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भाजपा के जुलूस में जलाया गया लाल झंडा - " अब देख रहा हूँ कि वे लाल झंडे से ही डर रहे हैं ": मोहम्मद सलीम

अपराजिता•28 जुलाई 20263 मिनट पठन24 बार पढ़ा गया

"कल तक तो मैं जानता था कि वे नई पीढ़ी से डरते हैं, लेकिन अब देख रहा हूँ कि वे लाल झंडे से ही डर रहे हैं। आरएसएस की असली राजनीति क्या है, यह अब खुलेआम दिख रहा है। ये मुख्यमंत्री जब तृणमूल-कांग्रेस के नेता थे, तब इन्होंने धमकी दी थी कि कोई 'लाल भेड़िया' भी नहीं बचेगा। तृणमूल-कांग्रेस का नेता रहते हुए माओवादियों को साथ लेकर सीपीआई(एम) का सफ़ाया करने का अभियान चलाया था। उसके बावजूद लाल झंडे को ख़त्म नहीं किया जा सका; बल्कि उल्टा उनकी पुरानी पार्टी ही खत्म हो गई। लाल झंडा आज भी है और मजबूती से है, यह तो साफ़ दिख रहा है। हिटलर और मुसोलिनी इस झंडे को ख़त्म नहीं कर सके, और ये लोग अब हिटलर के पोते-परपोते बनना चाहते हैं।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

भाजपा के जुलूस में जलाया गया लाल झंडा

" अब देख रहा हूँ कि वे

लाल झंडे से ही डर रहे हैं "

मोहम्मद सलीम

भाजपा शासित इस बंगाल में अब सरेआम मुख्य सड़क पर पुलिस और मीडिया के सामने लाल झंडा जलाया गया। सड़क पर फेंककर पैरों तले रौंदा गया हज़ारों शहीदों के खून से भीगे, हज़ारों संघर्षों और आंदोलनों की गौरवमयी विरासत को संभालने वाले इस लाल झंडे को। जिस झंडे को कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने कंधों पर उठाया था, उस झंडे का अपमान करने के लिए पुलिस के सामने ही सत्तारूढ़ भाजपा के असामाजिक तत्वों की गुंडागर्दी चली।

नीट (NEET) घोटाले के विरोध में कोलकाता में छात्र समाज के जुलूस के जवाब में 'तिरंगा' जुलूस निकालने की चेतावनी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दी थी। उसी के तहत सोमवार दोपहर को भाजपा का जुलूस निकला। उत्तर और दक्षिण कोलकाता में दो जुलूस निकाले गए। इनमें से उत्तर कोलकाता का जुलूस सियालदह से शुरू होकर धर्मतला आकर समाप्त हुआ। और उसी जुलूस से सरेआम धर्मतला मोड़ पर जश्न मनाते हुए, नारेबाज़ी करते हुए लाल झंडा जलाया गया। सीपीआई (एम) के प्रतीक चिह्न की तस्वीर, एसएफआई और डीवाईएफआई लिखे झंडे को पैरों से रौंदा गया तथा उस पर थूका गया।

इस पूरी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा

"कल तक तो मैं जानता था कि वे नई पीढ़ी से डरते हैं, लेकिन अब देख रहा हूँ कि वे लाल झंडे से ही डर रहे हैं। आरएसएस की असली राजनीति क्या है, यह अब खुलेआम दिख रहा है। ये मुख्यमंत्री जब तृणमूल-कांग्रेस के नेता थे, तब इन्होंने धमकी दी थी कि कोई 'लाल कपड़े का पोछना' भी नहीं बचेगा। तृणमूल-कांग्रेस का नेता रहते हुए माओवादियों को साथ लेकर सीपीआई(एम) का सफ़ाया करने का अभियान चलाया था। उसके बावजूद लाल झंडे को ख़त्म नहीं किया जा सका; बल्कि उल्टा उनकी पुरानी पार्टी ही खत्म हो गई। लाल झंडा आज भी है और मजबूती से है, यह तो साफ़ दिख रहा है। हिटलर और मुसोलिनी इस झंडे को ख़त्म नहीं कर सके, और ये लोग अब हिटलर के पोते-पड़पोते बनना चाहते हैं।"

धर्मतला में लाल झंडा जलाने का यह पूरा वाकया पुलिस के सामने और मीडिया की मौजूदगी में हुआ। वहीं से नारेबाज़ी की गई— "सीपीएम की खाल, खींच लेंगे हम"। अभद्र भाषा में छात्रों पर भी हमला बोला गया। इसके बाद धर्मतला मोड़ पर पहले से साथ लाए गए हंसिया-हथौड़ा और तारा के प्रतीक, तथा एसएफआई-डीवाईएफआई लिखे झंडों को सड़क के बीचों-बीच फेंक दिया गया और सभी को उस पर पैर रखने को कहा गया। थूका भी गया। इसके तुरंत बाद जश्न मनाते हुए और नारे लगाते हुए सीपीआई (एम) के झंडे में आग लगा दी गई— वह भी पुलिस के सामने।

इस पूरी घटना से राजनीतिक हलकों में भी भारी हड़कंप मच गया है।

जिस तरह से किसी राजनीतिक दल का झंडा खुलेआम किसी दलीय कार्यक्रम से जलाया गया, वह इस राज्य के राजनीतिक इतिहास में अभूतपूर्व है। सीपीआई (एम) नेतृत्व ने कहा है कि इस घटना में शामिल भाजपा समर्थित असामाजिक तत्वों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। हालाँकि, ममता बनर्जी सरकार के ज़माने की पुलिस की तरह ही भाजपा सरकार की पुलिस भी सत्ताधारी दल के शह प्राप्त इन असामाजिक तत्वों को गिरफ़्तार करेगी या नहीं, इसे लेकर स्वाभाविक रूप से संशय बना हुआ है।

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति| 28 जुलाई,2026

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भाजपा के जुलूस में जलाया गया लाल झंडा - " अब देख रहा हूँ कि वे लाल झंडे से ही डर रहे हैं ": मोहम्मद सलीम

प्रकाशित: 28 जुलाई 2026 • 3 मिनट पठन

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