वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | Tuesday, 13 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंछात्र-युवा

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

छात्र-युवा

चुनाव आयोग के साथ द्विपक्षीय बैठक में: मोहम्मद सलीम,शमीक लाहिड़ी के साथ आफ्रीन बेगम की उपस्थिति का महत्व - डॉ अशोक सिंह

राजीव कुमार पाण्डेय•09 अप्रैल 20263 मिनट पठन16 बार पढ़ा गया
पार्टी के पोलिटब्यूरो और केंद्रीय कमेटी के सदस्य के साथ एक युवा चेहरे को देखा गया
चुनाव आयोग के साथ द्विपक्षीय बैठक में: मोहम्मद सलीम,शमीक लाहिड़ी के साथ आफ्रीन  बेगम की उपस्थिति का महत्व - डॉ अशोक सिंह
चुनाव आयोग के साथ द्विपक्षीय बैठक में: मोहम्मद सलीम,शमीक लाहिड़ी के साथ आफ्रीन बेगम की उपस्थिति का महत्व । 🔵कोलकाता।आज न्यूटाउन के एक होटल में चुनाव आयोग की फुल बेंच के साथ पश्चिम बंगाल के राजनीतिक दलों के साथ द्विपक्षीय बैठकें आयोजित हुयी। सी पी आई (एम )की ओर से पार्टी के पोलिटब्यूरो सदस्य पश्चिम बंगाल के सचिव मोहम्मद सलीम , केन्द्रीय कमेटी के सदस्य पूर्व सांसद शमीक लाहिड़ी के साथ युवाओं की प्रतिनिधि जादवपुर विश्वविद्यालय की छात्र नेता आफ्रीन बेगम ने चुनाव आयोग की फुल बेंच के साथ बैठक में हिस्सा लिया। 🔴बैठक से बाहर निकलकर मीडिया से बात करने के पहले मोहम्मद सलीम ने जिस तरह आफ्रीन को कैमरे के सामने आगे कर दिया,पाँच साल पहले की घटना याद आती है,जब नंदीग्राम की सी पी आई (एम)की उम्मीदवार मीनाक्षी मुखर्जी को साथ लेकर पार्टी के मुख्यालय में मोहम्मद सलीम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।प्रेस कॉन्फ्रेंस को पहले मीनाक्षी मुखर्जी ने सम्बोधित किया था।सी पी आई (एम) के इतिहास में यह अभूतपूर्व घटना घटी थी ,जब नयी पीढ़ी की प्रतिनिधि को पार्टी के पोलिटब्यूरो सदस्य के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करने का अवसर दिया गया था। 🔴मोहम्मद सलीम ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा कि शमीक लाहिड़ी और आफ्रीन के साथ उन्होंने चुनाव आयोग की फुल बेंच के साथ बैठक की। मोहम्मद सलीम ने याद दिलाया कि 18 साल में वोट देने के अधिकार की माँग सबसे पहले सी पी आई ( एम)ने की थी।आफ्रीन बेगम ने बैठक में युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए उनकी समस्याओं पर बात की। 🔵बंगाल का मीडिया अभी भी आफ्रीन बेगम की उपस्थिति पर हैरान है। मीडिया की जानकारी का एक नमूना है कि TV-9चैनल ने आफ्रीन बेगम को सी पी आई (एम )की राज्य कमेटी की सदस्य के साथ कलकत्ता हाईकोर्ट का वकील बताया।यह सूचना पूरी तरह से गलत है। आफ्रीन बेगम सी पी आई (एम)की राज्य कमेटी या जिला कमेटी की भी सदस्य नहीं हैं। जादवपुर विश्वविद्यालय में गीतश्री सरकार के बाद छात्र आंदोलन में आफ्रीन की पहचान एक संगठक के तौर पर रही है। जादवपुर विश्वविद्यालय से शोध कर रही आफ्रीन आर जी कर मेडिकल कॉलेज की घटना को ऐतिहासिक आंदोलन बनाने की अन्यतम संगठक रही हैं। 🔴मूलतः हुगली जिला से आनेवाली आफ्रीन इस समय कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में रहती हैं।यह वही इलाका है जहाँ पर सबसे ज्यादा उर्दू भाषी मध्यवर्ग और उच्च मध्य वर्ग निवास करता है। बंगाल की वामपंथी राजनीति में अल्पसंख्यक समुदाय की आधी आबादी से आफ्रीन बेगम पहली बांग्लाभाषी हैं जो अंग्रेजी के साथ हिंदी धाराप्रवाह बोलती हैं। पश्चिम बंगाल की वामपंथी राजनीति में बांग्लाभाषी आधी आबादी के मुस्लिम समुदाय से अभी तक राज्य स्तर पर कोई लोकप्रिय चेहरा नहीं है। 🔵चुनाव आयोग की बैठकों में अभी तक सी पी आई (एम) की ओर से किसी युवा को शामिल नहीं किया गया था।यह पहला मौका है जब पार्टी के पोलिटब्यूरो और केंद्रीय कमेटी के सदस्य के साथ एक युवा चेहरे को देखा गया। आनेवाले समय में बंगाल की वामपंथी राजनीति में आफ्रीन बेगम की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। अखिल भारतीय स्तर पर पश्चिम बंगाल से अभी तक आधी आबादी से कोई मुस्लिम समुदाय का चेहरा लोकप्रिय नहीं हुआ है। बांग्ला, अंग्रेजी और हिंदी धाराप्रवाह बोलने के कारण पूरी संभावना है कि आफ्रीन बेगम अखिल भारतीय राजनीति में अपनी पहचान बना सकेंगी।

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

चुनाव आयोग के साथ द्विपक्षीय बैठक में: मोहम्मद सलीम,शमीक लाहिड़ी के साथ आफ्रीन बेगम की उपस्थिति का महत्व - डॉ अशोक सिंह

प्रकाशित: 09 अप्रैल 2026 • 3 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

361 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

358 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

338 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

333 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
साहित्य-संस्कृति

प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ

प्रश्न करना /

राजद्रोह /

आंदोलन करना /

देशद्रोह /

हक़ मांगना /

राष्ट्रद्रोह /

बना दिया ।

इन सबके बावजूद /

लोग डर नहीं रहे /

छोटे-छोटे बच्चे /

खिलाफत को /

उतारू हैं ।

16 सितंबर 2026

राज्य

गड़वेता-शालबनी के 7 पार्टी दफ्तरों में बीजेपी का उपद्रव, लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।

16 सितंबर 2026

साहित्य-संस्कृति

माफीनामा: हूबनाथ

हम तो /

नारी शक्ति के समक्ष /

नतमस्तक हैं ।

हम सभी /

एक स्त्री से ही तो /

जनमे हैं ।

उसी के संरक्षण में /

हमारा स्वर्णिम /

बालपन बीता है ।

12 सितंबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
ब्लॉग

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

गीता या ग्रंथ साहिब नहीं, फांसी से ठीक पहले वे (भगत सिंह) लेनिन को पढ़ रहे थे। तो क्या भगत सिंह की देशभक्ति में कोई कमी थी? इतिहासकार बिपन चंद्र लिखते हैं कि विरोध में बॉम्बे के सभी सूती मिलों और रेल श्रमिकों की पूर्ण हड़ताल से शहर थम गया। सेना बुलाई गई। सड़कों पर 16 श्रमिक शहीद हुए और 50 घायल हुए। भारत में श्रमिकों की हड़ताल देखकर 'इन्फ्लेमेबल मटेरियल इन वर्ल्ड पॉलिटिक्स' लेख में व्लादिमीर लेनिन ने लिखा: 'इस बीच भारत में भी सर्वहारा जनता जागरूक राजनीतिक जनसंघर्ष खड़ा कर रही है। और इसके परिणामस्वरूप भारत में रूसी शैली के ब्रिटिश शासन की स्थिति भी दयनीय हो गई है।'

मोहम्मद सलीम • 25 अप्रैल 2026

राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

श्रद्धांजलि

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिल्म निर्देशक और लेखक सत्यजीत राय ने महानायक उत्तम कुमार के आकस्मिक निधन (24 जुलाई 1980) पर आनंदबाज़ार पत्रिका में 26 जुलाई 1980 को एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक आलेख लिखा था, जिसका बांग्ला शीर्षक था - "অস্তমিত নক্ষত্র" - 'अस्तमित नक्षत्र'। यह आलेख 24 जुलाई 2019 को 'अस्तमित उत्तम' (অস্তমিত উত্তম) के नाम से पुनः प्रकाशित हुआ। इस शीर्षक में बहुत ही सुंदर शब्दावली का खेल किया गया , जिसके दो समानांतर अर्थ निकलते हैं: उत्तम कुमार के नाम के संदर्भ में - यहाँ 'उत्तम' का सीधा अर्थ अभिनेता 'उत्तम कुमार' से है। यानी "उत्तम कुमार का अस्त हो जाना (निधन हो जाना)"। बांग्ला और हिन्दी दोनों में 'उत्तम' का गुणवाचक अर्थ 'सर्वश्रेष्ठ' या 'सबसे अच्छा' होता है। इसके अनुसार इस शीर्षक का भावार्थ है—"श्रेष्ठता का ढल जाना" या "एक स्वर्णिम युग का अंत"। अपने इस आलेख में महानायक के निधन के बाद उनकी अभिनय क्षमता का विश्लेषण किया था महान निर्देशक सत्यजीत राय ने। आनंदबाज़ार पत्रिका का आभार व्यक्त करते हुए उत्तम कुमार (03 नवंबर 1926- 24 जुलाई 1980) जन्मशती वर्ष में हिन्दी पाठकों के लिए प्रस्तुत है इस ऐतिहासिक आलेख का हिन्दी में भावानुवाद । भावानुवाद करते समय मूल लेख का भाव, विश्लेषण और महान निर्देशक सत्यजीत राय की भाषा की गंभीरता बनाए रखने की कोशिश की गई है। जन्मशती वर्ष में किवदंती महानायक का सादर स्मरण, श्रद्धांजलि ।

केशव कुमार भट्टड़ • 10 सितंबर 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement