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पुनर्वास के बिना बेदखली नहीं, रोजी-रोटी बंद नहीं की जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट

श्रेया जायसवाल•11 जून 20265 मिनट पठन18 बार पढ़ा गया

" रेलवे अधिकारियों से अनुरोध है कि वे लोगों का अनादर न करें, अन्यथा आने वाले दिनों में राज्य के हर कोने में लोग और अधिक मुखर होकर विरोध करेंगे। और लोग जितना अधिक विरोध करेंगे, भाजपा सरकार का चरित्र उतना ही उजागर होगा। "

पुनर्वास के बिना बेदखली नहीं, रोजी-रोटी बंद नहीं की जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट

पुनर्वास के बिना बेदखली नहीं, रोजी-रोटी बंद नहीं की जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट

"रेलवे अधिकारी या तो हम पर गोलियाँ चलाएँ, या फिर हॉकर्स (फेरीवालों) के संगठनों के साथ चर्चा और सर्वेक्षण करें। लेकिन किसी भी परिस्थिति में अचानक खुद कानून बनाकर देर रात गरीब लोगों की आजीविका पर हमला नहीं किया जा सकता।" बुधवार को पूर्व रेलवे के मुख्यालय के सामने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, हॉकर संगठनों और 12 जुलाई कमेटी के आह्वान पर आयोजित एक संयुक्त विरोध प्रदर्शन में, बिना पुनर्वास के हाकरों को हटाए जाने का कड़ा विरोध करते हुए सीटू पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के महासचिव जियाउल आलम ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि रेलवे अधिकारियों से अनुरोध है कि वे लोगों का अनादर न करें, अन्यथा आने वाले दिनों में राज्य के हर कोने में लोग और अधिक मुखर होकर विरोध करेंगे। और लोग जितना अधिक विरोध करेंगे, भाजपा सरकार का चरित्र उतना ही उजागर होगा।

विरोध सभा में सीटू पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के अध्यक्ष अनादि साहू ने कहा कि हम विकास चाहते हैं, लेकिन गरीब हॉकरों और झुग्गी-झोपड़ी वालों पर बुलडोजर चलाकर अत्याचार करना तुरंत बंद होना चाहिए। लाखों परिवारों को अनिश्चितता की स्थिति में नहीं धकेला जा सकता। इससे साफ पता चलता है कि यह भाजपा सरकार गरीब लोगों की सरकार नहीं है।

राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही स्टेशनों पर हॉकरों को हटाने और उनकी दुकानों को तोड़े जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके साथ ही स्टेशनों के पास रहने वाले गरीब लोगों के छोटे-छोटे आशियानों को भी बुलडोजर से जमींदोज किया जा रहा है। इसके खिलाफ वामपंथी दल और संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। लगभग हर रेलवे स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इस दिन रेलवे हॉकर्स, स्ट्रीट हॉकर्स संगठनों, केंद्रीय श्रमिक संगठनों और कर्मचारी संघों के आह्वान पर हॉकरों ने पूर्व रेलवे के जीएम (महाप्रबंधक) कार्यालय के घेराव और विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। फेयरली प्लेस में आयोजित सभा से यह आरोप लगाया गया कि जनरल मैनेजर के पास पुनर्वास के बिना हॉकरों को न हटाने की प्रक्रिया का पालन किए बिना ही दुकानों को तोड़कर बर्बाद किया जा रहा है। जादवपुर में आधी रात को हॉकरों को हटाए जाने के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से इकट्ठा हुए वामपंथी कार्यकर्ताओं को बेरहमी से पीटा भी गया है। इस पृष्ठभूमि में, हॉकर्स इस दिन कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश को एक महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं, हालांकि सीटू नेतृत्व को राज्य सरकार और रेलवे अधिकारियों पर थोड़ा भी भरोसा नहीं है। वे अदालत और सड़कों पर इस लड़ाई को और तेज करने के लिए तत्पर हैं।

मानवीयता, नैतिकता और सरकार की जवाबदेही के साथ-साथ सीटू ने लंबे समय से रह रही रेलवे बस्तियों और हॉकरों की आजीविका के ढांचे पर हो रहे इन हमलों की कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। नैहाटी की रेलवे बस्ती, डानकुनी और कोन्नगर के स्टेशन के पास के हॉकरों और बाजार के छोटे व्यापारियों ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में बेदखली रोकने के लिए याचिका दायर की थी। बुधवार को न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य ने निर्देश दिया है कि रेलवे और राज्य सरकार बुधवार तक इन तीनों जगहों पर जबरन कोई बेदखली नहीं कर पाएगी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील बिकास रंजन भट्टाचार्य ने अदालत में कहा कि दिन के उजाले में लोगों के विरोध का सामना करने के बाद, अब रेलवे और राज्य सरकार रात के अंधेरे में बेदखली की कार्रवाई कर रही है। बुलडोजर का इस्तेमाल कर हॉकरों की छोटी-छोटी दुकानों को तोड़ा जा रहा है। रात के अंधेरे में जादवपुर में बुलडोजर लाकर हॉकरों को हटाया गया है। हालांकि, जादवपुर में इस अवैध बेदखली के खिलाफ उसी रात बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए थे। वकील शमीम अहमद ने कहा कि गरीब लोगों के प्रति सरकार की जवाबदेही से इन्कार नहीं किया जा सकता। हॉकरों की रोजी-रोटी का वैकल्पिक इंतजाम किए बिना उन्हें हटाना अमानवीय है। राज्य सरकार को सोचना होगा कि अगर रेलवे हॉकरों या स्ट्रीट हॉकरों को हटा दिया गया, तो हजारों लोगों के सामने दाने-दाने का संकट खड़ा हो जाएगा। कोई शौक से फेरी नहीं लगाता। राज्य सरकार को उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी ही होगी।

इससे पहले 15 मई को ब्रेस ब्रिज के पास झुग्गियों को हटाने के पूर्व रेलवे के नोटिस पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पहले ही रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य ने झुग्गी बेदखली पर स्थगन आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया था कि अगले आदेश तक बेदखली का यह काम नहीं किया जा सकता। इस मामले को भी आगामी 17 जून को सुनवाई के लिए रखा गया है। पूर्व रेलवे ब्रेस ब्रिज से सटी रेलवे भूमि पर लगभग 6 हजार परिवारों को बेदखल करने की योजना के साथ काम कर रहा था। ब्रेस ब्रिज के बाद नैहाटी, डांकुनी और कोन्नगर में भी बेदखली के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा विचार करने और स्थगन आदेश देने की इस खबर से कई हॉकरों ने अस्थायी राहत और संतोष व्यक्त किया है। हालांकि, जानकारी के अनुसार राज्य सरकार और रेलवे अधिकारी अदालत के इस निर्देश से कोई सबक लेकर अन्य जगहों पर चल रहे बुलडोजर अभियानों को रोकने के मूड में नहीं हैं। हर जगह इस दमनकारी बेदखली का विरोध करते हुए पश्चिम बंगाल रेलवे हॉकर्स यूनियन के राज्य अध्यक्ष अलकेश दास ने कहा कि अदालत का आज का निर्देश इन तीन जगहों के लिए एक संदेश है। लेकिन लड़ाई हर जगह शुरू हो चुकी है। कॉर्पोरेट कंपनियों के मुनाफे का इंतजाम करने के लिए मेहनत-मशक्कत कर खाने वाले लोगों के पेट पर लात नहीं मारी जा सकती। इसके खिलाफ जनता को साथ लेकर सड़कों पर और अदालत में यह बहुआयामी लड़ाई जारी रहेगी।

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साभार : बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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पुनर्वास के बिना बेदखली नहीं, रोजी-रोटी बंद नहीं की जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट

प्रकाशित: 11 जून 2026 • 5 मिनट पठन

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