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कैंपस में मनुवादी राजनीति को रोको — SFI का आह्वान

अपराजिता•13 सितंबर 20264 मिनट पठन30 बार पढ़ा गया

आज हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा मनुस्मृति को अपना आदर्श मानने वाली आर एस एस - भाजपा है। ए बी वी पी ने पहले से ही तरह-तरह के मनुवादी फरमान जारी करने शुरू कर दिए हैं— जैसे 'स्लीवलेस कपड़े पहनकर कॉलेज परिसर में नहीं आ सकते', 'लड़कियाँ छात्र राजनीति नहीं करेंगी'— इस मानसिकता के खिलाफ डटकर खड़ा होना होगा। पितृसत्तात्मक और ब्राह्मणवादी ताकतों को कैंपस से उखाड़ फेंकना होगा।

कैंपस में मनुवादी राजनीति को रोको — SFI का आह्वान

रिंकी दास ◼ श्रीरामपुर

12 सितंबर— राष्ट्र की सत्ता में आज मनुवाद के पोषक बैठे हैं। महिला मुक्ति आंदोलन के जरिए जो अधिकार हासिल किए गए थे, आर एस एस द्वारा संचालित भाजपा सरकार उन्हें फिर से छीन रही है। समाज को सदियों पीछे धकेलने की साजिश चल रही है। इसके खिलाफ प्रीतिलता-कल्पना के संघर्ष पथ पर चलते हुए एकजुट आंदोलन खड़ा करने का संकल्प SFI राज्य छात्रा कन्वेंशन में लिया गया।

शनिवार को हुगली के श्रीरामपुर स्थित बाउतल्ला कम्युनिटी हॉल में 'तिलोत्तमा नगर' के 'लक्ष्मी सहगल मंच' पर राज्य छात्रा कन्वेंशन आयोजित हुआ। 140 प्रतिनिधियों की उपस्थिति में कन्वेंशन की शुरुआत में SFI के राज्य अध्यक्ष प्रणय कांजी ने झंडोत्तोलन किया। प्रोफेसर डॉ. स्वाती मैत्र ने कन्वेंशन का उद्घाटन किया।

उद्घाटनी भाषण में स्वाती मैत्र ने प्रीतिलता वाद्देदार-कल्पना दत्त और मातंगिनी हाजरा जैसी तमाम महिला क्रांतिकारियों की धारा से प्रेरणा लेकर अधिकार प्राप्ति के लिए आगामी दिनों में आंदोलन संगठित करने का सुझाव दिया। कन्वेंशन में मसौदा (ड्राफ्ट) रिपोर्ट SFI राज्य संपादक मंडल की सदस्य सोनाली मजुमदार ने पेश की। उन्होंने कहा, आज हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा मनुस्मृति को अपना आदर्श मानने वाली आर एस एस - भाजपा है। ए बी वी पी ने पहले से ही तरह-तरह के मनुवादी फरमान जारी करने शुरू कर दिए हैं— जैसे 'स्लीवलेस कपड़े पहनकर कॉलेज परिसर में नहीं आ सकते', 'लड़कियाँ छात्र राजनीति नहीं करेंगी'— इस मानसिकता के खिलाफ डटकर खड़ा होना होगा। पितृसत्तात्मक और ब्राह्मणवादी ताकतों को कैंपस से उखाड़ फेंकना होगा।

मसौदा रिपोर्ट पर कुल 24 प्रतिनिधियों ने चर्चा की। प्रतिनिधियों की बातचीत में ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों की छात्राओं का लगातार ड्रॉप-आउट (स्कूल-कॉलेज छोड़ना) का मुद्दा उठा। पश्चिम मेदिनीपुर की प्रतिनिधि ने मेदिनीपुर कॉलेज और विद्यासागर विश्वविद्यालय सहित जिले के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में ABVP की बढ़ती दबंगई और उसे रोकने को लेकर विस्तृत चर्चा की।

पूर्व बर्धमान जिले की प्रतिनिधि ने कॉलेज-विश्वविद्यालयों में फीस वृद्धि और स्कॉलरशिप बंद होने के कारण छात्राओं की उच्च शिक्षा बाधित होने का मुद्दा उठाया। उत्तर 24 परगना जिले की प्रतिनिधि ने श्रम के बदले कम वेतन, सीमांत क्षेत्रों में कन्या भ्रूण हत्या और जन्म के समय से ही बालिकाओं के साथ भेदभाव की बात रखी।

हाल ही में राजा प्यारीमोहन कॉलेज में छात्राओं के पहनावे को लेकर हुए विवाद के संदर्भ में ABVP के मनुवादी व्यवहार का हुगली जिले की प्रतिनिधि ने कड़ा विरोध जताया।

झाड़ग्राम, बीरभूम, मुर्शिदाबाद सहित कई जिलों की प्रतिनिधियों ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार की तरह ही वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा उठाया। इसके अलावा SFI द्वारा मुर्शिदाबाद में दर्जनों छात्राओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का पर्दाफाश किया गया। आदिवासी और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में नाबालिगों का विवाह लगातार बढ़ रहा है। बाल विवाह के मामलों में राज्य पहले पायदान पर है। लड़कियाँ शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हो रही हैं। यहाँ तक कि मानव तस्करी, यौन उत्पीड़न, उत्पीड़न और आत्मनिर्भरता खत्म होने से उन्हें एक तरह से बाँध दिया गया है।

कन्वेंशन में विशेष अतिथि के रूप में SFI की संयुक्त सचिव शिल्पा सुरेन्द्रम उपस्थित थीं। उन्होंने कहा कि छात्राओं के आंदोलन का ऐसा खाका तैयार करना होगा जो मनुवादी RSS-BJP सरकार को उखाड़ फेंके।

इस अवसर पर 37 सदस्यीय नई राज्य छात्रा सब-कमेटी का गठन किया गया। कमेटी की संयुक्त संयोजक सोनाली मजुमदार और वर्णना मुखर्जी बनीं, जबकि सह-संयोजक उयसी रायचौधुरी, अदिति नंदी और बिपाशा साहा चुनी गईं।

सभी परिसरों में सैनिटरी वेंडिंग मशीन लगाने, ICC चुनाव कराने, महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने, चाय बगान क्षेत्रों में बालिका विद्यालय स्थापित करने और बाल विवाह के खिलाफ कुल 11 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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कैंपस में मनुवादी राजनीति को रोको — SFI का आह्वान

अपलोडर: VKA-43UUB7 • प्रकाशित: 13 सितंबर 2026 • 4 मिनट पठन

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