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सरकारी बस ही नहीं तो मुफ्त सफर का क्या फायदा!

श्रेया जायसवाल•02 जून 20265 मिनट पठन6 बार पढ़ा गया

सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त सफर की सुविधा लागू होने के बावजूद, राज्य की महिला यात्रियों को इसका लाभ उठाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार से महिलाओं की मांग है, "डिपो और सड़कों पर सरकारी बसें हैं ही नहीं! पहले सरकारी बसों की संख्या बढ़ाइए, वरना हम इस मुफ्त सफर की सुविधा का लाभ कैसे उठा पाएंगे?"

सरकारी बस ही नहीं तो मुफ्त सफर का क्या फायदा!

सरकारी बस ही नहीं तो मुफ्त सफर का क्या फायदा!

शुरुआत में ही महिलाओं को हुआ कड़वा अनुभव

पश्चिम बंगाल: ऑफिस के समय (अवर) बसों में भारी भीड़ उमड़ रही है, और कोई चारा न देख एक समय के बाद कंडक्टर यात्रियों को बस में नहीं चढ़ा पा रहे हैं। बसों के अंदर पैर रखने तक की जगह नहीं है, और इसका मुख्य कारण सरकारी बसों की भारी कमी है। नतीजतन, सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त सफर की सुविधा लागू होने के बावजूद, राज्य की महिला यात्रियों को इसका लाभ उठाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार से महिलाओं की मांग है, "डिपो और सड़कों पर सरकारी बसें हैं ही नहीं! पहले सरकारी बसों की संख्या बढ़ाइए, वरना हम इस मुफ्त सफर की सुविधा का लाभ कैसे उठा पाएंगे?"

सोमवार से राज्य में सरकारी बसों में यात्रा के लिए महिला यात्रियों को पैसे देकर टिकट खरीदने की जरूरत नहीं पड़ रही है। सुबह से यह सेवा लागू होने के बाद जहां एक तरफ महिला यात्रियों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई, वहीं दूसरी तरफ शहर के कई व्यस्त इलाकों में सरकारी बसों की कमी के कारण महिलाएं इस सुविधा से वंचित रह जा रही हैं, ऐसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

विभिन्न रूटों पर महिलाओं की परेशानी

आईटी सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं के एक बड़े हिस्से को नियमित रूप से साल्ट लेक और न्यूटाउन तक आना-जाना पड़ता है। बेहाला, ठाकुरपुकुर, तारातला से न्यूटाउन तक सरकारी बसें न के बराबर हैं। दूसरी ओर, गरिया सरकारी बस स्टैंड से डब्ल्यूबीटीसी (WBTC) की बस एएस-3 (AS-3) न्यूटाउन तक जाती तो है, लेकिन इसमें बहुत समय लगता है। न्यूटाउन के आईटी सेक्टर में काम करने वाली गरिया-पाटुली की 45 वर्षीय एक महिला निवासी ने बताया कि इस बस के लिए इतना लंबा इंतजार करना पड़ता है कि अगर कॉर्पोरेट ऑफिस में बायोमेट्रिक रिकॉर्ड में समय पर हाजिरी दर्ज न हो, तो नौकरी पर बन सकती है। इसके अलावा, इस समय रासबिहारी, हाजरा या एक्साइड इलाके से सियालदह आने के लिए कोई सीधी सरकारी बस नहीं है। जो बसें उपलब्ध हैं, उनसे सीधे सियालदह आने का कोई विकल्प नहीं है। सरकारी बस से सियालदह जाने के लिए धर्मतला होकर घूमकर जाना पड़ता है। साथ ही, रासबिहारी या हाजरा से चौरस्ता या ठाकुरपुकुर आने के लिए भी इस समय कोई सरकारी बस नहीं चल रही है।

गार्डन रीच इलाके की एक महिला निवासी ने सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए कहा "बांधाबटतला से तारातला जाने के लिए पहले 12, 12/1 और 1बी बसें मिलती थीं। अब घंटों खड़े रहने के बाद भी इन तीनों में से एक भी बस नजर नहीं आती। और गार्डन रीच से हावड़ा जाने के लिए एकमात्र सरकारी बस जो बची है, वह सी-7 (C-7) है। लेकिन सुबह ऑफिस के समय सी-7 में पैर रखने की जगह नहीं होती। इसी वजह से मैं पिछले 7 सालों से बांधाबटतला से हावड़ा स्थित अपने ऑफिस जाने के लिए प्राइवेट बस 12-ए का इस्तेमाल कर रही हूँ।"

यह तो रही सुबह की तस्वीर। सोमवार दोपहर के बाद से महिला यात्रियों की ओर से यह शिकायत भी आई कि डिपो में जाने पर बसें नहीं मिल रही थीं। दोपहर में ठाकुरपुकुर 3-ए बस स्टैंड पर ठाकुरपुकुर बाजार इलाके की एक निवासी को सिर्फ एक 12 डी/1 बस दिखाई दी थी।

बसों के आंकड़ों की हकीकत

परिवहन श्रमिक आंदोलन के अखिल भारतीय नेता जीवन साहा ने बताया कि इस समय पूरे राज्य में सुबह और शाम मिलाकर एसबीएसटीसी (SBSTC) की केवल 650 बसें ही चालू हालत में हैं। कोलकाता शहर में एसबीएसटीसी की कोई बस नहीं चलती है। शहर में दोनों पालियों (सुबह-शाम) को मिलाकर सीएसटीसी (CSTC) की लगभग 650, सीटीसी (CTC) की 150 और सर्विस ट्रांसपोर्ट की केवल 100 बसें ही चल रही हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो शहरी क्षेत्रों में कुल मिलाकर ज्यादा से ज्यादा 850 से 900 सरकारी बसें ही नियमित रूप से चल रही हैं, जो कोलकाता की आबादी के लिहाज से बेहद कम हैं। इनमें से उत्तर बंगाल में केवल 450 के करीब बसें चल रही हैं। इसलिए, उत्तर बंगाल या दार्जिलिंग की लंबी दूरी की मुफ्त यात्रा को लेकर लोगों के बीच जो उम्मीदें जगाई जा रही हैं, उसकी वास्तविकता न के बराबर है।

इस संबंध में सीटू (CITU) नेता तरुण बनर्जी ने बताया कि राज्य में सीएसटीसी की जितनी बसें इस समय चालू हैं, उनमें से लगभग सभी सिटी (शहरी) बसें हैं। इनमें से सुबह 284 और शाम को 166 बसें चलती हैं। वातानुकूलित (एसी) बसों सहित पूरे दिन में औसतन 210 से 220 बसें और सीटीसी की शहरी व लंबी दूरी की कुल मिलाकर 150 से 160 बसें चल रही हैं। इसके अलावा, एनबीएसटीसी (NBSTC) की कुल 622 बसें सक्रिय हैं।

सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने को लेकर सुबह से ही विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली महिला यात्री चर्चा कर रही हैं। उनमें से कुछ का यह भी कहना है कि जिस तरह से सोमवार सुबह से सरकारी बसों में यात्रियों की भीड़ बढ़ी है, उसे देखते हुए अगर सरकार ने बसों की संख्या बढ़ाने और सरकारी परिवहन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में सरकारी परिवहन सेवा पूरी तरह चरमरा जाएगी।

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति | 2 जून,2026

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