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हम होंगे कामयाब एक दिन - *सोनामनी टुडू*

राजीव कुमार पाण्डेय•09 अप्रैल 20266 मिनट पठन16 बार पढ़ा गया
आज का दिन देश के विभिन्न राजनीतिक मंच एवं सामाजिक संगठन मंच से लेकर यूनाइटेड नेशन के मंच तक महिलाओं को सम्मान एवं आदर दिया जाता है। नेता अपने भाषण में महिलाओं के लिए बड़ी-बड़ी बात करते हैं, बहुत से वादे करते हैं यहां तक कि अपने देश का आंकड़ा बताते हुए भाषण देते हैं कि हमारी सरकार आने के बाद महिलाओं के ऊपर जुल्म इतना प्रतिशत से इतना प्रतिशत कम हो गयाहै ।आने वाले कुछ ही समय में खत्म कर देने का वादा तक कर देते हैं। सुनकर जोर-जोर से तालियां बजने लगती हैं। पर यह तालियां किसके लिए ? साम्राज्यवादी जानवरों के बम -बारूद से मरने वाली महिलाओं के लिए या हर रोज जुल्म का शिकार हो रही उन महिलाओं के लिए जिन्हें आज तक न्याय के नाम पर सिर्फ नाराजगी और हताशा मिली है। देश की वर्तमान परिस्थिति अगर मानवीय आंखों से देखेंगे तोइअमेरिका, इजरायल जैसे साम्राज्यवादी शासक हर रोज हजारों महिलाओं को मार रहे हैं, अनाथ बना रहे हैं विधवा बना रहे हैं उनकी कोख उजाड़ रहे हैं। साम्राजवादी शासक दुनिया को मुट्ठी में करने के लिए महिला, वृद्ध मासूम बच्चे तक को नहीं छोड़ रहे हैं। एक देश दूसरे देश को दुश्मन बना रहे हैं। कमजोर देश को नरक की जिंदगी जीने में मजबूर कर रहे हैं। यही इंसान आज के दिन विश्व की महिलाओं को बधाई देते हैं।
हम होंगे कामयाब एक दिन     -   *सोनामनी टुडू*
__________________________________________ 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है ।इसका उद्देश्य सामाजिक ,आर्थिक ,सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियां को सम्मान देना, महिलाओं की लैंगिक समानता, अधिकारों एवं जागरूकता को बढ़ावा देना। इस दिन को महिलाओं ने त्याग, बलिदान और अपने कठोर परिश्रम एवं संघर्ष से साबित किया है कि महिला भी पुरुष से कम नहीं, समाज के हर क्षेत्र में पुरुष के बराबर है। फिर भी महिलाओं को गर्भ से लेकर शमशान तक कदम-कदम पर संघर्ष करना पड़ता है। क्यों ? भारत के इतिहास में तो महिलाओं के लिए राजा राममोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे महान समाज सुधारकों ने समाज में बहुत बड़े परिवर्तन लाए थे। शहीद फूलो ,झानो ,प्रीतिलता वाद्देदार से लेकर बहुत सी महिला वीरांगनाओं ने अत्याचार खिलाफ एवं आजादी के लिए हथियार उठायी थी। मूल रूप से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का श्रेय 20 वीं सदी के श्रमिक आंदोलन को जाता है।जिसमें काम का समय निर्धारण ,समान वेतन, मताधिकार आदि की मांग उठी थी। इस आंदोलन से प्रेरित होकर बहुत सारे देशों ने महिलाओं के समान अधिकार के लिए आंदोलन किया। और आज के सम्मानित दिन को हासिल किया। आज का दिन देश के विभिन्न राजनीतिक मंच एवं सामाजिक संगठन मंच से लेकर यूनाइटेड नेशन के मंच तक महिलाओं को सम्मान एवं आदर दिया जाता है। नेता अपने भाषण में महिलाओं के लिए बड़ी-बड़ी बात करते हैं, बहुत से वादे करते हैं यहां तक कि अपने देश का आंकड़ा बताते हुए भाषण देते हैं कि हमारी सरकार आने के बाद महिलाओं के ऊपर जुल्म इतना प्रतिशत से इतना प्रतिशत कम हो गयाहै ।आने वाले कुछ ही समय में खत्म कर देने का वादा तक कर देते हैं। सुनकर जोर-जोर से तालियां बजने लगती हैं। पर यह तालियां किसके लिए ? साम्राज्यवादी जानवरों के बम -बारूद से मरने वाली महिलाओं के लिए या हर रोज जुल्म का शिकार हो रही उन महिलाओं के लिए जिन्हें आज तक न्याय के नाम पर सिर्फ नाराजगी और हताशा मिली है। देश की वर्तमान परिस्थिति अगर मानवीय आंखों से देखेंगे तोइअमेरिका, इजरायल जैसे साम्राज्यवादी शासक हर रोज हजारों महिलाओं को मार रहे हैं, अनाथ बना रहे हैं विधवा बना रहे हैं उनकी कोख उजाड़ रहे हैं। साम्राजवादी शासक दुनिया को मुट्ठी में करने के लिए महिला, वृद्ध मासूम बच्चे तक को नहीं छोड़ रहे हैं। एक देश दूसरे देश को दुश्मन बना रहे हैं। कमजोर देश को नरक की जिंदगी जीने में मजबूर कर रहे हैं। यही इंसान आज के दिन विश्व की महिलाओं को बधाई देते हैं। सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्ता हमारा कहने वाला देश जहाँ साम्राज्यवादी ट्रंप का तलवे चाटने वाले मनुवादी आरएसएस के कठपुतले बीजेपी शासक हिंदू धर्म को अपने कंधे में लिए देवियों की मूर्ति बनाकर पूजते हैं, उनके बारे में कोई भूल से कुछ कह दिया या कहीं मूर्ति टूट गई तो मामला हाई कोर्ट में नहीं सुप्रीम कोर्ट में फैसला होता है। मगर चलते फिरते जिंदा हर रोज हजार महिलाओं के ऊपर अत्याचार होता है ,मार दिया जाता है, इनको न्याय मिलना तो दूर की बात ,बहुत सारे मामले दायर तक नहीं होते हैं। भाजपा सरकार द्वारा शासित मणिपुर, त्रिपुरा जैसे राज्य में महिलाओं को नंगे घुमाया जाता है, पुलिस के सामने रेप किया जाता है,जला दिया जाता है, पश्चिम बंगाल राज्य के आर जी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के ऊपर अत्याचार करके बेरहमी से मार दिया जाता है, विजय जुलूस में तमन्ना जैसे छोटी बच्ची को बम से टुकड़ा -टुकड़ा किया जाता है। इनका न्याय का क्या ? संविधान में महिलाओं के ऊपर अत्याचार रोकने के लिए , भेदभाव को कम करने के लिए बहुत सारे कानून बनाए गए, पर यह तो किताब के पन्ने में दब के रह गया, मगर कानून और सजा जितना कठोर है, असल जिंदगी में उससे भी ज्यादा कठोर और कठिन दर्द हजारों महिलाएं को झेलनी पड़ता है। देश में महिला आत्मनिर्भर के नाम पर योजनाएं चलाई जाती हैं, इनके लिए अलग से बजट आबंटित की जाती है।निर्वाचन में आरक्षण दिया जाता है ,मगर साधारण महिलाओं को जितना उपकार नहीं हुआ है उससे ज्यादा नेता और पूंजीपतियों को हुआ है। वर्तमान सरकार ने राजनीतिक फायदे के लिए धर्म का धंधा खोलकर सांप्रदायिक दंगों को बढ़ावा दिया है ,जिसमें महिलाएं हर दिन शिकार हो रही हैं, देश के संसाधनों को बेसरकारीकरण के हवाले करते हुए लाखों महिलाओं को नौकरी से वंचित किया गया है, शिक्षा से वंचित गया किया है, अपने घर -जमीन से बेदखल किया गया है, ग्रामीण क्षेत्र में 100 दिन का रोजगार अधिनियम को खत्म करके सबसे ज्यादा महिलाओं के ऊपर जुल्म किया गया है, सामानों का दाम बढ़ाकर और रोजगार के अवसर को खत्म करके कम पैसों में ज्यादा घंटों तक काम करने के लिए आम लोगों को मजबूर किया गया है, देश की महिलाओं को माइक्रोफाइनेंस के जाल में फंसा दिया गया है। और यही इंसान महिला आत्मनिर्भर और सम्मान की बातें करते हैं , विकसित भारत, हमारा भारत बोलकर सबसे ज्यादा देश को लूटा है। इतना ही नहीं विभिन्न राज्य में अपनी सरकार बनाने के लिए गलत तरीके से SIR के नाम पर मताधिकार छीन रहे हैं। साम्राज्यवादी शासको को पता है, जब एक महिला शिक्षित होती है तो परिवार शिक्षित होता हैं जब परिवार शिक्षित हो जाता है तो पूरा समाज शिक्षित होता है, जब समाज शिक्षित हो जाएगा तो देश शिक्षित हो जाएगा, जब देश शिक्षित हो जाएगा तो जुल्म के खिलाफ आवाज उठाएंगे। आज के दिन मंच पर जाकर महिलाओं के सम्मान की बात करेंगे ,तालियां बजेंगे ,मगर यही लोग बाकी 364 दिन महिलाओं को गालियाँ देंगे,उसके ऊपर जुल्म किया जाएगा। क्या यही एक दिन यानी 8 मार्च को ही महिलाओं का सम्मान का दिन है और बाकी दिन जुल्म सहने का ? देश में महिलाओं के लाखों प्रश्न हैं। पर इनका एक भी जवाब नहीं। जवाब तब मिलेगा जब हम सब मिलकर समाजवादी विचारधारा से देश के साम्राजवादी मनुवादी विचारधारा को खत्म करेंगे तो हमारे देश एवं समाज में सिर्फ 8 मार्च को नहीं ,हमें हर दिन सिर ऊँचा करके सम्मान के साथ अपना अधिकारों को मुट्ठी में लेकर जी सकेंगे। और इसको हासिल करने के लिए हमें समाजवादी पथ अपनाकर लड़ना होगा। संविधान के किताबों में बंद कानून और अधिकारों का हमें मुख बनकर आवाज उठाना होगा, उनका हाथ ,पैर बनकर जुल्म के खिलाफ लड़ना होगा। आज का दिन सिर्फ मनोरंजन का नहीं शपथ लेने का दिन है। हम होंगे कामयाब एक दिन।

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हम होंगे कामयाब एक दिन - *सोनामनी टुडू*

प्रकाशित: 09 अप्रैल 2026 • 6 मिनट पठन

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