राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर हमलों के साथ-साथ देश के कॉलेज-विश्वविद्यालयों में एबीवीपी के कब्जे और परिसरों में हिंदुत्ववादी राजनीति का विस्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कब्जे के खिलाफ एसएफआई अपना संघर्ष जारी रखेगी।
जन समाचार मंच
राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर हमलों के साथ-साथ देश के कॉलेज-विश्वविद्यालयों में एबीवीपी के कब्जे और परिसरों में हिंदुत्ववादी राजनीति का विस्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कब्जे के खिलाफ एसएफआई अपना संघर्ष जारी रखेगी।
जलपाईगुड़ी, 7 अक्टूबर— रंगारंग जुलूस और जनसभा के साथ बुधवार को जलपाईगुड़ी में एसएफआई की राज्य कमेटी का विस्तारित अधिवेशन शुरू हुआ, जो गुरुवार तक चलेगा। दो दिवसीय इस कार्यक्रम को लेकर सुबह से ही शहर में उत्सव का माहौल रहा। बुधवार को झंडा फहराने के साथ अधिवेशन का कामकाज शुरू हुआ। इसके बाद समाजपाड़ा मोड़ से एक भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में एसएफआई के राज्य सचिव देबांजन दे, राज्य अध्यक्ष प्रणय कार्जी, संगठन की जलपाईगुड़ी जिला कमेटी के सचिव अरिंदम घोष और जिला अध्यक्ष शब्बीर हुसैन सहित अन्य नेता उपस्थित थे। शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ यह जुलूस कदमतल्ला मदरसा मैदान पहुँचा, जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ जनसभा की शुरुआत हुई। जनसभा की अध्यक्षता एसएफआई जलपाईगुड़ी के जिला सचिव अरिंदम घोष ने की।

जनसभा में एसएफआई नेता संगीता राय ने आदिवासी, पहाड़ी, ग्रामीण, वन-बस्ती और मजदूर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए बंद होने की कगार पर पहुँचे स्कूलों को बचाने तथा दूर-दराज के क्षेत्रों के स्कूलों को पुनर्जीवित करने की माँग की। उन्होंने सरकारी शिक्षा प्रणाली के बुनियादी ढाँचे में सुधार, पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए विशेष सुविधाओं की भी मांग उठाई।

देबांजन दे ने कहा कि

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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