इस राज्य में गोरक्षा के नाम पर जुल्मबाजी शुरू हो गई है। मैं नई सरकार से कहूँगा कि इस रास्ते पर न चलें। अशांति और सामाजिक संतुलन बाधित न हो, सांप्रदायिक सौहार्द नष्ट न हो। पिछली सरकार के खिलाफ जनता के फैसले का एक मुख्य कारण कानून के शासन का न होना था। नई सरकार को उस रास्ते पर नहीं चलना चाहिए।
मोहम्मद सलीम
सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
" बुलडोजर-गोरक्षा के जुल्म से कानून का शासन बाधित होगा "
- मोहम्मद सलीम
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विधानसभा चुनाव में लोगों ने अपना गुस्सा इसलिए जाहिर किया क्योंकि वहाँ कानून का शासन नहीं था। नई सरकार को उसी राह पर नहीं चलना चाहिए।बुलडोजर-राज, हॉकरों की दुकानों को उजाड़ना से लेकर गोरक्षा के नाम पर होने वाले जुल्म के संदर्भ में सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। उनकी व्याख्या है कि बुलडोजर राज या गोरक्षा के जुल्म से हमेशा कानून का शासन बाधित होता है। यह हमेशा देखा गया है।
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सीपीआई(एम) के राज्य मुख्यालय मुजफ्फर अहमद भवन में उन्होंने कहा कि इस राज्य में गोरक्षा के नाम पर जुल्मबाजी शुरू हो गई है। मैं नई सरकार से कहूँगा कि इस रास्ते पर न चलें। अशांति और सामाजिक संतुलन बाधित न हो, सांप्रदायिक सौहार्द नष्ट न हो। पिछली सरकार के खिलाफ जनता के फैसले का एक मुख्य कारण कानून के शासन का न होना था। नई सरकार को उस रास्ते पर नहीं चलना चाहिए।दो दिवसीय राज्य समिति की बैठक में चुनावी समीक्षा के बाद सलीम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित किया। उन्होंने बताया कि सीपीआई(एम) चुनावी लड़ाई के अनुभवों का हर स्तर पर विश्लेषण करेगी। समर्थकों और शुभचिंतकों के विचार भी जाने जाएँगे।
उन्होंने बताया कि सीपीआई(एम) राज्य समिति का विस्तारित सत्र 29-30 अगस्त को होगा। इससे पहले 5 अगस्त को काकाबाबू (मुजफ्फर अहमद) के जन्मदिन पर पाठ चक्र में चुनावी समीक्षा पर चर्चा होगी।
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उन्होंने कहा कि मांस केवल मुस्लिम ही नहीं खाते, बल्कि आदिवासी अनुसूचित जाति और उत्तर पूर्व भारत के लोग भी खाते हैं। मोहम्मद सलीम ने कहा कि प्रधानमंत्री अरब देशों के दौरे पर जाते हैं, जहाँ 'इंडियन बीफ' का साइनबोर्ड लगाकर बिक्री की जाती है। भारत मांस निर्यात में दूसरे स्थान पर है और केंद्र सरकार पहले स्थान पर आना चाहती है।
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सलीम ने कहा कि राज्य में पहली बार आरएसएस द्वारा संचालित राजनीतिक दल भाजपा सत्ता में आई है। उन्होंने कहा, "आगे कुर्बानी और बकरीद है। कई मवेशी व्यापारी हैं। हमारे राज्य में पशुपालन से एक बड़ा हिस्सा जुड़ा हुआ है, जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल हैं।"
सलीम ने कहा कि पशु वध पर रोक संबंधी सरकारी दिशा-निर्देशों के कारण कई छोटे बाजारों (हाटों) में खरीद-बिक्री बंद हो गई है। इससे गोपालक (पशुपालक) प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर धार्मिक उकसावे के जरिए गो-प्रजनन या परिवहन में बाधा डाली जाती है, तो इससे जुड़े कई लोगों को नुकसान हो रहा है।
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मोहम्मद सलीम ने घोषणा की कि प्रभावित लोगों की ओर से अदालत में याचिका दायर की जाएगी। इसके साथ ही सीपीआई(एम) उन्हें साथ लेकर सड़कों पर उतरेगी। उन्होंने सभी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष पक्षों से इसमें शामिल होने का आह्वान किया।
सलीम ने कहा "सरकार को सोच-समझकर फैसले लेने होते हैं। आर्थिक पहलुओं को देखना पड़ता है। जिस तरह से जबरदस्ती और जुल्म किया जा रहा है, वह गलत है। हॉकर बेदखली के मामले में भी हमारा यही रुख है। इसके लिए पहले से एक समय सीमा तय की जानी चाहिए।"
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सलीम ने कहा कि रविवार शाम को तपसिया में बुलडोजर से घर तोड़े जाने के विरोध में सीपीआई(एम) के जुलूस में वे खुद शामिल होंगे।अंत में मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा ने चुनाव में सरकारी पदों पर नियुक्ति और उद्योग लगाने जैसे वादे किए थे। नौकरी देने की बात कही थी। उन वादों को पहले पूरा किया जाना चाहिए।
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साभार : गणशक्ति
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