" 91 लाख लोग जो एसआईआर से बाहर रह गए हैं, वे भारत के नागरिक नहीं हैं। कुछ मामूली त्रुटियों को छोड़कर, ये लोग भारत के नागरिक नहीं हैं। इनमें से किसी को भी लाभ नहीं दिया जाएगा। इन सभी के नाम हटा दिए जाएंगे।"
जन समाचार मंच
" 91 लाख लोग जो एसआईआर से बाहर रह गए हैं, वे भारत के नागरिक नहीं हैं। कुछ मामूली त्रुटियों को छोड़कर, ये लोग भारत के नागरिक नहीं हैं। इनमें से किसी को भी लाभ नहीं दिया जाएगा। इन सभी के नाम हटा दिए जाएंगे।"

राज्य में चार साल बाद एक महीने के लिए 100 दिनों का काम (मनरेगा) शुरू करने की घोषणा करते हुए, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी परियोजनाओं से एसआईआर (SIR) में बाहर किए गए 91 लाख मतदाताओं को इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा।
चार साल तक बंद रहने के बाद मंगलवार को राज्य में एक महीने के लिए 100 दिनों का काम फिर से शुरू हुआ। इस कार्यक्रम की शुरुआत करने दिलीप घोष उलबेरड़िया के जोआरगड़ी गांव आए थे। कार्यक्रम में बोलते हुए ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा, "91 लाख लोग जो एसआईआर से बाहर रह गए हैं, वे भारत के नागरिक नहीं हैं। कुछ मामूली त्रुटियों को छोड़कर, ये लोग भारत के नागरिक नहीं हैं। इनमें से किसी को भी लाभ नहीं दिया जाएगा। इन सभी के नाम हटा दिए जाएंगे।"

शुभेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल में दिलीप घोष इस समय निस्संदेह दूसरे सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। बीते 9 मई को ब्रिगेड में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में शपथ ग्रहण के दिन, मुख्यमंत्री के बाद दिलीप घोष ने ही शपथ ली थी। नतीजतन, उन्होंने आज जिस तरह ग्रामीण विकास विभाग के तहत कई परियोजनाओं के लाभ से एक बड़े हिस्से को बाहर करने की बात कही है, वह काफी चिंताजनक है।
आज से जून महीने के लिए राज्य सरकार ने राज्य में 100 दिनों की कार्य योजना शुरू की है। सरकार को केंद्र सरकार से रेगा के लिए एक महीने की मंजूरी मिली है। हालांकि, राज्य में एक महीने के लिए रेगा शुरू होने के बावजूद मालदा, पूर्व बर्धमान और दक्षिण 24 परगना—इन तीन जिलों को इससे बाहर रखा गया है। अतीत में केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई टीम की रिपोर्ट के आधार पर इन तीन जिलों को शामिल नहीं किया गया है। केवल जून महीने में रेगा का काम चलाने के बाद, 1 जुलाई से पूरे देश के साथ इस राज्य में भी 'जी रामजी' लागू किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "केंद्र सरकार ने रेगा के लिए एक महीने में मजदूरी और सामग्री मिलाकर 700 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। प्रति ग्राम पंचायत अधिकतम 2 से 3 परियोजनाएं हाथ में लेने का निर्देश दिया गया है। 700 करोड़ रुपये के आवंटन में से 420 करोड़ रुपये मजदूरी के लिए खर्च किए जा सकेंगे, जबकि सामग्री के लिए 280 करोड़ रुपये खर्च होंगे।"
रेगा का काम बंद होने के बाद जुलाई से 'जी राम जी' शुरू होगा। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, और ग्रामीण परिवारों के लिए सरकारी धन से शौचालय निर्माण सहित कई बंद पड़ी ग्रामीण विकास परियोजनाएं राज्य में फिर से शुरू होने जा रही हैं, ऐसा आश्वासन आज पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने दिया। लेकिन इन परियोजनाओं के लाभ से कौन वंचित रहेगा, यह उन्होंने अपने भाषण में स्पष्ट कर दिया। दिलीप घोष ने कहा, "अब सिर्फ 100 दिनों का काम ही नहीं, आवास योजना का पैसा भी आ रहा है। नए सिरे से सर्वे शुरू हो गया है। जिन लोगों को 20 जुलाई तक घर मिल जाना चाहिए था और नहीं मिला, उनका सर्वे होगा। कई लोगों को शौचालय नहीं मिला है। सड़क योजना की सड़कें खराब हो चुकी हैं, वहां भी काम होगा। अगले तीन महीने तक सर्वे चलेगा। जो भी नाम सामने आएंगे, उन्हें छानकर काम देना शुरू कर दिया जाएगा। उन्हें काम भी मिलेगा और जॉब कार्ड भी रहेगा। जो लोग बाहर होंगे, उन्हें न केवल काम से बाहर किया जाएगा, बल्कि देश से भी बाहर कर दिया जाएगा।"
सत्ता में आने के बाद से राज्य सरकार ने वित्तीय सहायता परियोजनाओं के तहत अन्नपूर्णा योजना शुरू की है। इस योजना को शुरू करते समय मुख्यमंत्री से लेकर महिला एवं बाल कल्याण विभाग के प्रभारी मंत्रियों ने साफ किया था कि किसी भी गैर-भारतीय को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया था कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान विचाराधीन मतदाताओं में से ट्रिब्यूनल और सीएए (CAA) के तहत आवेदन करने वाली महिलाओं को फिलहाल अन्नपूर्णा योजना का लाभ दिया जाएगा। लेकिन आज मुख्यमंत्री से भी आगे बढ़कर राज्य के पंचायत मंत्री ने परियोजना के लाभ से वंचित करने के साथ-साथ देश से भी बाहर करने की बात कह दी।

शपथ लेने वाले मंत्रियों के विभागों के बंटवारे में समय बीतने के साथ ही, अब भाजपा सरकार के मंत्रियों के बीच हिंदुत्ववादी बनने की होड़ में एक-दूसरे को पछाड़ने की लड़ाई शुरू हो गई है। जैसे कि दिलीप घोष ने आज कहा, "बहुत दिनों तक हमारा अनाज खाया है। हमारी जमीन पर कब्जा करके रहे हैं। उन्होंने हमारे लिए कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी की है। हकीमपुर बॉर्डर पर बांग्लादेश जाने के लिए लाइन लग गई है। हमने कह दिया है, अपने देश लौट जाओ।" राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले समय में राज्य में केंद्र और राज्य सरकार की किसी भी योजना के लाभार्थियों की पहचान करने के काम में सरकार निश्चित रूप से घुसपैठ के मुद्दे को सामने लाना चाहेगी। अन्नपूर्णा योजना से लेकर रेगा के काम की शुरुआत तक में इसका कोई अपवाद नहीं दिखा।
अतीत में इस राज्य में मनरेगा के काम को लेकर भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए थे। इसलिए राज्य में एक महीने के लिए रेगा शुरू करने से पहले मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने जिलाधिकारियों को एक निर्देशिका भेजकर सतर्क किया है। निर्देशिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि, "पिछले अनुभवों से देखा गया है कि मनरेगा में अपर्याप्त योजना, निगरानी से परे बड़े पैमाने पर काम का फैलाव और कमजोर कार्यान्वयन सहित कई शिकायतों से 100 दिनों का काम प्रभावित रहा था।" लिहाजा, अतीत की उन गलतियों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए जिलाधिकारियों सहित प्रत्येक जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है।
इस राज्य में लगभग 2 करोड़ 56 लाख जॉब कार्ड हैं। इस बीच, प्रत्येक जॉब कार्ड धारक को ई-केवाईसी पूरा करने के लिए कहा गया है। चालू होने वाले रेगा के काम में बिना ई-केवाईसी के काम नहीं मिलेगा। इसी तरह, काम की मजदूरी के भुगतान को आधार से लिंक करने की बात कही गई है।
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साभार : बांग्ला दैनिक गणशक्ति
अपलोडर: श्रेया जायसवाल
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अपलोडर: श्रेया जायसवाल • प्रकाशित: 10 जून 2026 • 6 मिनट पठन

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