वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 | Wednesday, 14 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराज्य

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राज्य

भाजपा के खिलाफ भी तेजी से गुस्सा बढ़ रहा है, लड़ाई में उतरें- मोहम्मद सलीम

श्रेया जायसवाल•07 जून 20265 मिनट पठन29 बार पढ़ा गया

तृणमूल-कांग्रेस वास्तव में कोई राजनीतिक दल नहीं था; कुछ भ्रष्ट लोगों ने ममता बनर्जी का 'फैन क्लब' बनाकर खुद की लूट-खसोट की प्रक्रिया को सुरक्षित करने के लिए एक कंपनी बनाई थी। चुनाव में हारने के बाद अब वे सड़कों पर नजर नहीं आ रहे हैं। लोगों ने उन्हें कीड़े-मकोड़ों की तरह झाड़कर फेंक दिया है। अब मेहनतकश लोगों के हितों की रक्षा के लिए वामपंथियों को ही लड़ना होगा। विभाजन की राजनीति के खिलाफ एकजुट जन-प्रतिरोध खड़ा करना होगा।

भाजपा के खिलाफ भी तेजी से गुस्सा बढ़ रहा है, लड़ाई में उतरें- मोहम्मद सलीम

भाजपा के खिलाफ भी तेजी से गुस्सा बढ़ रहा है, लड़ाई में उतरें

जिस तरह तृणमूल-कांग्रेस के खिलाफ लोगों के गुस्से का पहाड़ खड़ा हो गया था, ठीक उसी तरह भाजपा के खिलाफ भी लोगों का असंतोष तेजी से बढ़ रहा है। शनिवार को जलपाईगुड़ी में सीपीआई (एम) की एक कार्यकर्ता बैठक में पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि तृणमूल-कांग्रेस की विदाई तो हो गई, लेकिन राज्य के लोगों की समस्याएँ खत्म नहीं हुईं। 'आपदा' गई तो 'विपत्ति' आ गई है। नई भाजपा सरकार मेहनतकश लोगों के हितों के खिलाफ काम कर रही है, उनके खिलाफ भी जनता का गुस्सा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में मजदूर, किसान, खेत मजदूर, चाय बागान श्रमिक, हॉकर और छोटे व्यापारियों सहित सभी मेहनतकश लोगों को एकजुट कर संघर्ष की तैयारी करनी होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन का इस्तेमाल कर तृणमूल-कांग्रेस ने भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और आतंक की राजनीति चलाई है। इसी वजह से चुनाव में लोगों ने तृणमूल-कांग्रेस को नकार दिया। लेकिन तृणमूल-कांग्रेस की विदाई का मतलब समस्याओं का समाधान नहीं है। तृणमूल-कांग्रेस वास्तव में कोई राजनीतिक दल नहीं था; कुछ भ्रष्ट लोगों ने ममता बनर्जी का 'फैन क्लब' बनाकर खुद की लूट-खसोट की प्रक्रिया को सुरक्षित करने के लिए एक कंपनी बनाई थी। चुनाव में हारने के बाद अब वे सड़कों पर नजर नहीं आ रहे हैं। लोगों ने उन्हें कीड़े-मकोड़ों की तरह झाड़कर फेंक दिया है। अब मेहनतकश लोगों के हितों की रक्षा के लिए वामपंथियों को ही लड़ना होगा। विभाजन की राजनीति के खिलाफ एकजुट जन-प्रतिरोध खड़ा करना होगा।

शनिवार को जलपाईगुड़ी शहर के रवींद्र भवन में सीपीआई (एम)की जलपाईगुड़ी जिला समिति द्वारा बुलाई गई इस कार्यकर्ता बैठक की अध्यक्षता पार्टी की राज्य समिति के सदस्य सलिल आचार्य ने की। इस अवसर पर राज्य सचिव मंडल के सदस्य जियाउल आलम, जिला सचिव पीयूष मिश्रा सहित अन्य नेता और जिले के विभिन्न हिस्सों से आए कार्यकर्ता उपस्थित थे।

बैठक में जियाउल आलम ने कहा "जनता तृणमूल-कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार और तानाशाही का अंत चाहती थी। लेकिन नई सरकार भी हॉकरों को हटाने, रेलवे कॉलोनियों और झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में बुलडोजर चलाकर बेदखली अभियान चला रही है, जिससे गरीब लोगों की आजीविका अनिश्चितता के मुहाने पर पहुँच गई है। जो सरकार मजदूरों और किसानों के वोटों से चुनी गई है, वही सरकार अब कॉर्पोरेट हितों को प्राथमिकता देकर गरीबों को उजाड़ रही है। बड़े पूँजीपतियों को फायदा पहुँचाने की नीति का क्रूर असर हॉकरों को हटाए जाने में साफ दिख रहा है।"

तृणमूल-कांग्रेस और भाजपा के राजनीतिक रुख के बारे में मोहम्मद सलीम ने कहा कि लंबे समय से दोनों दल एक-दूसरे पर हमला करने का नाटक करके इस राज्य में विभाजन की राजनीति को मजबूत करते आ रहे हैं। धार्मिक ध्रुवीकरण, जातीय विभाजन और डर का माहौल बनाकर उन्होंने चुनावी फायदा उठाया है। लेकिन वास्तव में इस राजनीति के कारण आम जनता को ही नुकसान हुआ है। चुनाव से पहले तरह-तरह के वादे किए गए, लेकिन सत्ता में आते ही गरीबों, कामगारों और हाशिए के लोगों पर प्रशासनिक हमले शुरू हो गए हैं। सांप्रदायिक नफरत फैलाकर लोगों की असली समस्याओं को छिपाने की कोशिश की जा रही है।

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हिंदू, मुस्लिम, आदिवासी, राजबंशी, नेपाली, मतुआ समेत सभी गरीब लोगों की समस्याएँ एक जैसी हैं। बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का संकट तथा आजीविका की अनिश्चितता आज सभी की समस्या बन चुकी है। इसलिए मतभेद की राजनीति नहीं, बल्कि वर्ग-आधारित एकजुट आंदोलन ही इस हमले का सही जवाब हो सकता है।

शारदा, नारदा और शिक्षक भर्ती घोटाले सहित विभिन्न वित्तीय घोटालों का जिक्र करते हुए सलीम ने कहा कि लूटा गया पैसा बरामद कर पीड़ित लोगों को वापस लौटाने की माँग को तेज करना होगा। उन्होंने भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। कॉर्पोरेट संस्कृति के आक्रमण के कारण बंगाल की अपनी लोक संस्कृति, भवाईया, सारीगान, आदिवासी संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रीय परंपराएं लगातार सिमटती जा रही हैं। लोगों की अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपरा की रक्षा का संघर्ष भी जन आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सभा में नेताओं ने कहा कि पशुपालन से जुड़े बड़ी संख्या में लोग वर्तमान में अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। मवेशियों की खरीद-बिक्री, परिवहन और विभिन्न प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण कई छोटे व्यापारियों और पशुपालकों की आजीविका प्रभावित हो रही है।जिले की वर्तमान राजनीतिक और सांगठनिक स्थिति पर जिला सचिव पीयूष मिश्रा ने कहा कि चाय बागान क्षेत्र, डुआर्स के इलाके, कृषि क्षेत्र, शहरों और ग्रामीण इलाकों के बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं को लेकर वामपंथी नेतृत्व से संपर्क कर रहे हैं।चाय श्रमिकों की मजदूरी, किसानों की बढ़ती लागत, युवाओं का रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं का संकट, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और नदियों से बालू-पत्थर उठाने वाले श्रमिकों की समस्याएं—हर क्षेत्र में लोगों का असंतोष बढ़ रहा है। इन लोगों को संघर्ष से जोड़ना ही इस समय मुख्य काम है।

.

.

साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

भाजपा के खिलाफ भी तेजी से गुस्सा बढ़ रहा है, लड़ाई में उतरें- मोहम्मद सलीम

प्रकाशित: 07 जून 2026 • 5 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

362 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
राज्य

मुखौटा हट गया है, अब लड़ाई असली चेहरे से है - मोहम्मद सलीम

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

17 जून 2026

राज्य

हिंदू-मुस्लिम सभी बुलडोजर के शिकार होंगे: मोहम्मद सलीम

"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

17 जून 2026

राज्य

बुलडोजर नीति के खिलाफ भी लड़ेंगे वामपंथी: मोहम्मद सलीम

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव

14 जून 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

राज्य

राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement