एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि 2024 में राज्य से 63,116 लोग लापता हुए हैं। पूरे देश में यह संख्या 4,92,170 है। राज्य में लापता लोगों में 18 वर्ष से कम उम्र के 15,849 बच्चे हैं। इस मामले में देश की कुल संख्या 92,269 है। राज्य में लापता लोगों में 46,838 महिलाएँ हैं। उनमें से नाबालिग लड़कियों की संख्या 13,727 है। देश में कुल 3,35,962 महिलाएँ लापता हुई हैं, जिनमें से 71,249 नाबालिग हैं। यानी देश की कुल लापता नाबालिग लड़कियों में से करीब 20 फीसदी का पता पश्चिम बंगाल है। राज्य में हर दिन औसतन लगभग 129 महिलाएँ लापता हुईं—यानी हर घंटे 6 महिलाएँ। औसतन हर दिन 38 नाबालिग लड़कियाँ लापता होती हैं—यानी हर घंटे कम से कम डेढ़।
पश्चिम बंगाल से हर दिन
'लापता' हो रही हैं 129 महिलाएँ

वे हिंदू हैं या मुसलमान, यह सवाल बेमानी है। वे महिलाएँ हैं, यही सबसे मुख्य विचारणीय बिंदु है। राज्य में हर दिन औसतन 129 महिलाएँ लापता हुई हैं। उनमें से 38 नाबालिग हैं। लेकिन केंद्र या राज्य सरकार, कोई भी यह मानने को तैयार नहीं है कि इन लापता महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) गिरोह का शिकार हुआ है।
देश में साल 2024 के अपराध के आँकड़े हाल ही में प्रकाशित हुए हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की यह रिपोर्ट हर साल जारी की जाती है। रिपोर्ट में राज्यवार अपराध के आंकड़े होते हैं। मूल रूप से राज्यों के गृह विभागों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर ही केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाला एनसीआरबी यह रिपोर्ट पेश करता है। आमतौर पर रिपोर्ट में दो साल पहले के आंकड़े होते हैं। उसी चलन के अनुसार, इस बार की रिपोर्ट में 2024 के आंकड़े हैं। उस रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में लोगों के लापता होने के मामले में पश्चिम बंगाल देश में पहले स्थान पर है। नाबालिगों के लापता होने के मामले में भी पश्चिम बंगाल देश में सबसे आगे है।

एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि 2024 में राज्य से 63,116 लोग लापता हुए हैं। पूरे देश में यह संख्या 4,92,170 है। राज्य में लापता लोगों में 18 वर्ष से कम उम्र के 15,849 बच्चे हैं। इस मामले में देश की कुल संख्या 92,269 है। राज्य में लापता लोगों में 46,838 महिलाएं हैं। उनमें से नाबालिग लड़कियों की संख्या 13,727 है। देश में कुल 3,35,962 महिलाएं लापता हुई हैं, जिनमें से 71,249 नाबालिग हैं। यानी देश की कुल लापता नाबालिग लड़कियों में से करीब 20 फीसदी का पता पश्चिम बंगाल है। राज्य में हर दिन औसतन लगभग 129 महिलाएं लापता हुईं—यानी हर घंटे 6 महिलाएं। औसतन हर दिन 38 नाबालिग लड़कियां लापता होती हैं—यानी हर घंटे कम से कम डेढ़।
इतने लोगों के लापता होने के बावजूद, रिपोर्ट में मानव तस्करी के अपराधों को बहुत कम करके दिखाया गया है। राज्य सरकार द्वारा भेजे गए आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि 2024 में राज्य में मानव तस्करी के केवल 56 मामले दर्ज किए गए हैं। कुल 73 लोगों की तस्करी हुई, जिनमें 51 महिलाएं और 38 नाबालिग लड़कियां शामिल हैं।केंद्र और राज्य सरकार का दावा है कि एक साल में लापता हुई 13,727 नाबालिग लड़कियों में से केवल 38 ही मानव तस्करी गिरोह का शिकार हुईं! यानी बाकी नाबालिग लड़कियां अपनी मर्जी से गायब हो गईं या माता-पिता को बताए बिना शादी कर लीं। यह किसी भी तरह से जमीनी हकीकत को नहीं दर्शाता है।
इस बार जब यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, तब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। राज्य में भाजपा ने सरकार बनाई है। 2024 में राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी। मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ममता बनर्जी थीं। उनके शासनकाल में राज्य के थानों में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए लोगों को काफी परेशान होना पड़ता था, ऐसे आरोप कई हैं। पुलिस लापता होने या बलात्कार जैसे अपराधों की रिपोर्ट दर्ज करने में टालमटोल करती थी। नतीजतन, एनसीआरबी की रिपोर्ट में राज्य की कानून-व्यवस्था की असली तस्वीर सामने नहीं आ पाती थी, जैसा कि इस बार भी नहीं हुआ।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 2024 में भी किसी किसान ने आत्महत्या नहीं की। हालांकि, 2024 में राज्य में 986 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की है। दिहाड़ी मजदूर आत्महत्या कर सकते हैं, लेकिन खेतिहर मजदूर और गरीब किसान इस राज्य में आत्महत्या करते ही नहीं हैं—ममता बनर्जी और उनकी सरकार ऐसा अजीबोगरीब दावा करती थी। उनका मुख्य तर्क यह था कि राज्य में किसान बहुत खुशहाल हैं, उन्हें कोई दुख या तंगी नहीं है; इसलिए खेती से जुड़ा कोई भी व्यक्ति राज्य में आत्महत्या नहीं करता। पश्चिम बंगाल के बारे में ऐसी भ्रामक जानकारी पिछले चार सालों से एनसीआरबी की रिपोर्ट में आ रही थी। केंद्र की भाजपा सरकार या राज्य के भाजपा नेताओं ने इसका कोई विरोध नहीं किया था। भाजपा नेता सुभेंदु अधिकारी अब मुख्यमंत्री हैं और गृह विभाग भी उन्हीं के पास है। हालांकि, वह और उनकी सरकार राज्य के हालात में कितना सुधार कर पाएंगे, यह एनसीआरबी की अगली रिपोर्ट से ही साफ हो सकेगा।
एनसीआरबी की पिछले वर्ष यानी 2023 की रिपोर्ट से तुलना करने पर पता चलता है कि 2024 में राज्य में महिलाओं के लापता होने की घटनाएं बढ़ी हैं। 2023 में राज्य से 43,054 महिलाएं लापता हुई थीं, जो 2024 में बढ़कर 46,838 हो गईं
राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की झलक इन डेटा विसंगतियों के बीच भी एनसीआरबी की रिपोर्ट में थोड़ी-बहुत मिल जाती है। लापता लोगों का विवरण ऐसा ही एक क्षेत्र है। जिन्हें पुलिस रिपोर्ट में 'लापता' दिखाया जाता है, असल में उनमें से कई लोग मानव तस्करी गिरोह के शिकार होते हैं। उनके 'गायब होने' से जुड़ी रिपोर्टों का एक बड़ा हिस्सा वास्तव में गरीबी और तंगी से परेशान लाचार परिवारों के बेबस बच्चों की तस्करी की कहानी है। लेकिन ममता बनर्जी के शासन में पुलिस की जांच कभी इस दिशा में आगे नहीं बढ़ी। राज्य की तृणमूल सरकार ने जानबूझकर इस मुद्दे को महत्व नहीं दिया। जिलों से मिल रहे आंकड़ों से पता चलता है कि सुंदरबन क्षेत्र, चाय बागान इलाके और जंगलमहल के क्षेत्रों में नाबालिग लड़कियों के लापता होने की रिपोर्ट सबसे ज्यादा है।
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साभार: गणशक्ति
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