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श्रम कोड अधिसूचना की निंदा, पोलिट ब्यूरो ने विधानसभा में संशोधन की भी अपील की

श्रेया जायसवाल•09 मई 20262 मिनट पठन37 बार पढ़ा गया
4 मई को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के चार दिनों के भीतर ही केंद्र सरकार ने लेबर कोड लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इस लेबर कोड में मजदूरों के संगठित होने के अधिकार को छीन लिया गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि यदि मजदूर अपनी जायज माँगों के लिए आंदोलन करते हैं, तो उन्हें आपराधिक मामलों के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सके।
श्रम कोड अधिसूचना की निंदा, पोलिट ब्यूरो ने विधानसभा में संशोधन की भी अपील की

श्रम कोड अधिसूचना की निंदा

पोलिट ब्यूरो ने विधानसभा में संशोधन की भी अपील की

चुनाव परिणामों की घोषणा के तुरंत बाद पूरे देश में लेबर कोड (श्रम संहिता) लागू करने के कदम की सीपीआई(एम) ने कड़ी निंदा की है। सीपीआई(एम) ने राज्य सरकारों से अपील की है कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करें और विधानसभा में इस संबंध में संशोधन पारित करें।

शनिवार को जारी एक बयान में, सीपीआई(एम) पोलितट ब्यूरो ने कहा कि मजदूर वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्यों को विधानसभा में संशोधन पारित करना चाहिए।

केंद्र की भाजपा नीत सरकार ने श्रम कोड कानूनों की अधिसूचना पहले ही जारी कर दी थी। इसके विरोध में देशभर के मजदूरों और किसानों ने हड़ताल और प्रदर्शन भी किए हैं।गत 4 मई को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के चार दिनों के भीतर ही केंद्र सरकार ने लेबर कोड लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है।

इस लेबर कोड में मजदूरों के संगठित होने के अधिकार को छीन लिया गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि यदि मजदूर अपनी जायज माँगों के लिए आंदोलन करते हैं, तो उन्हें आपराधिक मामलों के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सके। लेबर कोड में चालाकी से आठ घंटे काम के नियम को हटाकर बारह घंटे काम करने की अनुमति दे दी गई है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने इन चारों लेबर कोड को 'गुलामी का फरमान' करार दिया है।पोलट ब्यूरो ने कहा है कि केंद्र सरकार 1 अप्रैल से ही लेबर कोड लागू करने की अधिसूचना जारी करना चाहती थी। लेकिन पाँच राज्यों के चुनावों पर इसका असर पड़ने की आशंका के कारण ऐसा नहीं किया गया। चुनाव परिणाम आने के मात्र चार दिन बाद ही अधिसूचना जारी कर दी गई। केंद्र सरकार ने धोखे का सहारा लिया है।

पोलिट ब्यूरो ने बताया कि केरल में चुनाव से पहले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने 'लेबर कॉन्क्लेव' आयोजित किया था और विशेषज्ञों की सलाह ली गई थी। लेकिन आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने के कारण उसे लागू नहीं किया जा सका।

इस स्थिति में, पोलिट ब्यूरो ने राज्य सरकारों से अपील की है कि वे लेबर कोड में संशोधन पारित करें।

साभार - गणशक्ति 

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श्रम कोड अधिसूचना की निंदा, पोलिट ब्यूरो ने विधानसभा में संशोधन की भी अपील की

प्रकाशित: 09 मई 2026 • 2 मिनट पठन

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