देश भर के बड़े नेता, जो जहां भी हैं, वाम-मध्य-दक्षिण-अति दक्षिण, सभी कोलकाता के मैदान की ओर कान लगाए हुए हैं। जो लोग मैदान में गए हैं जुलूस में या मेट्रो से, वे लाखों-लाखों लोग तब केवल श्रोता हैं। गहरे ध्यान और एकाग्रता में ब्रिगेड पैरेड ग्राउंड ठहरा हुआ है, क्योंकि—वक्ता तब ज्योति बसु हैं।
तितुमिर का नाम मिटा दिए गए शहर में कल
'युवा पीढ़ी की पुकार'

देश भर के बड़े नेता, जो जहां भी हैं, वाम-मध्य-दक्षिण-अति दक्षिण, सभी कोलकाता के मैदान की ओर कान लगाए हुए हैं। जो लोग मैदान में गए हैं जुलूस में या मेट्रो से, वे लाखों-लाखों लोग तब केवल श्रोता हैं। गहरे ध्यान और एकाग्रता में ब्रिगेड पैरेड ग्राउंड ठहरा हुआ है, क्योंकि—वक्ता तब ज्योति बसु हैं।
ऐसी दोपहर जिन्होंने नहीं देखी है, उनकी एक पीढ़ी का आमना-सामना बारासात में होगा, आने वाले वृहस्पतिवार को। इस आयोजन का नाम है 'युवा पीढ़ी की पुकार' (प्रजन्मेर डाक)। आयोजक है 'बुद्धदेव भट्टाचार्य कल्चरल सेंटर'।
किस पीढ़ी के लिए वहां आमंत्रण है? 'जेन-ज़ी' (Gen-Z) के लिए। जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। वे लोग एकत्रित होंगे, चर्चा करेंगे, सवाल पूछेंगे, और उसी दिन वहां के रवींद्र भवन में जवाब तलाशेंगे। उस दिन 'जेन-ज़ी' के गाने सुनेगा वह शहर, जिसके गहरे जख्मों को धो सके ऐसी कोई नदी नहीं है। जहां मुसलमान होने के कारण शहीद तितुमिर का नाम ढक दिया है खुद को श्यामाप्रसाद-प्रेमी कहने वाले एक समूह ने। उसी शहर में लामिने यमाल की पीढ़ी का कार्यक्रम है। यह पीढ़ी इस बात की गवाह नहीं है कि ठीक किस तरह बीजेपी को 'असभ्य, बर्बर' कहा जा सकता है। उन्होंने सुना है एक मुख्यमंत्री को अपनी पहचान बताते हुए यह कहते—'मैं भी ब्राह्मण हूँ' या 'मुसलमान दूध देने वाली गाय हैं'। लेकिन फिर भी उस पीढ़ी ने सलिल चौधरी को अपने हृदय में संजोकर रखा है। वृहस्पतिवार को सलिल फिर से जाग उठेंगे।
इसे लेकर उन्हें भी कोई संदेह नहीं है कि उनका यह सपनों का रास्ता कोलकाता के जवाहरलाल नेहरू रोड की तरह सीधा नहीं होगा। रास्ते में कंकड़ होंगे, जैसे पहले भी रहे हैं—पुरुलिया में हथियार वर्षा की रात में, विध्वंसक 'चमकाईतल्ला में चमका देंगे' पंक्ति के उच्चारण में या माल भाड़ा समानीकरण के जाल में। लेकिन किन-किन तत्वों से दिमाग भरा हो तो 'खून देकर बक्रेश्वर बनाएंगे' कहकर लाखों जवान, छात्र जुलूस निकालकर सुई की नोक के आगे अपने हाथ की नसें बढ़ा सकते हैं, किस तरह 'आमार सोनार बांला, आमि तोमाय भालोबासि' नए रूप में हल्दी नदी के तट पर प्राण पा सकता है, मछुआरों का गांव एशिया के बेहतरीन औद्योगिक शहरों में से एक बन जाता है, 'हल्दिया' बंगालियों की स्पर्धा का पर्याय बन जाता है—वे नहीं जानते। क्योंकि—उनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। वे 'जेन-ज़ी' हैं। केवल पार्टी का अनुशासन बनाए रखने के लिए एक राजनीतिज्ञ कई लोगों के चाहने के बावजूद प्रधानमंत्री पद के आमंत्रण को हँसते-हँसते पीछे छोड़ सकता है—यह उन्होंने सिर्फ सुना है। केवल मंत्री, मुख्यमंत्री बनने के लिए, भ्रष्टाचार के अपराध में जेल जाने से बचने के लिए दल बदल लेना ही उनके अनुभव में रहा है।
गुरुवार शाम 4 बजे से 'प्रजन्म की पुकार'—उसी पीढ़ी के लिए।
एसएफआई (SFI) राज्य समिति के सचिव देबांजन दे ने मंगलवार को बताया, "'जेन-ज़ी' के प्रतिनिधि और उनके वर्ग की बात जिनके माध्यम से हमें मिलती है, ऐसे कुछ छात्र और युवा आंदोलन के आयोजक उपस्थित रहेंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम और कल्चरल फेस्ट का आयोजन होगा। दीप्सिता धर और आफरीन बेगम संचालक के रूप में रहेंगी।" आयोजकों के एक सूत्र ने बताया कि विचार-विमर्श और प्रश्न-उत्तर सत्र में अयानांशु सरकार, प्रणय कार्जी, सौभिक दासबक्सी, आकाश कर, एषणा सेन आदि उपस्थित रहेंगे। देबांजन दे ने बताया कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंजीकरण पहले से ही चल रहा है।
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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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