कॉमरेड मृणाल चक्रवर्ती की शोक सभा में मोहम्मद सलीम
वामपंथियों को बंगाल की संस्कृति
और विरासत को भाजपा के हाथों से बचाना होगा
मोहम्मद सलीम

राज्य की नई राजनीतिक परिस्थितियों में फासीवादी भाजपा के खतरे के खिलाफ लड़ाई में तृणमूल कांग्रेस खोजने से नहीं मिलेगी बल्कि वामपंथी ही यह लड़ाई लड़ेंगे। बुधवार को मध्यमग्राम के नजरुल शतवार्षिकी सदन में सीपीआई (एम) उत्तर 24 परगना जिला के पूर्व सचिव और राज्य समिति के पूर्व सदस्य कॉमरेड मृणाल चक्रवर्ती की शोक सभा में पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से 'आफत' तो टल गई है, लेकिन 'आफत के बाद बड़ी विपदा' आ गई है। बंगाल की सभ्यता, संस्कृति और विरासत को भाजपा के हाथों से बचाने की चुनौती वामपंथियों को ही स्वीकार करनी होगी। तृणमूल कांग्रेस यह लड़ाई नहीं लड़ेगी। मोहम्मद सलीम के अलावा वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बसु, पोलिट ब्यूरो सदस्य श्रीदीप भट्टाचार्य, जिला सचिव पलाश दास और पूर्व जिला सचिव गौतम देव ने शोक सभा को सम्बोधित किया।। दिवंगत कॉमरेड मृणाल चक्रवर्ती को वामपंथी आंदोलन और वर्ग संघर्ष का एक आदर्श सिपाही बताते हुए उन्होंने कहा कि वे कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रति हमेशा अडिग रहे। न केवल वर्ग आंदोलन में, बल्कि त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में भी उन्होंने कुशलता के साथ एक प्रशासक की भूमिका निभाई। उनके जीवन दर्शन, राजनीतिक लक्ष्यों और संघर्षों से सीख लेकर आगामी दिनों के आंदोलनों के लिए हमें खुद को और अधिक तैयार करना होगा।
मोहम्मद सलीम ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या अब टैक्सी के मीटर की तरह बढ़ेगी। इस बीच, बारासात से तृणमूल कांग्रेस सांसद काकली घोष दस्तीदार ने पहले ही दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस इसी तरह गायब हो जाएगी और भाजपा के हाथों को और मजबूत करेगी। देश और राज्य में फासीवादी ताकतों का उदय हुआ है। राजनीतिक स्थिति एक जगह स्थिर नहीं है। आफत गई है और विपदा बढ़ी है—यह बात आम जनता को समझानी होगी। समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण की स्थितियों में बदलाव आएगा, जिसके कुछ उदाहरण अभी से सामने आ रहे हैं। मीडिया में भाजपा की जमकर तारीफ और प्रचार किया जा रहा है। एक तरफ देश की ईंधन ,सुरक्षा और अर्थव्यवस्था खतरे में है और देश की आत्मनिर्भरता पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ कॉर्पोरेट के पैसों से भाजपा के सुशासन का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। जनजीवन के संकट को छिपाया जा रहा है। वामपंथी समाज के वंचित वर्ग, श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों, किसानों, खेत मजदूरों, कॉलोनीवासियों और प्रवासी मजदूरों सहित सभी के विकास और अर्थव्यवस्था में सबकी हिस्सेदारी चाहते हैं। लेकिन इसके लिए जनता को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। विभाजन और नफरत के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए ही कॉमरेड मृणाल चक्रवर्ती को याद करना जरूरी है।
सलीम ने कहा कि भाजपा के सुशासन का प्रचार करने के लिए अभी दो तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी हैं, तो दूसरी तरफ मीठी-मीठी बातें करने वाले भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य हैं। उन्होंने पहले कहा था कि तृणमूल कांग्रेस के अपराधियों को भाजपा में जगह नहीं दी जाएगी, फिर पार्टी में शामिल होने पर तीन-चार महीने की समयसीमा तय की, और उसके बाद 'अच्छी तृणमूल कांग्रेस और बुरी तृणमूल' की बात करने लगे। लेकिन हम देख रहे हैं कि तृणमूल से लोग लगातार भाजपा में शामिल हो रहे हैं। भाजपा की सरकार इस राज्य से चल ही नहीं रही है, अपनी कैबिनेट तय करने के लिए भी इन्हें बार-बार दिल्ली जाना पड़ रहा है। बंगाल की लंबी ऐतिहासिक संस्कृति और मूल्य सब कुछ खतरे में हैं और दिल्ली-नागपुर से नियंत्रित हो रहे हैं। इससे बंगाल की रक्षा करना ही वामपंथियों के सामने असली चुनौती है। तृणमूल कांग्रेस यह लड़ाई नहीं लड़ेगी, वामपंथियों को ही लड़ना होगा।
इससे पहले, शोक सभा की शुरुआत में बिमान बसु, मोहम्मद सलीम, श्रीदीप भट्टाचार्य, गौतम देब, रबीन देब, रेखा गोस्वामी, पलाश दास सहित सीपीआई (एम) के नेताओं, फॉरवर्ड ब्लॉक के संजीव चटर्जी, आरएसपी के मिहिर पाल, सीपीआई के शैबाल घोष सहित वाम मोर्चे और उत्तर 24 परगना जिले के नेताओं तथा जनसंगठनों के पदाधिकारियों ने कॉमरेड मृणाल चक्रवर्ती के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। दिवंगत चक्रवर्ती की पत्नी नंदिनी चक्रवर्ती, उनके बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी पुष्प अर्पित किए।
सभा में बिमान बसु ने कहा कि समाज और राजनीति के हित में जनता को संगठित करने में कॉमरेड मृणाल चक्रवर्ती के योगदान को हम याद कर रहे हैं। वर्तमान समय बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल जनता से पूरी तरह कट चुकी है। उनके प्रतिनिधियों को सड़कों पर 'चोर' के नारे सुनने पड़ रहे हैं। आज भी बसिरहाट के एक इलाके से बोरे भर-भरकर नकदी बरामद हुई है। इस तरह का माहौल बनाने में जिन लोगों ने मदद की, वही आज राज्य की सत्ता में हैं। अतीत का जनसंघ ही आज की भाजपा है। वे लोगों के लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को छीनने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों के सामाजिक आंदोलनों के रास्ते में बाधा बने इस नए फासीवाद के उदय के प्रति राज्य की जनता को सतर्क करना होगा। गरीब और मेहनती लोगों के हितों के खिलाफ नीतियों के खिलाफ समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर लड़ना होगा। कॉमरेड मृणाल चक्रवर्ती को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए धर्म, जाति और भाषा के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिशों के खिलाफ आंदोलन और संघर्ष खड़ा करना होगा।
श्रीदीप भट्टाचार्य ने कहा कि एक घटनापूर्ण जीवन ने ही कॉमरेड मृणाल चक्रवर्ती को एक सच्चे कम्युनिस्ट के रूप में गढ़ा था। केवल उन्हें याद करना काफी नहीं है, बल्कि उनके जीवन से सीख लेकर हमें खुद को एक सच्चा कम्युनिस्ट बनाना होगा। इस अवसर पर गौतम देब ने कहा कि पार्टी संचालन के मामले में मृणाल ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष जोर देते थे। तृणमूल कांग्रेस के शासन में गाँव डरे और सहमे हुए थे, लोग डर के मारे बोल नहीं पाते थे। उस डर पर विजय पाने के लिए उन्होंने ग्रामीण जनता के साथ गहरा संपर्क स्थापित किया था। सभा की अध्यक्षता करते हुए और शोक प्रस्ताव पेश करते हुए पलाश दास ने कहा कि कॉमरेड मृणाल चक्रवर्ती के सानिध्य में हमने जो कुछ भी सीखा है, उसे सही तरीके से लागू करना होगा। जन आंदोलनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाकर ही हम दिवंगत नेता को अपनी सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।
साभार:-गणशक्ति
दिनांक: 28/5/26
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