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भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा - मोहम्मद सलीम

श्रेया जायसवाल•10 जून 20264 मिनट पठन10 बार पढ़ा गया

"सीपीआई (एम)ने चुनाव से पहले जो कहा था, आज भी वही कह रही है। नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह लड़ाई आखिरी दम तक लड़नी होगी। अमित शाह ने कहा है— 'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट'। फासीवाद इसी तरह लोगों के अधिकार छीनना चाहता है। इसके लिए वे सरकार में आते ही सबसे पहले विपक्ष को खत्म करना चाहते हैं। "

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम)पश्चिम बंगाल के सचिव

भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा - मोहम्मद सलीम

भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा - मोहम्मद सलीम

स्वरूपनगर:

तृणमूल-कांग्रेस लाल झंडे को खत्म नहीं कर पाई, और भाजपा भी नहीं कर पाएगी। मंगलवार को उत्तर 24 परगना के स्वरूपनगर में सीपीआई (एम) की एक जनसभा में पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि एक खतरा टला तो उससे भी बड़ा खतरा आ गया है। इसे भी खदेड़ना होगा। लाल झंडे को मजबूती से थामकर हाट-बाजारों, गाँवों-देहातों और गली-मोहल्लों में सभी लोगों को एकजुट कर भाजपा के खिलाफ आर-पार की लड़ाई जारी रखनी होगी।

मतदाता सूची में सभी वैध मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने, ट्रिब्यूनल में आवेदन करने वालों के नामों का त्वरित निपटारा करने, बिना पुनर्वास के हॉकरों की बेदखली रोकने और सभी सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की जाँच जैसी माँगों को लेकर सीपीआई (एम)की बसीरहाट उत्तर एरिया कमेटी की ओर से एक जनसभा का आयोजन किया गया था। यह सभा बसीरहाट अनुमंडल के माटिया थाना अंतर्गत स्वरूपनगर बाजार इलाके में टाकी रोड के पास हुई। जनसभा में शामिल लोगों ने राज्य के सभी नागरिकों की आजीविका, लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई।

सभा की अध्यक्षता करते हुए सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता फकीर अहमद ने विस्तार से बताया कि कैसे तृणमूल ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के पैसे लूटकर आम जनता को नुकसान पहुंचाया है। जनसभा को पार्टी के उत्तर 24 परगना जिला सचिव पलाश दास, पार्टी नेता मधुजा सेन रॉय, युवा नेता मुंशी अब्दुल हलीम, सद्दाम घरामी आदि ने भी संबोधित किया। खचाखच भरी इस सभा की शुरुआत में डीवाईएफआई (DYFI) के 59 वें स्थापना दिवस के अवसर पर संगठन का झंडा फहराया गया।

साल 2016 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल की हार के बाद बसीरहाट उत्तर विधानसभा क्षेत्र के कामकाजी लोगों पर तृणमूल का गुस्सा फूटा था। पानीगोबरा में लोगों के घरों को आग लगाकर खाक कर दिया गया था। वाम मोर्चा सरकार के सामाजिक वनीकरण (फॉरेस्टेशन) को नष्ट कर दिया गया था और 9 ग्राम पंचायतें लूट का अड्डा बन गई थीं। भ्रष्टाचार और अपराधीकरण के इसी रास्ते पर चलकर सांप्रदायिक भाजपा ने बसीरहाट में अपनी जड़ें फैलाईं। साल 2018 में भाजपा और तृणमूल-कांग्रेस के मिले-जुले प्रयासों से बसीरहाट में दो समुदायों के बीच टकराव हुआ था। इसी पृष्ठभूमि में अब सीपीआई (एम) नेताओं ने बसीरहाट के लोगों को एकजुट कर अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया है।

मोहम्मद सलीम ने कहा कि चुनाव आयोग का इस्तेमाल करके भाजपा ने बहुत से लोगों के नाम मतदाता सूची से कटवा दिए हैं। आयोग ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि अब सब कुछ ट्रिब्यूनल में तय होगा। लेकिन क्या उन्होंने सब जगह ट्रिब्यूनल बनाए हैं? नहीं बनाए। बसीरहाट, बारासात जैसे सभी इलाकों में ट्रिब्यूनल शुरू करने होंगे। हमने पार्टी की ओर से वकीलों की टीम बना दी है, जो उन लोगों की मदद करेगी जिनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं। किसी भी वैध मतदाता का नाम नहीं कटना चाहिए। सीपीआई (एम)ने चुनाव से पहले जो कहा था, आज भी वही कह रही है। नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह लड़ाई आखिरी दम तक लड़नी होगी। अमित शाह ने कहा है— 'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट'। फासीवाद इसी तरह लोगों के अधिकार छीनना चाहता है। इसके लिए वे सरकार में आते ही सबसे पहले विपक्ष को खत्म करना चाहते हैं।

सलीम ने आगे कहा कि तृणमूल-कांग्रेस ने भी सरकार में आते ही इसी तरह पंचायतों को विपक्ष-मुक्त कर दिया था और सीपीआई (एम)कार्यकर्ताओं के घर जला दिए थे। आज उसी तृणमूल-कांग्रेस के लोग झुंड के झुंड भाजपा में शामिल हो रहे हैं। वे कभी तृणमूल-कांग्रेस के वफादार थे ही नहीं! हम शुरू से कह रहे हैं कि आरएसएस (RSS) ने अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए ही तृणमूल-कांग्रेस को बनाया था। जब उनका मकसद पूरा हो जाएगा, तो उन्हें तृणमूल-कांग्रेस की कोई जरूरत नहीं रहेगी।

सभा में पलाश दास ने कहा कि पूरे राज्य में भाजपा की 'बुलडोजर राजनीति' के जाल में हॉकर बदहाल हैं। रेलवे हॉकरों के घरों में हाहाकार मचा हुआ है। वामपंथी इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। हमले झेलने के बाद भी वामपंथी ही जनता के साथ खड़े हैं, जबकि तृणमूल के विधायक और सांसद थोक के भाव भाजपा में जा रहे हैं।

इस मुद्दे पर मधुजा सेन रॉय ने कहा कि हॉकर बेदखली के नाम पर गरीबों के पेट पर लात मारना शुरू कर दिया गया है। रेलवे की संपत्ति को अडानी-अंबानी के मुनाफे के लिए सौंपने की खातिर हॉकरों को उजाड़ना लाल झंडा कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।

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साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा - मोहम्मद सलीम

प्रकाशित: 10 जून 2026 • 4 मिनट पठन

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