अमेरिकी महिला श्रमिकों के वीरतापूर्ण संघर्ष की खबर यूरोप तक पहुंची. विशेष रूप से इसने यूरोपीय समाजवादी महिलाओं को काफी प्रेरित किया, जिन्होंने जर्मन समाजवादी नारीवादी क्लारा ज़ेटकिन (1857-1933) की पहल पर अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी महिला सम्मेलन की स्थापना की गई थी. इस संस्था की पहली बैठक 1907 में स्टटगार्ट में हुई थी. अमेरिका में 1908 में हुए आंदोलन ने इन्हें काफी प्रेरित किया. तीन साल बाद, 1910 में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय के कोपेनहेगन सम्मेलन में क्लारा ज़ेटकिन ने निम्नलिखित प्रस्ताव रखा:- सभी देशों की समाजवादी महिलाएं हर साल महिला दिवस मनाएंगी, जिसका सर्वप्रथम उद्देश्य महिलाओं को मताधिकार दिलाने में सहायता करना होना चाहिए.
8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में मनाया जाता है. विभिन्न देश के राष्ट्राध्यक्ष तथा अफसर से लेकर छोटे-छोटे गांवों के पंचायत के पदाधिकारियों तक, हर कोई अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का अपना आधिकारिक कर्तव्य निभाएंगे तो वहीं कमर्शियल उत्पाद वाले महिला सशक्तिकरण और बराबरी का जश्न मनाते अपना विज्ञापन चमकाएंगे, लेकिन इसके पीछे के इतिहास पर अक्सर कोई बातें नहीं करेगा.
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास कामकाजी महिलाओं के अपने अधिकारों के लिए एक लम्बी चली लड़ाई का प्रतीक है, जिसे सबसे पहले व्लादिमीर इल्यिच लेनिन ने रूस में कामकाजी महिलाओं के संघर्ष के सम्मान में एक अंतर्राष्ट्रीय मान्यता दी और 8 मार्च 1922 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मानाने की घोषणा की. उसके 53 साल बाद कहीं जाकर संयुक्त राष्ट्र ने 1975 में इसे अपनी सूची में शामिल किया.
आज जब पूरे विश्व में श्रमिक आन्दोलन और ट्रेड यूनियन आन्दोलन नव फासीवादी शक्तियों से जूझ रहा है यह जानना बहुत जरुरी हो जाता है कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास इन्ही श्रम आंदोलनों और कामकाजी महिलाओं द्वारा अपने वेतन, वोट देने का अधिकार और कामकाज के घंटों में कटौती को की मांगों के साथ शुरू हुआ था. आज के बाजारवादी परिवेश के फैशन शो, सौन्दर्य प्रसाधन, और महंगे परिधानों के प्रचार की आड़ में इस दिवस का असली मकसद कहीं विलुप्त न कर दिया जाए इसलिए इसकी जानकारी आवश्यक है.
इसकी नीव उस समय पड़ी जब अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में सुई-धागे के काम में लगी करीब 15,000 कामकाजी महिलाओं ने 8 मार्च 1908 के दिन मैनहट्टन के लोअर ईस्ट साइड स्थित रटगर्स स्क्वायर में अपना खुद का यूनियन बनाने, काम के घंटों में कटौती और मतदान के अधिकार की मांग के लिए प्रदर्शन किया. अगले साल फिर करीब 30,000 कामकाजी महिलाओं ने प्रदर्शन किया जिसके कारण अमेरिका में पहली महिला कामगार यूनियन बन पायी.
इसी बीच, अमेरिकी महिला श्रमिकों के वीरतापूर्ण संघर्ष की खबर यूरोप तक पहुंची. विशेष रूप से इसने यूरोपीय समाजवादी महिलाओं को काफी प्रेरित किया, जिन्होंने जर्मन समाजवादी नारीवादी क्लारा ज़ेटकिन (1857-1933) की पहल पर अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी महिला सम्मेलन की स्थापना की गई थी. इस संस्था की पहली बैठक 1907 में स्टटगार्ट में हुई थी. अमेरिका में 1908 में हुए आंदोलन ने इन्हें काफी प्रेरित किया. तीन साल बाद, 1910 में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय के कोपेनहेगन सम्मेलन में क्लारा ज़ेटकिन ने निम्नलिखित प्रस्ताव रखा:- सभी देशों की समाजवादी महिलाएं हर साल महिला दिवस मनाएंगी, जिसका सर्वप्रथम उद्देश्य महिलाओं को मताधिकार दिलाने में सहायता करना होना चाहिए. इस मांग को समाजवादी सिद्धांतों के अनुसार महिलाओं से जुड़े समग्र मुद्दे के साथ मिलकर निपटाया जाना चाहिए. महिला दिवस का अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप होना चाहिए और इसकी तैयारी सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए. प्रस्ताव पारित हो गया: 8 मार्च की तारीख को प्राथमिकता दी गई, हालांकि इसकी कोई औपचारिक तिथि निर्धारित नहीं की गई थी.
रूस में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का विशेष महत्व था – यह रूसी क्रांति का मुख्य कारण बना. 8 मार्च (नए कैलेंडर) को पेट्रोग्राड की महिला श्रमिकों ने शांति और रोटी की मांग करते हुए सामूहिक हड़ताल और प्रदर्शन किया था. हड़ताल आंदोलन एक कारखाने से दूसरे कारखाने तक फैल गया और प्रभावी रूप से एक विद्रोह में बदल गई. 1922 में कामकाजी महिलाओं की भूमिका के सम्मान में, लेनिन ने घोषणा की कि 8 मार्च को आधिकारिक तौर पर महिला दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए. बहुत बाद में, यह सोवियत संघ और अधिकांश पूर्व समाजवादी देशों में राष्ट्रीय अवकाश बन गया. 1975 (अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष) में संयुक्त राष्ट्र ने 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मान्यता दी थी, इसके बावजूद कम्युनिस्टों द्वारा मनाया जाने वाला यह सार्वजनिक अवकाश पश्चिम में बड़े पैमाने पर उपेक्षित रहा.
आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें महिलाओं के अधिकारों के लिए हुए आंदोलनों, लम्बी लड़ाई द्वारा अर्जित अधिकारों तथा इसे विश्व भर में महिलाओं के संघर्षों से जोड़ने और दुनिया भर की कामकाजी महिलाओं के साथ अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता है. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की समाजवादी नारीवादी उत्पत्ति को कभी नहीं भुलाया नहीं जा सकता.
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कामकाजी महिलाओं के अपने अधिकारों के लिए एक लम्बी चली लड़ाई का प्रतीक है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
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