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तृणमूल-कांग्रेस की अहमियत वापस लाने की कोशिश कर रही है भाजपा- मोहम्मद सलीम

श्रेया जायसवाल•31 मई 20264 मिनट पठन19 बार पढ़ा गया

"आरएसएस की पत्रिका में सीपीआई (एम) को लेकर भाजपा को आगाह किया गया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद भी वामपंथी लाल झंडा हाथ में लेकर लोगों के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध कैसे कर पा रहे हैं! यही वजह है कि वे मानते हैं कि तृणमूल-कांग्रेस को फिर से जिंदा करना जरूरी है। लेकिन पुलिस के घेरे के बिना तो तृणमूल-कांग्रेस के लिए कुछ भी करना मुमकिन नहीं है, इसलिए आज की घटना के बाद शायद आप देखेंगे कि उन्हें फिर से जेड प्लस (Z+) श्रेणी की सुरक्षा दे दी जाएगी। महत्वहीन तृणमूल को फिर से महत्वपूर्ण बनाने के लिए पीछे से साजिश रची जा रही है। "

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

तृणमूल-कांग्रेस की अहमियत वापस लाने की कोशिश कर रही है भाजपा-  मोहम्मद सलीम

तृणमूल-कांग्रेस की अहमियत वापस लाने की कोशिश कर रही है भाजपा:

मोहम्मद सलीम

पश्चिम बंगाल: लुटेरों और कटमनी खाने वाले भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करके लोगों की लूटी हुई रकम वापस दिलाने के बजाय, अंडे फेंककर तृणमूल-कांग्रेस की अहमियत वापस लाने की कोशिश भाजपा कर रही है। शनिवार को सोनारपुर में तृणमूल-कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को घेरकर हुए विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि वामपंथियों के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल के गरीब आम लोग, अल्पसंख्यक, महिलाएँ और बेदखली का सामना कर रहे हॉकर व झुग्गीवासी जिस तरह विरोध कर रहे हैं, उसे देखकर आरएसएस आतंकित है।भाजपा इसलिए पीछे से योजना बनाकर महत्वहीन हो चुकी तृणमूल-कांग्रेस को फिर से महत्वपूर्ण बनाने की कोशिश कर रही है।

मोहम्मद सलीम ने कहा कि चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी डर के मारे दुबककर घरों में घुस गए थे। तृणमूल-कांग्रेस के खिलाफ आम जनता में बहुत नफरत और गुस्सा है; 'चोर-चोर' चिल्लाना या अंडे फेंकना लोगों की गलती नहीं है। लेकिन आज जो कुछ भी हुआ, वह दरअसल पीछे से बनाई गई एक योजना है जिसके जरिए तृणमूल-कांग्रेस को फिर से जिंदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्हें उनके खोल से बाहर निकालकर सड़कों पर खड़ा करने की कोशिश हो रही है। हम पहले ही देख चुके हैं कि आरएसएस की पत्रिका में सीपीआई (एम) को लेकर भाजपा को आगाह किया गया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद भी वामपंथी लाल झंडा हाथ में लेकर लोगों के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध कैसे कर पा रहे हैं! यही वजह है कि वे मानते हैं कि तृणमूल-कांग्रेस को फिर से जिंदा करना जरूरी है। लेकिन पुलिस के घेरे के बिना तो तृणमूल-कांग्रेस के लिए कुछ भी करना मुमकिन नहीं है, इसलिए आज की घटना के बाद शायद आप देखेंगे कि उन्हें फिर से जेड प्लस (Z+) श्रेणी की सुरक्षा दे दी जाएगी। महत्वहीन तृणमूल को फिर से महत्वपूर्ण बनाने के लिए पीछे से साजिश रची जा रही है।

अंडे फेंककर अस्थायी तनाव पैदा करने के बजाय कानूनी कदम क्यों नहीं उठाए गए, सलीम ने यह सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि कौन बदमाश हैं, अन्यायी हैं, चोर-जालसाज हैं और किसने कटमनी खाई है। अस्थायी तनाव की आग से कोई फायदा नहीं होगा, हमने कहा था कि लूट और भ्रष्टाचार का पैसा आम जनता को वापस देना होगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के जीतने के बाद भी उन्होंने कटमनी और भ्रष्टाचार को लेकर खूब हो-हल्ला मचाया था, लेकिन उसके बाद 6 सालों तक सौ दिन के रोजगार (मनरेगा) और आवास योजना के पैसों को लेकर कुछ नहीं किया। और अब किसी को हाफ पैंट पहनाकर, तो किसी को अंडरवियर में सड़क पर घुमाकर पुलिस क्या कर रही है! तृणमूल की गुलाम बनकर पुलिस ने जो किया था, अब भाजपा की गुलाम बनकर वही कर रही है। इसीलिए हमने चुनावी सुधारों के साथ-साथ पुलिस व्यवस्था में भी सुधार की माँग की है।

तृणमूल-कांग्रेस नेताओं के बजाय आम जनता पर हो रहे हमलों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए सलीम ने कहा कि चुनाव के बाद की हिंसा में गरीब लोग ही शिकार हो रहे हैं। मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों पर अत्याचार किया जा रहा है; हॉकरों, छोटे दुकानदारों और झुग्गीवासियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। भाजपा के सत्ता में आने के बाद असम से लेकर गुजरात तक हमने यही देखा है। भाजपा की जीत असल में अडानी-अंबानी जैसे पूंजीपतियों की जीत है। आम लोग, यहाँ तक कि जिन्होंने सोचा था कि इस बार उन्हें अन्नपूर्णा योजना का पैसा मिलेगा, वे भी देख रहे हैं कि उलटा ही घोटाला हो रहा है। सुशासन के लिए हम चाहते थे कि राज्य सरकार लोगों को और अधिक समावेशी कार्यों में शामिल करे, लेकिन फासीवादी इसके बजाय लोगों को बाहर करने की व्यवस्था करते हैं। वे मताधिकार से, नागरिकता से या सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सूची से लोगों का नाम हटा देते हैं। शुरुआत में कुछ लोगों को लग सकता है कि धर्म या भाषा देखकर नाम हटाया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि इस बेदखली के खतरे से कोई भी सुरक्षित नहीं है। ईंधन से लेकर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं और मोदी कह रहे हैं कि खर्च कम करो। अन्नपूर्णा योजना का फॉर्म चाहे 12 पन्नों का हो या 24 पन्नों का, अगर तृणमूल-कांग्रेस की लूट और भ्रष्टाचार का पैसा बरामद नहीं किया गया, तो वे पैसे लाएंगे कहाँ से? ये लोग गरीबों को देने नहीं, बल्कि लूट का कारोबार बढ़ाने आए हैं।

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति , 31 मई,2026

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तृणमूल-कांग्रेस की अहमियत वापस लाने की कोशिश कर रही है भाजपा- मोहम्मद सलीम

प्रकाशित: 31 मई 2026 • 4 मिनट पठन

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