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यह लड़ाई तृणमूल और भाजपा की तरह नौटंकी वाली लड़ाई नहीं है। यह रोजी-रोटी की लड़ाई है, मेहनतकश लोगों की लड़ाई है, प्रवासी मजदूरों और कल-कारखानों की लड़ाई है।

श्रेया जायसवाल•13 मई 20263 मिनट पठन56 बार पढ़ा गया
" यह लड़ाई तृणमूल और भाजपा की तरह नौटंकी वाली लड़ाई नहीं है। यह रोजी -रोटी की लड़ाई है, मेहनतकश लोगों की लड़ाई है, प्रवासी मजदूरों और कल-कारखानों की लड़ाई है। मैं विधानसभा में इन्हीं संघर्षों का संदेश पहुँचाऊँगा। "
यह लड़ाई तृणमूल और भाजपा की तरह नौटंकी वाली लड़ाई नहीं है। यह रोजी-रोटी की लड़ाई है, मेहनतकश लोगों की लड़ाई है, प्रवासी मजदूरों और कल-कारखानों की लड़ाई है।

विधानसभा में अकेले वामपंथी विधायक के रूप में लड़ाई कैसी है?

सी पी आई ( एम)  विधायक मोस्ताफिजुर रहमान (राना) ने शपथ लेने के बाद 'गणशक्ति डिजिटल' से बातचीत में कहा"लड़ाई निश्चित रूप से कठिन है। सीपीआई(एम) और वामपंथी विधायक के रूप में मैं अकेला हूँ, लेकिन मैं यह लड़ाई लड़ पाऊँगा। क्योंकि मैं अकेला नहीं हूँ, मेरे पीछे मेरी पार्टी है। कई जन-संगठन हैं जो साल के 365 दिन सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "यह लड़ाई तृणमूल और भाजपा की तरह नौटंकी वाली लड़ाई नहीं है। यह रोजी -रोटी की लड़ाई है, मेहनतकश लोगों की लड़ाई है, प्रवासी मजदूरों और कल-कारखानों की लड़ाई है। मैं विधानसभा में इन्हीं संघर्षों का संदेश पहुँचाऊँगा। काम कठिन है, लेकिन पार्टी साथ है तो मुमकिन है।"

राज्य में रोजगार के संकट और ध्रुवीकरण की राजनीति पर रहमान ने कहा"पूरे राज्य में वोटों का ध्रुवीकरण हुआ है। भाजपा इसे हिंदू-मुस्लिम के बंटवारे के रूप में दिखाना चाहती है, लेकिन इससे भी बड़ा ध्रुवीकरण इस सवाल पर हुआ कि 'तृणमूल रहेगी या जाएगी'। तृणमूल का कुशासन और जमीनी स्तर तक फैला भ्रष्टाचार चरम पर है। बेरोजगारों के साथ धोखा हुआ है। SSC परीक्षा में धांधली, नौकरियों की चोरी, कोयला और बालू चोरी—इस अराजकता से जनता तंग आ चुकी थी। लोगों में यह मानसिकता प्रबल थी कि किसी भी कीमत पर तृणमूल को हराना है। उन्होंने उस विकल्प को चुना जो उन्हें लगा कि तृणमूल को हरा सकता है। इसीलिए कई जगहों पर लोगों ने यह सोचकर भाजपा को वोट दिया कि वही उन्हें हरा सकती है।"

डोमकल के विकास के सवाल पर उन्होंने कहा "डोमकल के पूर्व विधायक और वाम मोर्चा सरकार में मंत्री रहे अनीसुर रहमान ने जो काम किए थे, उसके बाद वहाँ कोई काम नहीं हुआ। हम उन्हीं अधूरे कामों को आगे बढ़ाएंगे। हम अपनी प्राथमिकताएं तय कर रहे हैं, हालांकि इसके लिए सरकार की सहायता की आवश्यकता होगी।"

डोमकल में लगभग 25,000 प्रवासी मजदूर हैं और पूरे राज्य में यह संख्या बहुत बड़ी है। मोस्ताफिजुर  रहमान, जो केरल में काम करने वाले डोमकल के मजदूरों के साथ साल भर संपर्क में रहते हैं, ने कहा "यह एक बड़ा मुद्दा है। मैं नई सरकार और मुख्यमंत्री से अपील करता हूँ कि हिंदू-मुस्लिम या मंदिर-मस्जिद बहुत हो गया, अब उद्योगों के वादे को पूरा करने पर काम करें। छोटे उद्योगों की बहुत संभावनाएं हैं। राज्य सरकार को प्रदेश के युवाओं के लिए नए रोजगार सृजित करने चाहिए।"

उन्होंने अंत में कहा, "वाम मोर्चा सरकार ने नारा दिया था—'कृषि हमारा आधार है, उद्योग हमारा भविष्य'। हम इसी नारे के साथ लड़े थे और विधानसभा में भी मैं इसी दृष्टिकोण के साथ राज्य को आगे ले जाने की अपील करूँगा।"

शिक्षा के मुद्दे पर उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि तृणमूल शासन में 8,000 से अधिक स्कूल बंद हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि "शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार वामपंथियों के मुख्य मुद्दे हैं और इनमें शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता मिलेगी।"

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साभार: गणशक्ति 

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यह लड़ाई तृणमूल और भाजपा की तरह नौटंकी वाली लड़ाई नहीं है। यह रोजी-रोटी की लड़ाई है, मेहनतकश लोगों की लड़ाई है, प्रवासी मजदूरों और कल-कारखानों की लड़ाई है।

प्रकाशित: 13 मई 2026 • 3 मिनट पठन

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