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संघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगा

अपराजिता•08 अक्टूबर 20263 मिनट पठन3 बार पढ़ा गया

राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर हमलों के साथ-साथ देश के कॉलेज-विश्वविद्यालयों में एबीवीपी के कब्जे और परिसरों में हिंदुत्ववादी राजनीति का विस्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कब्जे के खिलाफ एसएफआई अपना संघर्ष जारी रखेगी।

संघ के कब्जे के खिलाफ

स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगा

एसएफआई के सम्मेलन में आह्वान

जलपाईगुड़ी, 7 अक्टूबर— रंगारंग जुलूस और जनसभा के साथ बुधवार को जलपाईगुड़ी में एसएफआई की राज्य कमेटी का विस्तारित अधिवेशन शुरू हुआ, जो गुरुवार तक चलेगा। दो दिवसीय इस कार्यक्रम को लेकर सुबह से ही शहर में उत्सव का माहौल रहा। बुधवार को झंडा फहराने के साथ अधिवेशन का कामकाज शुरू हुआ। इसके बाद समाजपाड़ा मोड़ से एक भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में एसएफआई के राज्य सचिव देबांजन दे, राज्य अध्यक्ष प्रणय कार्जी, संगठन की जलपाईगुड़ी जिला कमेटी के सचिव अरिंदम घोष और जिला अध्यक्ष शब्बीर हुसैन सहित अन्य नेता उपस्थित थे। शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ यह जुलूस कदमतल्ला मदरसा मैदान पहुँचा, जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ जनसभा की शुरुआत हुई। जनसभा की अध्यक्षता एसएफआई जलपाईगुड़ी के जिला सचिव अरिंदम घोष ने की।

जनसभा में एसएफआई नेता संगीता राय ने आदिवासी, पहाड़ी, ग्रामीण, वन-बस्ती और मजदूर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए बंद होने की कगार पर पहुँचे स्कूलों को बचाने तथा दूर-दराज के क्षेत्रों के स्कूलों को पुनर्जीवित करने की माँग की। उन्होंने सरकारी शिक्षा प्रणाली के बुनियादी ढाँचे में सुधार, पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए विशेष सुविधाओं की भी मांग उठाई।

प्रणय कार्जी ने कहा कि

" राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर हमलों के साथ-साथ देश के कॉलेज-विश्वविद्यालयों में एबीवीपी के कब्जे और परिसरों में हिंदुत्ववादी राजनीति का विस्तार करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कब्जे के खिलाफ एसएफआई अपना संघर्ष जारी रखेगी। कार्जी ने आगे कहा कि बीजेपी ने लोगों के बीच विभाजन का बीज बोकर राजनीतिक लाभ उठाया है। उन्होंने छात्रों के लिए निजी बसों में आधा किराया और सरकारी बसों में पूरा किराया माफ करने की माँग को लेकर आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया।"

देबांजन दे ने कहा कि

विभिन्न कैम्पस में संघ की हिंदुत्ववादी ताकतों के कब्जे के प्रयासों के खिलाफ छात्र संघर्ष कर रहे हैं। सरकार सभी के लिए शिक्षा व्यवस्था को सीमित करना चाहती है। उच्च शिक्षा सामान्य परिवारों के बच्चों की पहुँच से बाहर न हो जाए, इसके लिए सरकारी शिक्षा प्रणाली को मजबूत करना होगा। 'स्कूल बचाओ, मूल बचाओ' के नारे के साथ स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लोकतांत्रिक माहौल बनाए रखने, छात्र संघ चुनाव कराने और शैक्षणिक संस्थानों में लोकतांत्रिक प्रबंधन प्रणाली लागू करने की माँग को लेकर एसएफआई आंदोलन जारी रखेगी।

एसएफआई के अखिल भारतीय महासचिव सृजन भट्टाचार्य ने कहा कि

केंद्र और राज्यों की तथाकथित 'डबल इंजन' सरकारें अपने वादे पूरे करने में विफल रही हैं और लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इतिहास को लेकर भ्रम फैला रही हैं। वामपंथियों की देशभक्ति पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी परंपरा और नेताजी, भगत सिंह, बिनय-बादल-दिनेश तथा मास्टरदा सूर्य सेन के संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन मुख्य मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए तरह-तरह के विवाद खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन चलाने की बात भी कही। इसके अलावा, उन्होंने आगामी 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भाजपा-विरोधी छात्र संगठनों को एकजुट कर एक बड़े आंदोलन के कार्यक्रम की घोषणा की। इस विस्तारित अधिवेशन का उद्घाटन सृजन भट्टाचार्य ने किया।

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति

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संघ के कब्जे के खिलाफ स्कूल-कॉलेजों को बचाने के लिए जोरदार संघर्ष करना होगा

अपलोडर: VKA-43UUB7 • प्रकाशित: 08 अक्टूबर 2026 • 3 मिनट पठन

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