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एकतरफा नहीं, गरीबों के हित में आमूल-चूल परिवर्तन चाहिए: मोहम्मद सलीम

श्रेया जायसवाल•16 मई 20264 मिनट पठन112 बार पढ़ा गया

"वामपंथी युद्ध, अशांति और अस्थिरता को रोकना चाहते हैं और इसलिए वामपंथ को खत्म करने के लिए दक्षिणपंथी ताकतें आमादा हैं। हमें अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को संघर्ष के जरिए जिंदा रखना होगा। सामाजिक न्याय और आर्थिक अधिकार स्थापित करने होंगे।"

- मोहम्मद सलीम 

सीपीआइ(एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
एकतरफा नहीं, गरीबों के हित में आमूल-चूल परिवर्तन चाहिए: मोहम्मद सलीम

" एकतरफा नहीं, गरीबों के हित में 

आमूल-चूल परिवर्तन चाहिए "

 मोहम्मद सलीम

*********

सिर्फ विधायक बदलना या रंग बदलना काफी नहीं होगा, विभाजन की राजनीति को बंद करना होगा और हर जगह कानून का शासन स्थापित करना होगा। शुक्रवार को जादवपुर में कॉमरेड मृत्युंजय सेन की याद में आयोजित एक जनसभा में सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात करते हुए कहा कि इतिहास को भुलाना नहीं, बल्कि इतिहास से सबक लेना चाहिए। पुराने तानाशाही शासन के उस इतिहास को हम भूले नहीं हैं। हम कॉमरेड मृत्युंजय सेन जैसे शहीदों के बलिदान को भी नहीं भूले हैं। हम वामपंथी जनता का किसी भी तरह का सर्वनाश नहीं होने देंगे। राज्य में बदलाव सिर्फ एकतरफा नहीं होना चाहिए, बल्कि गरीब लोगों के हित में आमूल-चूल परिवर्तन होना चाहिए।

 जादवपुर 8 बी बस स्टैंड पर आयोजित इस जनसभा में मोहम्मद सलीम के अलावा वकील विकाशरंजन भट्टाचार्य, पार्टी के कोलकाता जिला सचिव कल्लोल मजुमदार, राज्य समिति के सदस्य सुदीप सेनगुप्ता और जन आंदोलन की नेता दीप्सिता धर ने सम्बोधित किया। सभा की अध्यक्षता पार्टी के कोलकाता जिला सचिव मंडल के सदस्य उत्पल दत्त ने की। बारिश के बावजूद, बड़ी संख्या में लोग नेताओं के भाषण को सुनने के लिए अंत तक मौजूद रहे। शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए मोहम्मद सलीम ने उनके बारे में कहा कि वामपंथी युद्ध, अशांति और अस्थिरता को रोकना चाहते हैं और इसलिए वामपंथ को खत्म करने के लिए दक्षिणपंथी ताकतें आमादा हैं। हमें अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को संघर्ष के जरिए जिंदा रखना होगा। सामाजिक न्याय और आर्थिक अधिकार स्थापित करने होंगे।

भाषण देते हुए विकाशरंजन भट्टाचार्य ने कहा कि शहीद मृत्युंजय सेन जैसे लोग समाजवाद चाहते थे। वे व्यक्तिगत रूप से अभिव्यक्ति की आजादी और विचारों की आजादी चाहते थे। इन्हें लागू करने के लिए ही 60-70 के दशक में लड़ाई हुई थी। आज हम फिर एक युग-परिवर्तन (संधिक्षण) के मोड़ पर खड़े हैं। राजनीतिक मंसूबों को पूरा करने के लिए बुलडोजर नीति लाई गई है। इस मुखौटे के पीछे का चेहरा लोग पहले समझ नहीं पाए थे। अब धीरे-धीरे सब साफ हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह जो अवैध मकान तोड़े जा रहे हैं, इसे पिछले 15 सालों से किसने पाला-पोसा है? कार्रवाई के नाम पर गरीब लोगों के घरों को तोड़ना लोकतंत्र पर भरोसा नहीं दिखाता। जिस खून की कीमत पर हमें भारत मिला है, उसके अस्तित्व को संकट में डाला जा रहा है। भारत को और कमजोर करने की योजना बनाई गई है। वामपंथी अपनी पूरी ताकत से इसे रोकेंगे।

वामपंथियों के संघर्ष के इतिहास का जिक्र करते हुए कल्लोल मजुमदार ने कहा कि जब इस जादवपुर के कॉलोनी क्षेत्र पर तानाशाही प्रतिक्रियावादी ताकतों का हमला हुआ था, तब मृत्युंजय सेन जैसे लोगों ने ही प्रतिरोध का संदेश दिया था। उन्होंने संघर्ष की राह दिखाई थी। 2 मई 1970 को उन्हें अपनी जान गँवानी पड़ी थी। इस तरह एक रक्तपात से भरे रास्ते से गुजरकर वाममोर्चा सरकार की स्थापना हुई थी। लेकिन इसके बाद समय के साथ फिर से एक तानाशाही ताकत आई और शिक्षा, स्वास्थ्य को नष्ट करने पर आमादा हो गई। इसके साथ ही लूट-खसोट और भ्रष्टाचार का दौर आया। दूसरी तरफ, हिंदुत्व की दुहाई देकर एक और तानाशाही शासन कायम हो गया। लेकिन लोगों की शांति, सुरक्षा और राहत का क्या हुआ? वामपंथी तो यही राहत लाना चाहते थे। लोग धीरे-धीरे संकट में पड़ते जा रहे हैं, ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार खो रहे हैं, न्यूनतम मजदूरी का अधिकार खो रहे हैं। वे लगातार खौफजदा हो रहे हैं। इसके खिलाफ और अधिक जोरदार संघर्ष में वामपंथी ही शामिल हैं।

देश में भाजपा शासन का उदाहरण देते हुए दीप्सिता धर ने कहा कि राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ है, भाजपा आई है। हम केंद्र सरकार को भी काफी समय से देख रहे हैं। हमने दूसरे राज्यों में भाजपा का शासन देखा है। हमने केंद्र सरकार की नौकरियों के हालात देखे हैं। हमने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें देखी हैं। हमने बलात्कारी भाजपा नेताओं को देखा है। यह भाजपा-आरएसएस किस संस्कृति के वाहक हैं? और अगर तृणमूल की बात करें, तो जब गरीब लोगों के घर तोड़े गए, तब तृणमूल नेता वहाँ जाकर गरीबों की रक्षा के लिए खड़े नहीं हुए; गरीब लोगों के पक्ष में वामपंथी ही खड़े रहे। लाल झंडा ही सड़कों पर रहेगा, लाल झंडा ही लोगों के न्याय के लिए लड़ेगा और लाल झंडा ही अंत तक विभाजन और अशांति को रोकेगा।

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साभार: गणशक्ति 

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एकतरफा नहीं, गरीबों के हित में आमूल-चूल परिवर्तन चाहिए: मोहम्मद सलीम

प्रकाशित: 16 मई 2026 • 4 मिनट पठन

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