किसी कार्यक्रम में सरकार विरोधी भावना हो सकती है, इस आशंका से पहले से दी गई अनुमति को रद्द करना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रवृत्ति में फासीवादी मानसिकता झलकता है।
जन समाचार मंच
किसी कार्यक्रम में सरकार विरोधी भावना हो सकती है, इस आशंका से पहले से दी गई अनुमति को रद्द करना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रवृत्ति में फासीवादी मानसिकता झलकता है।
विशेष संवाददाता: कोलकाता, 10 अक्टूबर- मताधिकार की रक्षा के सवाल पर देश भर में विरोध के माहौल के बीच, एसआईआर (SIR) में उत्पीड़न के शिकार मतदाताओं की सहायता के लिए नागरिक कन्वेंशन आयोजित करने जा रहे आयोजकों को बाधाओं का सामना करना पड़ा है। आरोप है कि कलामंदिर में अग्रिम भुगतान के साथ बुकिंग करने के बावजूद अंतिम समय में कन्वेंशन की अनुमति रद्द कर दी गई। यहाँ तक कि आयोजकों ने बताया कि शनिवार को एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में भी कन्वेंशन से संबंधित प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने दी गई। मजबूर होकर उन्होंने आचार्य जगदीश चंद्र बोस रोड स्थित बुद्धदेव भट्टाचार्य सेंटर फॉर कल्चर एंड रिसर्च के प्रांगण में खुले आसमान के नीचे प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वहीं से यह घोषणा की गई कि निर्धारित दिन यानी मंगलवार, 13 अक्टूबर को कन्वेंशन आयोजित किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर वे उसी खुले प्रांगण में लोगों तक अपनी बात पहुँचाएँगे।
एसआईआर को लेकर आम लोगों की परेशानी और भ्रम को दूर करने तथा मतदाताओं को आवश्यक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से 'सिटिजंस फोरम वेस्ट बंगाल' ने इस कन्वेंशन का आह्वान किया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कन्वेंशन के संयुक्त संयोजक, अधिवक्ता विकाश रंजन भट्टाचार्य, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार, जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अशोक नाथ बसु और शिक्षाविद् पवित्र सरकार उपस्थित थे। उनके अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया, फॉर्म 6 से संबंधित दिशा-निर्देशों और चुनाव आयोग के रुख को लेकर आम लोगों के मन में कई तरह के सवाल और भ्रम पैदा हुए हैं। नागरिकों को जागरूक करना, उनकी समस्याओं को सुनना और आवश्यक सहायता का मार्ग दिखाना ही इस कन्वेंशन का मुख्य उद्देश्य है। पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा सहित कई प्रतिष्ठित व्यक्ति इसमें हिस्सा लेंगे। अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज के व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न हो पाने की स्थिति में उन्हें वर्चुअल माध्यम से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
कन्वेंशन के लिए निर्धारित स्थलों पर अनुमति रद्द किए जाने की घटना पर रोष व्यक्त करते हुए आयोजकों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार करार दिया है। विकाश रंजन भट्टाचार्य का आरोप है कि राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ कार्यक्रम होने के कारण ही एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स में प्रेस कॉन्फ्रेंस की अनुमति रद्द की गई। दूसरी ओर, उन्होंने बताया कि कलामंदिर के अधिकारियों ने 'तकनीकी खराबी' (टेक्निकल फॉल्ट) का कारण बताकर अग्रिम बुक किए गए कन्वेंशन की अनुमति रद्द कर दी।
अशोक नाथ बसु ने कहा कि वे देश के खिलाफ नहीं हैं। सरकार की आलोचना करने का नागरिकों को अधिकार है और संविधान ने उन्हें यह अधिकार दिया है। पवित्र सरकार का कहना है कि किसी कार्यक्रम में सरकार विरोधी भावना हो सकती है, इस आशंका से पहले से दी गई अनुमति को रद्द करना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रवृत्ति में फासीवादी मानसिकता झलकता है।
एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका की आलोचना करते हुए जवाहर सरकार ने कहा कि चुनाव संचालन के अपने अनुभव के दौरान उन्होंने ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी थी। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म 6 में नागरिकता साबित करने की नई शर्तें जोड़ी गई थीं। अदालत में उन शर्तों की वैधता पर सवाल उठने के बाद चुनाव आयोग बीएलओ (BLO) को फिर से घर-घर जाने का निर्देश दे रहा है। उन्होंने कहा कि इस परिस्थिति में आम लोगों के संशय को दूर करने के लिए कन्वेंशन में प्रश्नोत्तर के माध्यम से उनकी बात सुनी जाएगी और समस्याओं के समाधान का रास्ता तलाशा जाएगा।

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों को पुलिस द्वारा रोके जाने और हिरासत में लिए जाने की घटना की भी कन्वेंशन के आयोजकों ने निंदा की है। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में पुलिस की बाधा लोकतांत्रिक आंदोलनों के दायरे को संकुचित कर रही है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि मोदी-शाह के नेतृत्व में देश में अघोषित आपातकाल की स्थिति पैदा हो गई है।
विकाश रंजन भट्टाचार्य का आरोप है कि एसआईआर से संबंधित भूल स्वीकार किए जाने के बावजूद, जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं हैं, उन्हें राशन समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करने की बात कही जा रही है। उनके अनुसार, इस तरह के कदम असंवैधानिक हैं। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर उनकी 'हिंदुत्ववाद-विरोधी पोस्ट' को हटाने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा दी गई समयसीमा के सवाल पर विकाश रंजन ने कहा, "वह घड़ी की सुई घुमाते रहें। मैं उन्हें ही अदालत में घसीटूंगा और कानूनी तर्कों से उन्हें उचित सबक सिखाऊँगा।"
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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति
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अपलोडर: VKA-43UUB7 • प्रकाशित: 11 अक्टूबर 2026 • 4 मिनट पठन

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