वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
बुधवार, 30 सितंबर 2026 | Wednesday, 30 September 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराज्य

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राज्य

पश्चिम बंगाल में चार हजार स्कूल बेचने की जोरदार तैयारी,नवान्न से स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश

अपराजिता•18 सितंबर 20265 मिनट पठन8 बार पढ़ा गया

दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश की वर्तमान पीढ़ी के आंदोलन का एक मुख्य मुद्दा शिक्षा की बदहाल स्थिति भी था। जंतर-मंतर से ही देश के शैक्षणिक संस्थानों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने देशभर के विद्यालयों का ऑडिट करने की घोषणा की। इस राज्य में भी स्कूली शिक्षा की बदहाली की असली तस्वीर सामने लाने के लिए एसएफआई (SFI) ने राज्यभर में 'स्कूल बचाओ, मूल बचाओ' आंदोलन शुरू किया है। इस बीच, राज्य सरकार इन चार हजार स्कूलों का बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी में है।

पश्चिम बंगाल में चार हजार स्कूल बेचने की जोरदार तैयारी

नवान्न से स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश

पश्चिम बंगाल की सरकार राज्य के चार हजार से अधिक शून्य छात्र-संख्या (स्टूडेंट-लेस) वाले स्कूलों की संपत्ति बेचने जा रही है।

नवान्न ने जिलाधिकारियों (DMs) को उन सभी सरकारी स्कूलों के घर-मकान से लेकर जमीन-जायदाद से जुड़ी पूरी जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है, जिनमें एक भी छात्र नहीं है। शून्य छात्र वाले विद्यालयों की संपूर्ण संपत्ति की जानकारी जुटाने के साथ-साथ, भविष्य में इस विशाल सरकारी संपत्ति को पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत निजी हाथों में सौंपने के लिए जिलाधिकारियों को 'पुनरुद्धार परियोजना' (रिवाइवल प्रोजेक्ट) तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, शून्य छात्र वाले स्कूलों में छात्रों को वापस लाकर उन्हें बचाने के बजाय, राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों की इस विशाल संपत्ति को बेचने का लक्ष्य तय किया है।

नवान्न के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "शून्य छात्र वाले सरकारी विद्यालयों की वर्तमान स्थिति का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है। स्कूलों के क्लासरूम, स्कूल भवन और अन्य संपत्तियों के साथ-साथ स्कूलों की जमीन का भी मूल्यांकन करने को कहा गया है। हमारा प्राथमिक प्रयास इन स्कूलों की विशाल संपत्ति का अधिकतम उपयोग करना होगा। आवश्यकता पड़ने पर पीपीपी मॉडल का ही पालन किया जाएगा।"

पिछले अगस्त में ही केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से देशभर की स्कूली शिक्षा के आंकड़े जारी किए गए थे। वर्ष 2025-26 के यूडाइज प्लस (UDISE+) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के 4,133 विद्यालयों में एक भी छात्र नहीं है। इन विद्यालयों से 19 हजार से अधिक शिक्षक जुड़े हुए हैं। अगस्त महीने में ये आंकड़े मिलने के बाद राज्य की नई सरकार ने कोई इंतजार नहीं किया। 100 दिनों के भीतर ही मुख्यमंत्री सचिवालय से विद्यालय शिक्षा विभाग को एक पत्र भेजा गया था। गत 21 अगस्त को भेजे गए उस पत्र में 'जीरो एनरोलमेंट' (शून्य नामांकन) वाले स्कूलों की चल-अचल संपत्ति का मूल्यांकन कर सरकार को लिखित रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया था।

राज्य में विश्वविद्यालयों की पढ़ाई और अनुसंधान कार्य को ठप्प करने के लिए राज्य विधानसभा के विशेष सत्र के माध्यम से हाल ही में राज्य की भाजपा सरकार ने कानून में संशोधन किया है। कुछ दिन पहले ही राज्य के विद्यालय शिक्षा विभाग के एक कार्यक्रम में आकर मुख्यमंत्री ने बताया था, "पिछले 15 वर्षों में इस राज्य की स्कूली शिक्षा राष्ट्रीय स्तर पर 31वें स्थान पर चली गई है। इसे देश के शीर्ष 10 राज्यों की सूची में लाने में कम से कम तीन साल का समय लगेगा।" और उसी राज्य में सरकार इस बात पर विचार-विमर्श कर रही है कि शून्य छात्र वाले चार हजार से अधिक सरकारी स्कूलों की संपत्ति को कैसे बेचा जाए।

मुख्यमंत्री सचिवालय से पत्र मिलने के बाद, बीते बुधवार को राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों और कोलकाता नगर निगम के आयुक्त को एक दिशा-निर्देश भेजा है। इस निर्देशिका में क्या कहा गया है?

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर चार सदस्यीय समिति गठित करने की बात कही गई है। जिलाधिकारी के अलावा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला स्कूल शिक्षा निरीक्षक (DI) और काम की सुविधा के लिए जिलाधिकारी किसी अन्य अधिकारी को इस समिति का सदस्य बना सकते हैं। जिला स्तर पर गठित इस समिति का पहला काम जिला स्तर पर शून्य छात्र वाले स्कूलों का प्रत्यक्ष (ऑन-साइट) निरीक्षण करना होगा और सभी पहलुओं की जांच करके विद्यालयों की संपूर्ण संपत्ति का 'स्टॉक टेकिंग' (लेखा-जोखा) करना होगा।

प्रथम चरण में चार हजार विद्यालयों की संपत्ति का मिलान करने के बाद, दूसरे चरण में भूमि और स्कूल भवन की वर्तमान स्थिति को देखकर उसका हिसाब-किताब लगाना और साथ ही स्कूल के अधीन भूमि के क्षेत्रफल और उसके वर्तमान बाजार मूल्य का मूल्यांकन करना शामिल है।

राज्य प्रशासन के एक अधिकारी के अनुसार, चार सदस्यीय समिति से यह सुझाव देने को कहा गया है कि इन सरकारी विद्यालयों के बेकार पड़े भवनों, भूमि और अन्य सभी बुनियादी ढांचों का उपयोग स्थानीय लोगों के हित में कैसे किया जा सकता है। इसमें ऐसे सरकारी प्रशिक्षण केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र शामिल किए गए हैं जिन्हें स्थानीय लोग स्वीकार कर सकें, साथ ही इसे पशु संसाधन विकास विभाग के केंद्रों से भी जोड़ा गया है। ऐसा भी हो सकता है कि स्कूल बंद करके उसकी जमीन पर मवेशी केंद्र (कैटल सेंटर) बना दिया जाए!

हालांकि, यदि जिलाधिकारी के नेतृत्व वाली चार सदस्यीय समिति को लगता है कि वर्तमान में शून्य छात्र वाले विद्यालयों को पुनः पठन-पाठन के योग्य बनाना संभव है, तो उसे इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है। लेकिन राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, "शून्य छात्र वाले विद्यालयों को पुनः सरकारी विद्यालय के रूप में चलाने की सरकार की कोई योजना नहीं है। आने वाले दिनों में इन्हें पीपीपी मॉडल के तहत निजी अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को सौंपने पर विचार किया जा रहा है।"

कुल मिलाकर, जिला स्तरीय समिति को अगले 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट तैयार कर राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग को भेजने का निर्देश दिया गया है। चार हजार से अधिक शून्य छात्र वाले विद्यालयों की रिपोर्ट मिलने के बाद विद्यालय शिक्षा विभाग अपनी योजना राज्य सरकार को सौंपेगा। इसके बाद राज्य सरकार समीक्षा कर तय करेगी कि इन शून्य छात्र वाले विद्यालयों का भविष्य क्या होगा।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश की वर्तमान पीढ़ी के आंदोलन का एक मुख्य मुद्दा शिक्षा की बदहाल स्थिति भी था। जंतर-मंतर से ही देश के शैक्षणिक संस्थानों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने देशभर के विद्यालयों का ऑडिट करने की घोषणा की। इस राज्य में भी स्कूली शिक्षा की बदहाली की असली तस्वीर सामने लाने के लिए एसएफआई (SFI) ने राज्यभर में 'स्कूल बचाओ, मूल बचाओ' आंदोलन शुरू किया है। इस बीच, राज्य सरकार इन चार हजार स्कूलों का बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी में है।

.

.

साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति

अपलोडर: VKA-43UUB7

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

पश्चिम बंगाल में चार हजार स्कूल बेचने की जोरदार तैयारी,नवान्न से स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश

अपलोडर: VKA-43UUB7 • प्रकाशित: 18 सितंबर 2026 • 5 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

356 क्लिक

2

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

354 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

334 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

330 क्लिक

5

'बदलाव का कोई शॉर्टकर्ट नहीं होता - गणेश शंकर विद्यार्थी।' अनीश अंकुर की कलम से

324 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
राष्ट्रीय

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत

सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है।

कुछ घंटे पहले

राज्य

सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।

भाषा, जाति, धर्म और खान-पान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति चल रही है।

27 सितंबर 2026

राज्य

देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम

"यह जो चुनाव हुआ, उसमें तरह-तरह की गड़बड़ियां करके और वोटर लिस्ट को ताक पर रखकर वोट कराए गए। एक शब्द में कहें तो कानून का पालन किए बिना काम हुआ है, नियम-कानून जैसा कुछ नहीं छोड़ा गया। हमने शुरुआत से ही संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात की है। असल बात यह है कि भ्रष्ट तृणमूल-कांग्रेस बीजेपी के साथ मिल गई है। शुभेंदु अधिकारी ने एक समय तृणमूल-कांग्रेस का झंडा लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए और पुलिस व असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल करके पंचायत पर कब्जा किया था—यह बात लोग खुद कह रहे हैं। वही शुभेंदु अधिकारी अब बीजेपी में जाकर राज्य सरकार में आ गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कई लोगों ने सोचा था कि शायद अब भ्रष्टाचार बंद होगा। हमने तभी कहा था कि इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है। वही बात अब साबित हो चुकी है। तृणमूल-कांग्रेस खुलेआम बीजेपी में चली गई है। तो फिर क्या इस पार्टी से विकास की उम्मीद की जा सकती है? शुभेंदु अधिकारी और शमीक भट्टाचार्य हर दिन अपनी बात बदलते हैं। बीजेपी अपने फायदे के लिए आरएसएस के जरिए हुमायूं कबीर जैसे नेताओं को तैयार करती है। यही उनकी नीति है।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

25 सितंबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

राज्य

राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement