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कलकत्ता विश्वविद्यालय में 57% शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए शिक्षकों का धरना
सारांश
कलकत्ता विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग में शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली पड़े हुए हैं.
कलकत्ता विश्वविद्यालय में 57% शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए शिक्षकों का धरना
*राजीव कुमार पाण्डेय *
एक समय पूरे भारत में उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में बंगाल का स्थान सबसे ऊँचा था. विभिन्न विषयों की पढ़ाई, प्रख्यात शिक्षक और छात्रों के संयोग स्थल के रूप में कोलकाता को भारत की बौधिक राजधानी माना जाता रहा है. कलकत्ता विश्वविद्यालय बंगाल ही नहीं बल्कि पूरे भारत के शिक्षा जगत में अपना एक खास स्थान रखता है. आज उसी विश्वविद्यालय में शिक्षकों का संकट अपने चरम पर है. कलकत्ता विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग में शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली पड़े हुए हैं. जहाँ शिक्षकों की कमी की वजह से छात्रों की पढ़ाई पर काफी गहरा असर पड़ रहा है ,वहीं कार्यरत शिक्षकों पर भी काम का काफी गहरा दबाव रहने की वजह से उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.
अकेले कला विभाग में शिक्षकों के लगभग 60% खाली पड़े हुए हैं. जहाँ एक और राज्य में बेरोजगारी चरम पर है और राज्य के नौजवान वर्षों से लगातार इसके लिए आन्दोलन कर रहे हैं. जहाँ बेरोजगारी की वजह से पलायन अपने चरम पर है, वहाँ यह कृत्य सरकार का एक क्रूर मजाक ही लगता है. पिछले अक्टूबर में कार्यभार सँभालने के बाद वर्तमान उपकुलपति प्रोफेसर आशुतोष घोष ने यह वादा किया था कि खाली पड़े शिक्षकों के पदों पर नई भर्तियाँ जल्द ही कर दी जाएगी, लेकिन यह वादा कभी पूरा नहीं किया गया.
इन सब विषयों को लेकर विश्वविद्यालय के शिक्षक संगठन(CUTA) की तरफ से रिक्त पदों पर तत्काल भरती की माँग पर कुलपति को फिर से एक ज्ञापन सौंपा गया. गुरुवार 19 मार्च के दोपहर 12 बजे से ही शिक्षक दरभंगा भवन परिसर में धरना दे रहे हैं. इन शिक्षकों का कहना है कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों के कुल 883 पद खाली पड़े हुए हैं . उनका सवाल है कि क्या कलकत्ता विश्वविद्यालय जैसा संस्थान केवल मात्र अपनी 43% शिक्षक क्षमता को लेकर चल सकता है? शिक्षक संगठनों ने इस विषय पर कई बार विरोध प्रदर्शन किया है और ज्ञापन सौंपा है, लेकिन इसका कोई हल नहीं निकाला गया.
विश्वविद्यालय के कला विभाग में 60% पद खाली पड़े हैं. स्वीकृत पद 251 हैं, जबकि शिक्षकों की संख्या केवल 102 है। विज्ञान विभाग में 378 पद हैं, लेकिन शिक्षकों की संख्या 58 प्रतिशत है. वाणिज्य विभाग में 34 पदों में से केवल 18 पद हैं. प्रौद्योगिकी विभाग में 159 पदों में से 76 पद हैं. पत्रकारिता और अन्य विभागों में 35 पदों में से केवल 16 पद हैं. बिजनेस मैनेजमेंट, जर्नलिज्म और मीडिया तथा समुद्री विज्ञान जैसे विषयों के लिए केवल एक ही शिक्षक हैं. हालाँकि, बिजनेस मैनेजमेंट के लिए 12, समुद्री विज्ञान के लिए 9 और पत्रकारिता के लिए 6 पद स्वीकृत हैं.
हालाँकि उपकुलपति प्रोफ़ेसर आशुतोष घोष ने आश्वासन दिया है कि चुनाव के बाद आचार संहिता की अवधि समाप्त होने पर ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी, लेकिन यह आश्वासन तो पिछले कई सालों से दिया जा रहा है. आख़िर बेरोजगारी और बेकारी की समस्या से जूझ रहे बंगाल के नौजवानों के साथ सरकार का यह क्रूर मजाक कब तक चलता रहेगा ?
फोटो सौजन्य:- आनंदबाजार पत्रिका
कलकत्ता विश्वविद्यालय में 57% शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए शिक्षकों का धरना
अपलोडर: rajiv4mkolkata@gmail.com• प्रकाशित: 09 अप्रैल 2026 • 3 मिनट पठन
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लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।
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