बड़े कॉर्पोरेट हितों की रक्षा के लिए छोटे व्यापारियों और हाॅकरों की आजीविका को संकट में डाला जा रहा है। .. जब स्टेशन परिसर में बड़ी कंपनियों के व्यापार पर कोई रोक नहीं है, तो गरीब हाॅकरों को ही बेदखली का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
जन समाचार मंच
बड़े कॉर्पोरेट हितों की रक्षा के लिए छोटे व्यापारियों और हाॅकरों की आजीविका को संकट में डाला जा रहा है। .. जब स्टेशन परिसर में बड़ी कंपनियों के व्यापार पर कोई रोक नहीं है, तो गरीब हाॅकरों को ही बेदखली का सामना क्यों करना पड़ रहा है?


7 जून- रेलवे स्टेशन और स्टेशन परिसर में हॉकरों को हटाए जाने के खिलाफ सीआईटीयू ने आंदोलन को और तेज करने का आह्वान किया है। संगठन की पहल पर आगामी 10 जून को पूर्व रेलवे के मुख्यालय, फेयरली प्लेस के सामने एक विशाल रैली और विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। संगठन का दावा है कि इस कार्यक्रम में हाकर्स, रेलवे बस्ती के निवासी, यात्री और विभिन्न क्षेत्रों के कामकाजी लोग हिस्सा लेंगे।
सीआईटीयू के राज्य अध्यक्ष अनादि साहू और महासचिव जियाउल आलम ने बताया कि जिन रेलवे बस्ती वासियों को बेदखली का नोटिस मिला है या जिन पर बेदखली का खतरा मंडरा रहा है, उनके साथ-साथ उन हाॅकरों को भी इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया गया है जिनकी आजीविका संकट में है। उनका कहना है कि रेलवे के हाॅकरों की आजीविका और अस्तित्व आज खतरे में है, जिसके कारण हर दिन नए-नए हाॅकर्स इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं।
सीआईटीयू का दावा है कि हाॅकरों को हटाए जाने के खिलाफ कानूनी और जन आंदोलन, दोनों ही रास्तों पर लड़ाई जारी है। अदालत का रुख करने के कारण कुछ रेलवे बस्तियों को हटाए जाने पर अस्थायी रूप से रोक लगाना संभव हुआ है। इसके साथ ही, विभिन्न स्टेशन क्षेत्रों में जनता के विरोध के कारण कुछ मामलों में बेदखली अभियान को भी रोका जा सका है।
सीआईटीयू नेतृत्व का आरोप है कि बड़े कॉर्पोरेट हितों की रक्षा के लिए छोटे व्यापारियों और हाॅकरों की आजीविका को संकट में डाला जा रहा है। उनका सवाल है कि जब स्टेशन परिसर में बड़ी कंपनियों के व्यापार पर कोई रोक नहीं है, तो गरीब हाॅकरों को ही बेदखली का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
10 जून की रैली के अंत में पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक (General Manager) को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन का दावा है कि यह कार्यक्रम सिर्फ हाॅकरों का नहीं, बल्कि आजीविका और अधिकारों की रक्षा की लड़ाई में शामिल सभी मेहनतकश लोगों का है।
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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति| 8 जून 2026
अपलोडर: श्रेया जायसवाल
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अपलोडर: श्रेया जायसवाल • प्रकाशित: 08 जून 2026 • 2 मिनट पठन

सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पार्टी असल में आरएसएस के इशारे पर दलाल की भूमिका निभाती आ रही है। दरअसल, इस राज्य से वामपंथी राजनीति के दायरे को सिकोड़ना ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य था। राज्य में आज भले ही तृणमूल कांग्रेस नहीं है, लेकिन वामपंथी आज भी मैदान में हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
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"जब आग लगती है, तो वह धर्म नहीं देखती, हिंदू-मुस्लिम का भेद किए बिना सभी के घरों को जलाकर खाक कर देती है। बीजेपी की बुलडोजर राजनीति के खतरे से भी कोई नहीं बचेगा। सभी इसके शिकार होंगे। इसलिए प्रतिरोध की लड़ाई में सभी लोगों को एकजुट होना होगा।"
सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव
17 जून 2026

हर उस व्यक्ति तक पहुँचना होगा जो मेहनतकश है, सताया हुआ है या प्रताड़ित है। भाजपा ने एसआईआर (SIR) के नाम पर एक बड़े वर्ग के लोगों से उनका मताधिकार छीन लिया है। इन सभी लोगों को एकजुट करना होगा। उनके मताधिकार सहित सभी नागरिक अधिकारों को वापस लाना होगा। जनता की रोटी-रोजी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और पीने के पानी जैसी स्थानीय मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष करना होगा। भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकता, भाईचारा और रोजगार के लिए लड़ना होगा। बुलडोजर राज के खिलाफ लाल झंडा पहले ही उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने डर का माहौल बढ़ाया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जनता का यह डर टूटे। अन्याय के खिलाफ खड़े होकर हक के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
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केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026
श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।
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