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क्यों पश्चिम बंगाल में वामपंथ के revival से आंखें मूंदे बैठे हैं हमारे 'साहसी यू ट्यूबर्स' - प्रतुल जोशी

प्रतुल जोशी•16 अप्रैल 20262 मिनट पठन57 बार पढ़ा गया
यूट्यूब पर एक बड़ी संख्या ऐसे यूट्यूबर्स की है जो अपने को बहुत ही लोकतांत्रिक मानते हैं। उसमें अभिसार शर्मा हैं ,पुण्य प्रसून वाजपेयी हैं, अजित अंजुम हैं। ऐसे बहुत सारे नाम हैं लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में इन सबका रवैया बेहद एक पक्षीय रहता है। इस बारे में इन साहसी यूट्यूबर्स की प्रतिक्रिया आपको देखने को नहीं मिलेगी। ममता जी की छांव में पिछले वर्षों में बीजेपी का विरोध करते हुए यह 'बहुत न्यूट्रल' यूट्यूबर्स काफ़ी पुष्पित पल्लवित भी हुए हैं। शायद इसीलिए अपने यूट्यूब चैनल में वामपंथ का ज़िक्र करना आवश्यक नहीं समझते । लेकिन मैं इनको यह सूचित कर देना चाह रहा हूँ कि इस बार का पश्चिम बंगाल का चुनाव 2011, 2016 और 2021 का विधान सभा चुनाव नहीं है। तृणमूल कांग्रेस से लोगों का बड़े पैमाने पर मोहभंग हुआ है। उसकी लूट, अराजकता और गुंडागर्दी का प्रतिवाद बड़े पैमाने पर वहाँ की जनता कर रही है। साथ ही भारतीय जनता पार्टी की सांप्रदायिक राजनीति में पश्चिम बंगाल की जनता का कोई यक़ीन नहीं है।

क्यों पश्चिम बंगाल में वामपंथ के revival से आंखें मूंदे बैठे हैं हमारे 'साहसी यू ट्यूबर्स'

यूट्यूब पर एक बड़ी संख्या ऐसे यूट्यूबर्स की है जो अपने को बहुत ही लोकतांत्रिक मानते हैं। उसमें अभिसार शर्मा हैं ,पुण्य प्रसून वाजपेयी हैं, अजित अंजुम हैं। ऐसे बहुत सारे नाम हैं लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में इन सबका रवैया बेहद एक पक्षीय रहता है। पता नहीं क्यों यह 2026 के बदलते हुए बंगाल को देखने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। जिस तरह से पश्चिम बंगाल में जनता का बड़ा हिस्सा , ख़ासकर युवाओं का , वाम मोर्चे को अपना भरपूर समर्थन ही नहीं दे रहा है बल्कि वाम मोर्चे के प्रत्याशियों के साथ दिन रात जी तोड़ मेहनत कर रहा है और जनता से एक बड़ा अच्छा रिस्पॉन्स इस बार वाम मोर्चा को मिल रहा है। इस बारे में इन साहसी यूट्यूबर्स की प्रतिक्रिया आपको देखने को नहीं मिलेगी। ममता जी की छांव में पिछले वर्षों में बीजेपी का विरोध करते हुए यह 'बहुत न्यूट्रल' यूट्यूबर्स काफ़ी पुष्पित पल्लवित भी हुए हैं। शायद इसीलिए अपने यूट्यूब चैनल में वामपंथ का ज़िक्र करना आवश्यक नहीं समझते । लेकिन मैं इनको यह सूचित कर देना चाह रहा हूँ कि इस बार का पश्चिम बंगाल का चुनाव 2011, 2016 और 2021 का विधान सभा चुनाव नहीं है। तृणमूल कांग्रेस से लोगों का बड़े पैमाने पर मोहभंग हुआ है। उसकी लूट, अराजकता और गुंडागर्दी का प्रतिवाद बड़े पैमाने पर वहाँ की जनता कर रही है। साथ ही भारतीय जनता पार्टी की सांप्रदायिक राजनीति में पश्चिम बंगाल की जनता का कोई यक़ीन नहीं है। इसलिए पश्चिम बंगाल के अंदर बिलकुल अलग क़िस्म का माहौल बन रहा है और जैसे जैसे मतदान की तारीख़ नज़दीक आएगी, वामपंथ की राजनीति और मज़बूत होकर आगे बढ़ने की संभावना है। जब पश्चिम बंगाल के नतीजे आएंगे तो मेरी आज की इस पोस्ट का आकलन तब आप लोग करिएगा। मुझे बड़ी खुशी होगी।

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क्यों पश्चिम बंगाल में वामपंथ के revival से आंखें मूंदे बैठे हैं हमारे 'साहसी यू ट्यूबर्स' - प्रतुल जोशी

प्रकाशित: 16 अप्रैल 2026 • 2 मिनट पठन

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