया है। अब न्यायाधीश भी विचाराधीन मतदाताओं की जिम्मेदारी लेना नहीं चाह रहे हैं। इन मतदाताओं के लिए हम फिर से सड़कों पर उतरेंगे और अदालत में भी लड़ाई लड़ेंगे। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर व्यक्ति को उसका मताधिकार मिले।" क्या भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य के अल्पसंख्यक डरे हुए हैं? इस सवाल के जवाब में सलीम ने कहा, "सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि धर्मनिरपेक्ष और शांतिप्रिय लोग भी आतंक के साये में हैं। इसीलिए हम कह रहे हैं कि अफवाहों पर ध्यान न दें। सांप्रदायिक दंगे भड़काने के लिए ही अफवाहें फैलाई जाती हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे। जिन्होंने वामपंथियों को वोट नहीं दिया, जिन्होंने तृणमूल या भाजपा का समर्थन किया है, उन्हें भी शांति, सद्भाव और दंगों को रोकने के लिए एकजुट करना होगा। हम किसी भी कीमत पर इस राज्य को असम जैसी स्थिति में नहीं पहुँचने देंगे।"
उन्होंने कहा, "राज्य में तृणमूल और भाजपा विरोधी शक्ति के रूप में वामपंथियों ने जनता के सामने एक विकल्प पेश किया था। अन्य वामपंथी दलों और आईएसएफ को साथ लेकर एक व्यापक वाम एकता बनाई गई थी और हमने एकजुट होकर लड़ाई लड़ी। लेकिन जिस तरह से भाजपा ने अपनी सत्ता की ताकत झोंकी—प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भारी भरकम पैसा, हेलीकॉप्टर और विमान लेकर चुनाव में उतरे, उसे देखकर लोगों को लगा कि शायद इन्हीं से कुछ हो पाएगा। लेकिन अब यह साबित होगा कि उन्होंने जो वादे किए थे—छह महीने में सभी रिक्त पदों को भरना, सातवां वेतन आयोग लागू करना, केंद्रीय दर पर डीए देना और बंद पड़े स्कूल-कॉलेजों को फिर से खोलना—वह पूरे होते हैं या नहीं, यह हमें देखना होगा।"
सलीम ने आगे कहा, "मैं उन लोगों का अभिनंदन करता हूँ जिन्होंने मूर्ति तोड़ने की राजनीति के खिलाफ मुर्शिदाबाद और पूरे राज्य में जुलूस निकाले। वाममोर्चे की ओर से बहरमपुर में भी जुलूस निकाला गया। आज कोलकाता में भी वामपंथी दलों ने लेनिन की मूर्ति से एक विशाल रैली का आयोजन किया। यह रैली सिर्फ लेनिन की मूर्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन जगहों से भी गुजरी जहाँ हॉकरों की दुकानें तोड़ी गईं, दुकानें बंद कराई गईं और जहाँ बुलडोजर चलाया गया। इसका एकमात्र उद्देश्य लोगों को आश्वस्त करना है कि हमारे राज्य में 'बुलडोजर राजनीति' का आयात न हो सके। पुलिस ने मना किया था कि बुलडोजर लेकर जुलूस नहीं निकाला जा सकता, फिर भी भाजपा के कई विजयी उम्मीदवारों ने बुलडोजर के साथ जुलूस निकाला। असल में यह एक विकृत मानसिकता है और अपनी पितृसत्तात्मक ताकत का प्रदर्शन करने का एक जरिया है।"
साभार - गणशक्ति
अपलोडर: श्रेया जायसवाल
क्या यह लेख उपयोगी था?
अपलोडर: श्रेया जायसवाल • प्रकाशित: 09 मई 2026 • 4 मिनट पठन

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव
14 जून 2026

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।
श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...