तृणमूल-कांग्रेस की तरह ही सत्ता का घमंड दिखा रही है भाजपा
मोहम्मद सलीम
कूचबिहार: जादवपुर में 8 जून को भाजपा की पुलिस और केंद्रीय बलों द्वारा की गई 'बुलडोजर तबाही' के खिलाफ विरोध जताते हुए सीपीआई (एम)के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा है कि सरकार में बैठकर, बिना किसी कानून की परवाह किए भाजपा तृणमूल-कांग्रेस की तरह ही सत्ता के नशे में चूर दिख रही है। चुनाव से पहले उनका प्रतीक 'कमल का फूल' था, और जीतते ही सत्ता के प्रदर्शन का प्रतीक 'बुलडोजर' बन गया है। वे बेदखली करके गरीब और मेहनतकश लोगों के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर रहे हैं। सत्ता के इसी घमंड ने तृणमूल-कांग्रेस को डुबोया है, और यही भाजपा को भी डुबोएगा।
सोमवार को कूचबिहार में पार्टी के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए मोहम्मद सलीम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रविवार रात को जादवपुर स्टेशन के पास के इलाके में हॉकरों को हटाने के लिए की गई पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ डटने वाले वामपंथी कार्यकर्ताओं सहित सभी प्रदर्शनकारियों को मैं 'लाल सलाम' करता हूँ। हमारी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता हमले के शिकार हुए हैं, घायल हुए हैं; सुजन चक्रवर्ती के सिर में चोट आई है। हॉकरों को हटाए जाने का विरोध करने पर नाट्यकर्मी जयराज भट्टाचार्य का सिर फोड़ दिया गया है। नाट्यकर्मी जयराज भट्टाचार्य तपन थिएटर में 'फ्रेंकनस्टीन' नाटक का शो खत्म कर, हॉकरों को हटाए जाने की खबर पाकर रात में ही जादवपुर पहुँचे थे और वहां उन पर हमला हुआ। ये लोग प्रदर्शनकारी हैं, टॉलीगंज के तृणमूल के किराए के गुंडे नहीं। जनता आज असहाय है, और हमें इस असहाय जनता के साथ खड़ा होना होगा। वरना, समाज के बाकी हिस्सों के लोग भी कल असहाय हो जाएंगे।
भाजपा की बुलडोजर राजनीति का विरोध करते हुए सलीम ने कहा कि उत्तर प्रदेश, असम, नोएडा, गुड़गांव और दिल्ली में भाजपा ने जो किया है, यहाँ भी सरकार में आते ही उन्होंने मेहनतकश लोगों पर वही हमला शुरू कर दिया है। एक तरफ गरीबों को बेदखल किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ तृणमूल-कांग्रेस के छोटे-मोटे चोरों को पकड़ा जा रहा है, जबकि बड़े मगरमच्छ 'तत्काल भाजपा' बनते जा रहे हैं। गरीबों पर हमला बंद कर भाजपा चुनाव से पहले दिए गए अपने वादों को पूरा करे। क्या चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि नतीजा आते ही हॉकरों को हटा देंगे? रेलवे की जमीन आई कहाँ से? यह जमीन तो ग्रामीणों की थी। विकास के लिए, जनहित में इसे लिया गया था। सरकार अब जनता के हित में नहीं, बल्कि अडानी और अंबानी की जमीन की भूख मिटाने के लिए बेदखली कर रही है। भाजपा सरकार अब जमीन को सिर्फ पैसे के रूप में देख रही है। तृणमूल-कांग्रेस ने भी यही किया था। अगर नई रेल लाइन बिछाने के लिए जमीन ली जाती तो समझ में आता। विकास में हमने कभी बाधा नहीं डाली। लेकिन कॉर्पोरेट हितों के लिए हॉकरों की रोजी-रोटी पर हमला करके इसकी शुरुआत की गई है, और इस कॉर्पोरेटाइजेशन (निजीकरण) का मतलब है कि हर किसी का पेशा और अधिकार खतरे में पड़ जाएगा। बुलडोजर से केवल तोड़ा जा सकता है, कुछ बनाया नहीं जा सकता।
इस पत्रकार वार्ता में मोहम्मद सलीम के साथ सीपीआई (एम)केंद्रीय कमेटी की सदस्य मीनाक्षी मुखर्जी, पार्टी नेता अलकेश दास और पार्टी के जिला सचिव अनंत राय भी उपस्थित थे। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि जिस तरह गर्मी में बर्फ पिघलती है, चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस उससे भी तेज गति से पिघलकर पानी हो रही है। अब वही पानी भाजपा में जाकर फिर से जमना (इकट्ठा होना) चाह रहा है। इस बार चुनावी लड़ाई लुटेरों के खिलाफ मेहनतकश लोगों की थी। मगर चुनाव के बाद लूट मचाने वाले तृणमूल के विधायक, सांसद और नेता भाजपा में शरण पा रहे हैं। ममता बनर्जी की तरह ही भाजपा भी राज्य में एक 'प्रायोजित विपक्ष' (सजाया हुआ विपक्ष) तैयार करने की कोशिश कर रही है और मेहनतकश लोगों पर हमले कर रही है। यह लाल झंडा हमेशा इन असहाय लोगों के साथ रहेगा। सलीम ने कहा कि चाय बागान इलाकों में भाजपा जीती है। इसके बाद कैबिनेट की एक के बाद एक बैठकें हो रही हैं, उत्तरकन्या में दो बैठकें हुईं, लेकिन चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी का मुद्दा कहीं उठा ही नहीं! अब वे 'असम मॉडल' की बात कर रहे हैं। इस असम मॉडल का मतलब तो वहां के मुख्यमंत्री का एक के बाद एक चाय बागानों का मालिक बनना है। क्या वही मॉडल इस राज्य में भी लागू होगा?
तृणमूल सांसदों के एनडीए (NDA) में शामिल होने की चर्चा पर सलीम ने कहा कि हमने पहले ही कहा था कि इनका गोदाम एक ही है, बस शोरूम अलग-अलग हैं। अब लोग तृणमूल-कांग्रेस के शोरूम से निकलकर भाजपा के शोरूम में जा रहे हैं। आरएसएस ने ही राज्य में तृणमूल-कांग्रेस नाम का शोरूम खोला था, जो अब बंद होने की कगार पर है।
पत्रकारों के एक अन्य सवाल के जवाब में सलीम ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी (संकेतात्मक नाम) अभी तक एक राजनीतिक दल नहीं बन पाई है, लेकिन हम उनके आंदोलन को सलाम करते हैं। हमारे छात्र संगठन के नेतृत्व ने उनका साथ दिया है।
सीमा पर बांग्लादेशी कंटीले तारों की बाड़ और 'पुशबैक' (वापस भेजने) के मुद्दे पर मोहम्मद सलीम ने कहा कि कंटीले तारों की बाड़ जरूर लगाई जाए, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय सीमा कानूनों के दायरे में होना चाहिए। जीरो पॉइंट से 500 मीटर या 1000 मीटर दूर बाड़ लगाकर गरीब किसानों के घर और खेती की जमीन को बाड़ के उस पार न धकेला जाए। पुशबैक को लेकर भाजपा सरकार जो कर रही है, वह देश के और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। धर्म आधारित राजनीति करने के चक्कर में वे पड़ोसी देशों के साथ संबंध खराब कर रहे हैं।
इसी शाम बानेश्वर के बततल्ला में सीपीआई (एम)की एक कार्यकर्ता सभा को संबोधित करते हुए भी मोहम्मद सलीम ने कहा कि जो लोग तृणमूल-कांग्रेस के 15 साल के शासन में प्रताड़ित हुए, वे अब भाजपा के शासन में फिर से प्रताड़ित हो रहे हैं। 
लाल झंडे को उनके साथ खड़ा होना होगा। लुटेरों के खिलाफ लाल झंडे का आंदोलन जारी रहेगा। इस कार्यकर्ता सभा में अनंत राय, मीनाक्षी मुखर्जी, प्रणय कार्जी और धनेश्वर राय ने भी अपने विचार रखे। सभा की अध्यक्षता कुलीन राय ने की।
जादवपुर में हुई बेदखली और पुलिस के बर्बर हमले के विरोध में सोमवार को कूचबिहार शहर में माकपा द्वारा एक विरोध रैली भी निकाली गई। यह रैली माकपा के कूचबिहार जिला कार्यालय के सामने से शुरू होकर शहर की विभिन्न महत्वपूर्ण सड़कों से गुजरी और सरकार की इस बर्बरता की कड़ी निंदा की। इस रैली का नेतृत्व मोहम्मद सलीम, अनंत राय, अलकेश दास, महानंद साहा और वरिष्ठ नेता तारिणी राय आदि ने किया।
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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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