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सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।

अपराजिता•27 सितंबर 20263 मिनट पठन7 बार पढ़ा गया
भाषा, जाति, धर्म और खान-पान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति चल रही है।

विभिन्न विकृत तथ्यों से इतिहास को बिगाड़ा जा रहा है।

भाषा, जाति, धर्म और खान-पान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति चल रही है।

कोलकाता: स्वतंत्रता आंदोलन और बंगाल विभाजन के इतिहास को लेकर विभिन्न 'विकृत तथ्य' फैलाए जाने का आरोप वामपंथी नेतृत्व ने लगाया। इस पृष्ठभूमि में स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन के इतिहास पर नेशनल बुक एजेंसी (NBA) ने एक नई पुस्तक प्रकाशित की है।

शनिवार को कॉलेज स्ट्रीट स्थित NBA कार्यालय में सीपीआई(एम)की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती द्वारा लिखित पुस्तक 'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) का विमोचन वाम मोर्चा के अध्यक्ष विमान बोस ने किया। इस अवसर पर लेखक सुजन चक्रवर्ती, सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम तथा NBA के निर्देशक अनिरुद्ध चक्रवर्ती, अंजन बेरा, शुभमय और सुस्नात दास उपस्थित थे।

विमान बोस ने कहा कि 12 अध्यायों में यह पुस्तक संक्षेप में स्वतंत्रता आंदोलन की विभिन्न धाराओं और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को रेखांकित करती है। साथ ही बंगाल विभाजन के इतिहास को भी तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। उनका कहना था कि वर्तमान में विभिन्न 'विकृत तथ्यों' के माध्यम से इतिहास को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।

अपने बचपन के एक अनुभव का उल्लेख करते हुए विमान बोस ने बताया कि 1953 में 13 वर्ष की आयु में वे श्रद्धानंद पार्क में श्यामाप्रसाद मुखर्जी की एक सभा में उपस्थित थे। उन्होंने दावा किया कि उस सभा में बंगाल विभाजन को लेकर कोई वक्तव्य उन्हें याद नहीं है। उनका कहना था, "आज सूचना का युग है। तरह-तरह के विकृत तथ्यों से इतिहास को भ्रमित किया जा रहा है।"

मोहम्मद सलीम ने कहा कि देश कहने का अर्थ केवल नक्शा नहीं, बल्कि वहाँ के लोग और उनका जीवंत इतिहास भी होता है। भाषा, मुक्त सोच और खान-पान के प्रति सम्मान भी देशप्रेम का ही हिस्सा है। उनका आरोप था कि भाषा, जाति, धर्म और खान-पान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति चल रही है। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन में विभिन्न राजनीतिक धाराओं की भूमिका पर भी इस पुस्तक में चर्चा की गई है।

पुस्तक के लेखक सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के विविध इतिहास और ब्रिटिश विरोधी आंदोलन की विभिन्न धाराओं को सामने लाना आवश्यक है। उनका दावा है कि वर्तमान में स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ बंगाल विभाजन के इतिहास को भी विकृत करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बंगाल विभाजन की विभिन्न तिथियों और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठाए। "यह पुस्तक लिखने की प्रेरणा तब और बढ़ गई जब देखा कि बंगाल विभाजन को लेकर भी इतिहास को विकृत किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि 20 जून को बंगाल का जन्म हुआ, यह किसने तय किया? तो फिर 3 जून को क्या था? क्या 16 अगस्त को भी बंगाल का जन्म हुआ था? क्योंकि तब तक मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, कोचबिहार बंगाल का हिस्सा नहीं बने थे। 1 नवंबर 1956 को पुरुलिया बंगाल में शामिल हुआ। इसलिए इतिहास किसी एक व्यक्ति का नहीं है और न हो सकता है। जो लोग आज 'वंदे मातरम' को लेकर बहुत मुखर हैं, उनके पूर्वजों में से किसी का भी 'वंदे मातरम' का नारा लगाते हुए फाँसी के फंदे पर झूलने का इतिहास नहीं है। बल्कि 'जय हिंद' और 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाते हुए फाँसी पर चढ़ने का इतिहास मौजूद है।"

कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन, देश-विभाजन और बंगाल विभाजन के इतिहास पर तथ्यात्मक चर्चा और बहस की आवश्यकता पर बल दिया।

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साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।

अपलोडर: VKA-43UUB7 • प्रकाशित: 27 सितंबर 2026 • 3 मिनट पठन

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